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कला महोत्सव में बड़े घर की बेटी और पूस की रात की कहानियां सुनाईं
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चंडीगढ़। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा आयोजित ऑनलाइन कला महोत्सव ‘नई उम्मीद, नई पहल’ ने शनिवार को दूसरे सप्ताह के छठवें दिन में प्रवेश किया। चंडीगढ़ की रंगमंच कलाकार रजनी बजाज ने मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित दो कहानियां ‘बडे़ घर की बेटी’ और ‘पूस की रात’ सुनाईं।
बड़े घर की बेटी में दिखाया गया कि अमीर परिवार की एक लड़की शादी के बाद एक गरीब परिवार में कैसे बस जाती है। कैसे वह परिदृश्य में फिट बैठती है और अपने परिवार को हर चीज से ऊपर रखती है। ‘पूस की रात’ कहानी एक किसान के बारे में है जो ठंडी रातों के लिए कंबल नहीं खरीद सकता था। कर्ज से परेशान, अपनी पूरी उपज को ब्याज के रूप में देखते हुए, वह आखिरकार एक मजदूर बनने का फैसला करता है।
इस अवसर पर दामोदर फोक थिएटर बडगाम के कलाकारों ने अफगान शासकों के हाथों कश्मीरियों के दमन को दर्शाने वाली कहानी डैज पाथेर को प्रस्तुत किया। इसमें दिखाया गया कि अफगानिस्तान के शासक ने कश्मीर पर शासन किया और लोगों के साथ कैसा बुरा व्यवहार किया। एक दिन जैसे ही यह पता चला कि शराबी शासक टहलने के लिए निकला तो स्थानीय लोगों ने उसकी मल्लिका का अपहरण कर लिया। उन्होंने उसे एक शर्त पर रिहा कर दिया कि राजा फिर से लोगों के साथ गलत व्यवहार नहीं करेगा और कश्मीरी भाषा बोलेगा। नाटक में कश्मीरियों के लिए उनकी भूमि और भाषा के प्रति प्रेम को दिखाया गया है।
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पंजाब की लोककथाएं सुनाईं
भजन सिंह एंड ग्रुप ने लोक ढाडी कला प्रस्तुत की। उन्होंने पंजाब के लोकगीत गाए। उन्होंने पंजाब की लोककथाएं भी सुनाईं। उन्होंने सारंगी की धुनों पर लोक गीत गाए। बता दें पांच सप्ताह का कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों जैसे पेंटिंग, लोक संगीत, नृत्य, रंगमंच, साहित्य और शास्त्रीय संगीत के कलाकारों को ऑनलाइन मंच प्रदान कर रहा है।
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बड़े घर की बेटी में दिखाया गया कि अमीर परिवार की एक लड़की शादी के बाद एक गरीब परिवार में कैसे बस जाती है। कैसे वह परिदृश्य में फिट बैठती है और अपने परिवार को हर चीज से ऊपर रखती है। ‘पूस की रात’ कहानी एक किसान के बारे में है जो ठंडी रातों के लिए कंबल नहीं खरीद सकता था। कर्ज से परेशान, अपनी पूरी उपज को ब्याज के रूप में देखते हुए, वह आखिरकार एक मजदूर बनने का फैसला करता है।
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इस अवसर पर दामोदर फोक थिएटर बडगाम के कलाकारों ने अफगान शासकों के हाथों कश्मीरियों के दमन को दर्शाने वाली कहानी डैज पाथेर को प्रस्तुत किया। इसमें दिखाया गया कि अफगानिस्तान के शासक ने कश्मीर पर शासन किया और लोगों के साथ कैसा बुरा व्यवहार किया। एक दिन जैसे ही यह पता चला कि शराबी शासक टहलने के लिए निकला तो स्थानीय लोगों ने उसकी मल्लिका का अपहरण कर लिया। उन्होंने उसे एक शर्त पर रिहा कर दिया कि राजा फिर से लोगों के साथ गलत व्यवहार नहीं करेगा और कश्मीरी भाषा बोलेगा। नाटक में कश्मीरियों के लिए उनकी भूमि और भाषा के प्रति प्रेम को दिखाया गया है।
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पंजाब की लोककथाएं सुनाईं
भजन सिंह एंड ग्रुप ने लोक ढाडी कला प्रस्तुत की। उन्होंने पंजाब के लोकगीत गाए। उन्होंने पंजाब की लोककथाएं भी सुनाईं। उन्होंने सारंगी की धुनों पर लोक गीत गाए। बता दें पांच सप्ताह का कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों जैसे पेंटिंग, लोक संगीत, नृत्य, रंगमंच, साहित्य और शास्त्रीय संगीत के कलाकारों को ऑनलाइन मंच प्रदान कर रहा है।