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Punjab: तालिबान ने 60 सिखों को अफगानिस्तान छोड़ने से रोका, SGPC ने केंद्र से की हस्तक्षेप की अपील

Thu, 15 Sep 2022 08:23 PM IST
ajay kumar पीटीआई, चंडीगढ़
पीटीआई, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 15 Sep 2022 08:23 PM IST
सार

एसजीपीसी प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने और सिखों की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ अफगानिस्तान में तालिबान शासन द्वारा की जा रही कार्रवाई को रोकने की भी अपील की।

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Taliban prevents 60 Sikhs from leaving Afghanistan SGPC asks Centre to intervene
एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी। - फोटो : फाइल

विस्तार

11 सितंबर को भारत आने वाले 60 अफगान सिखों को तालिबान शासन ने देश छोड़ने से रोक दिया क्योंकि वे अपने साथ पवित्र ग्रंथ ला रहे थे। घटना के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने गुरुवार को तालिबान के कदम की निंदा की और केंद्र से हस्तक्षेप करने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि अफगानिस्तान में समुदाय की भावनाओं को आहत या अनादर न हो। एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने तालिबान शासन द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को अफगानिस्तान से बाहर ले जाने पर प्रतिबंध की कड़ी निंदा की।

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उन्होंने कहा कि समिति को मिली जानकारी के अनुसार, 60 अफगानी सिखों का एक समूह 11 सितंबर को भारत आने वाला था लेकिन वे नहीं आ सके क्योंकि उन्हें श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को लाने से रोक दिया गया था।
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उन्होंने इसे तालिबान शासन द्वारा सिखों के धार्मिक मामलों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप करार दिया। एडवोकेट धामी ने कहा कि एक तरफ जहां अफगानिस्तान के अंदर सिखों और पवित्र गुरुद्वारा साहिब पर हमले हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें पवित्र ग्रंथ अपने साथ भारत लाने से रोका जा रहा है।

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एडवोकेट धामी ने कहा कि अफगानिस्तान में सिख देश छोड़ रहे थे क्योंकि वह सुरक्षित नहीं हैं और जब सिख देश में नहीं रहेंगे तो श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की देखभाल कौन करेगा?"इसीलिए सिख भारत आने पर पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को अपने साथ ला रहे थे।

धामी ने कहा कि तालिबान शासन को सिखों की भावनाओं के खिलाफ फैसला नहीं लेना चाहिए। एसजीपीसी प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने और सिखों की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ अफगानिस्तान में तालिबान शासन द्वारा की जा रही कार्रवाई को रोकने की भी अपील की।

अफगानिस्तान में तालिबान शासन के बाद से सिखों समेत तमाम धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बार-बार लक्षित हमले हो रहे हैं। हाल ही में अफगानिस्तान में सिखों पर हमलों की बाढ़ सी आ गई थी। इस साल 18 जून को इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत ने काबुल में करते परवान गुरुद्वारा साहिब पर हमला किया था। इसमें लगभग 50 लोगों की जान चली गई। 

मार्च 2020 में काबुल के शॉर्ट बाजार इलाके में श्री गुरु हर राय साहिब गुरुद्वारा में एक घातक हमला हुआ था। इस हमले में 27 सिख मारे गए थे और कई घायल हो गए थे। इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। 2020 में अफगानिस्तान में लगभग 700 हिंदू और सिख थे लेकिन उनमें से बड़ी संख्या में 15 अगस्त 2021 को तालिबान के अधिग्रहण के बाद देश छोड़ दिया था।  

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