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माता-पिता ने की मजदूरी और बेटा दूसरी बार बना कनाडा का रक्षामंत्री, नाम है हरजीत सिंह सज्जन
Tue, 18 Feb 2020 03:22 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, जालंधर
अमर उजाला नेटवर्क, जालंधर
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 18 Feb 2020 03:22 PM IST
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हरजीत सिंह सज्जन
- फोटो : BBC
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होशियारपुर (पंजाब) में जन्मे हरजीत सिंह सज्जन कनाडा के रक्षा मंत्री हैं, लेकिन शायद ही लोगों को पता हो कि उनके माता-पिता जब कनाडा पहुंचे थे तो उन्हें मजदूरी कर अपना जीवनयापन करना पड़ा। हरजीत सिंह के पिता जहां एक लकड़ी के आरा मिल में काम करते थे, वहीं उनकी मां ने खेतों में मजदूरी की।
कनाडा में हाल ही में हुए चुनाव में हरजीत सिंह ने वैंकूवर सीट से दोबारा जीत हासिल की और वह लगातार दूसरी बार कनाडा के रक्षामंत्री बने हैं। हरजीत सिंह के पिता कुंदन सिंह सज्जन पंजाब पुलिस में हवलदार थे। हरजीत सिंह का जन्म 6 सितंबर 1970 को पंजाब के होशियारपुर जिले में हुआ था।
इसके बाद उनका परिवार 1976 में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया' में जाकर बस गया। उस समय हरजीत सिंह सज्जन केवल पांच साल के थे। कनाडा पहुंचने के बाद हरजीत सिंह और उनके परिवार का सफर आसान नहीं था। उनके पिता कुंदन सिंह सज्जन एक आरा मिल में काम करने लगे, वहीं हरजीत की मां पास के खेतों में मजदूरी करती थीं।
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दक्षिण वैंकूवर से 1989 में पढ़ाई पूरी करने के बाद हरजीत ने 1989 में ही 'द ब्रिटिश कोलंबिया रेजिमेंट' ज्वाइन की।
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कनाडा में हाल ही में हुए चुनाव में हरजीत सिंह ने वैंकूवर सीट से दोबारा जीत हासिल की और वह लगातार दूसरी बार कनाडा के रक्षामंत्री बने हैं। हरजीत सिंह के पिता कुंदन सिंह सज्जन पंजाब पुलिस में हवलदार थे। हरजीत सिंह का जन्म 6 सितंबर 1970 को पंजाब के होशियारपुर जिले में हुआ था।
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इसके बाद उनका परिवार 1976 में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया' में जाकर बस गया। उस समय हरजीत सिंह सज्जन केवल पांच साल के थे। कनाडा पहुंचने के बाद हरजीत सिंह और उनके परिवार का सफर आसान नहीं था। उनके पिता कुंदन सिंह सज्जन एक आरा मिल में काम करने लगे, वहीं हरजीत की मां पास के खेतों में मजदूरी करती थीं।
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दक्षिण वैंकूवर से 1989 में पढ़ाई पूरी करने के बाद हरजीत ने 1989 में ही 'द ब्रिटिश कोलंबिया रेजिमेंट' ज्वाइन की।
वर्ष 2015 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी
साल 1991 में हरजीत सेना में कमीशंड अफसर बने और लेफ्टिनेंट कर्नल के पद तक पहुंचे। कनाडा में वह पहले सिख थे, जिन्हें सेना की किसी रेजिमेंट की कमान सौंपी गई थी। हरजीत ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत साल 2015 में की। उन्होंने लिबरल पार्टी के टिकट पर साउथ वैंकूवर से चुनाव लड़ा।
पहली ही बार में वह जीतकर संसद पहुंचे और प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार में कनाडा के पहले सिख रक्षा मंत्री बन गए। देश भर में सिखों ने उनको अपना रोल माॅडल माना और उनको फॉलो करने लगे। हालांकि हरजीत सिंह का विवादों से भी नाता रहा है। वह वर्ल्ड सिख ऑर्गेनाइजेशन' से जुड़े और इससे उनकी काफी आलोचना हुई।
पंजाब दौरे के दौरान भी सज्जन विवादों से घिरे रहे। स्थानीय सरकार उनको खालिस्तान समर्थक कहकर उससे किनारा करके बैठी रही। सज्जन ने हाल ही में संपन्न हुए कनाडा के संसदीय चुनावों में दोबारा वैंकुवर से चुनाव लड़ा और बडी आसानी से जीत हासिल की। पीएम ट्रूडो ने उनको दोबारा कनाडा का रक्षा मंत्री नियुक्त किया है।
पहली ही बार में वह जीतकर संसद पहुंचे और प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार में कनाडा के पहले सिख रक्षा मंत्री बन गए। देश भर में सिखों ने उनको अपना रोल माॅडल माना और उनको फॉलो करने लगे। हालांकि हरजीत सिंह का विवादों से भी नाता रहा है। वह वर्ल्ड सिख ऑर्गेनाइजेशन' से जुड़े और इससे उनकी काफी आलोचना हुई।
पंजाब दौरे के दौरान भी सज्जन विवादों से घिरे रहे। स्थानीय सरकार उनको खालिस्तान समर्थक कहकर उससे किनारा करके बैठी रही। सज्जन ने हाल ही में संपन्न हुए कनाडा के संसदीय चुनावों में दोबारा वैंकुवर से चुनाव लड़ा और बडी आसानी से जीत हासिल की। पीएम ट्रूडो ने उनको दोबारा कनाडा का रक्षा मंत्री नियुक्त किया है।