{"_id":"5e4ba90e8ebc3ef2a841c11c","slug":"tashan-chandigarh-engineer-rohit-invented-jcb-machine-based-on-battery","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नार्वे में हिट हुआ रोहित का जेसीबी, डीजल की जगह बैट्री से दौड़ेगा, प्रदूषण भी नहीं होगा इससे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नार्वे में हिट हुआ रोहित का जेसीबी, डीजल की जगह बैट्री से दौड़ेगा, प्रदूषण भी नहीं होगा इससे
Tue, 18 Feb 2020 02:41 PM IST
खुशबू गोयल
नीरज कुमार, चंडीगढ़
नीरज कुमार, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 18 Feb 2020 02:41 PM IST
विज्ञापन
जेसीबी मशीन
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़ के रोहित शर्मा ने कमाल का जेसीबी बनाया। यह जेसीबी डीजल की बजाय बिजली से चालित बैट्री से नार्वे में दौड़ेगा। सबसे बड़ी खूबी इसकी यह है कि इसके चलने से प्रदूषण नहीं फैलेगा। नार्वे की कंपनियों को भी इस जेसीबी का इंतजार है। साथ ही जितनी पावर से डीजल का जेसीबी काम करता है उतनी ही ताकत से यह जेसीबी भी काम करेगा।
चंडीगढ़ के सेक्टर 38 निवासी युवा इंजीनियर रोहित शर्मा ने छह माह पहले हाइड्रोपावर एनर्जी स्टोरेज करके उस पर रिसर्च किया। छह माह तक उन्होंने कई प्रयोग किए और उसके बाद कमाल की मशीन बनाई। यह मशीन जेसीबी है। यह जून माह में बाजार में आएगा। इस जेसीबी के जरिये रोहित ने चंडीगढ़ का नाम भी रोशन किया।
पीटीयू से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद रोहित शर्मा नार्वे गए और वहां से एमटेक किया। उसके बाद वहीं नार्वे की राजधानी ओस्लो की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करना शुरू कर दिया। बेहतर कार्य की बदौलत वह कैटर पिलर कंपनी में प्रोजेक्ट हेड बन गए। रोहित शर्मा पिछले चार वर्षों से नार्वे में रह रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़ के सेक्टर 38 निवासी युवा इंजीनियर रोहित शर्मा ने छह माह पहले हाइड्रोपावर एनर्जी स्टोरेज करके उस पर रिसर्च किया। छह माह तक उन्होंने कई प्रयोग किए और उसके बाद कमाल की मशीन बनाई। यह मशीन जेसीबी है। यह जून माह में बाजार में आएगा। इस जेसीबी के जरिये रोहित ने चंडीगढ़ का नाम भी रोशन किया।
विज्ञापन
पीटीयू से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद रोहित शर्मा नार्वे गए और वहां से एमटेक किया। उसके बाद वहीं नार्वे की राजधानी ओस्लो की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करना शुरू कर दिया। बेहतर कार्य की बदौलत वह कैटर पिलर कंपनी में प्रोजेक्ट हेड बन गए। रोहित शर्मा पिछले चार वर्षों से नार्वे में रह रहे हैं।
विज्ञापन
छह माह रिसर्च के बाद परिणाम आए सामने
रोहित शर्मा का कहना है कि डीजल से चलने वाले जेसीबी तो बहुत हैं लेकिन उनसे प्रदूषण फैल रहा है। साथ ही ईंधन खर्च भी अधिक आता था। इसी को ध्यान में रखते हुए मैंने रिसर्च किया और बैट्री चालित जेसीबी तैयार किया है जो जल्द ही सबसे सामने आएगा। इस जेसीबी का वजन 10 टन होगा। मशीन की खासियत यह है कि यह शोर भी नहीं करेगी। बैट्री से चलने के कारण प्रदूषण भी नहीं फैलाएगा। बड़े-बड़े शहरों में कंस्ट्रक्शन के काम में यह मशीन बहुत ही कारगर होगी।
नहीं होगा कार्बन उत्सर्जन
इस मशीन की एक और खासियत है कि यह जीरो प्रतिशत कार्बन उत्सर्जित करेगी। उन्होंने बताया कि 10 मेगावाट बिजली क्षमता की बैट्री से यह जेसीबी दौड़ेगा। यह पहली इलेक्ट्रिक मशीन होगी। रोहित शर्मा के पिता प्रदीप शर्मा अपने बेटे के इस उपलब्धि पर काफी खुश हैं। उनका कहना है कि अमेरिका की कंपनी में उनका बेटा काम कर रहा है। रोहित शर्मा की जेसीबी की उपलब्धि के कारण अमेरिका से नौकरी का ऑफर आया है।
नहीं होगा कार्बन उत्सर्जन
इस मशीन की एक और खासियत है कि यह जीरो प्रतिशत कार्बन उत्सर्जित करेगी। उन्होंने बताया कि 10 मेगावाट बिजली क्षमता की बैट्री से यह जेसीबी दौड़ेगा। यह पहली इलेक्ट्रिक मशीन होगी। रोहित शर्मा के पिता प्रदीप शर्मा अपने बेटे के इस उपलब्धि पर काफी खुश हैं। उनका कहना है कि अमेरिका की कंपनी में उनका बेटा काम कर रहा है। रोहित शर्मा की जेसीबी की उपलब्धि के कारण अमेरिका से नौकरी का ऑफर आया है।