फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Takht Jathedar Giani Gurmukh Singh on Dera sacha sauda

‘डेरा मुखी को माफी देने के लिए बादल पिता-पुत्र ने डाला था दबाव’

Thu, 20 Apr 2017 09:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा(पंजाब)
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा(पंजाब) Updated Thu, 20 Apr 2017 09:35 AM IST
विज्ञापन
Takht Jathedar Giani Gurmukh Singh on Dera sacha sauda
CM Parkash singh badal & Sukhbir singh badal - फोटो : File Photo
तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार और अकाल तख्त के हेड ग्रंथी भाई गुरमख सिंह ने आरोप लगाया है कि डेरा मुखी के माफी वाले पत्र संबंधी पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने उन पर दबाव बनाया था। इस मामले में दोनों बादल पिता-पुत्र पूरी तरह से जिम्मेवार हैं। इस घटना पर जत्थेदार की ओर से किए गए खुलासे सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। इनमें लिखा गया है कि उन्होंने उक्त खुलासे अमृतसर में अपनी रिहाइश पर किए हैं। 
विज्ञापन


जत्थेदार ने कहा कि डेरा मुखी को माफ करने के लिए पूरा ड्रामा तो पहले ही रचा जा चुका था और जत्थेदारों को बादल पिता-पुत्र ने चंडीगढ़ में बुलाकर माफी की प्रक्रिया को पूरी करने के लिए सरकारी हुक्म सुनाया था। हालांकि उन्होंने उक्त आदेश को मानने से इंकार कर दिया था । 
विज्ञापन


सोशल मीडिया पर वायरल खुलासे में जत्थेदार गुरमख सिंह ने बताया कि 15 सितंबर 2015 को जब वे तख्त श्री दमदमा साहिब में थे तो उनको अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह का फोन आया कि सुबह बादल साहिब ने हम सभी जत्थेदारों को याद किया है और हमें चंडीगढ़ जाना है। 16 सितंबर 2015 को उनके समेत जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह अकाल तख्त, तख्त श्री केसगढ़ के जत्थेदार ज्ञानी मल सिंह मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की सरकारी रिहाइश पर पहुंच गए। वहां पर शिअद के अध्यक्ष व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और कैबिनेट मंत्री दलजीत सिंह चीमा मौजूद थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन

तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ने लगाया आरोप

Takht Jathedar Giani Gurmukh Singh on Dera sacha sauda
Giani Gurmukh Singh - फोटो : File Photo
वहां पर सुखबीर बादल ने अपने पिता प्रकाश सिंह बादल के कहने पर उनकी ओर एक पत्र बढ़ाते हुए कहा कि इस पर तुरंत कार्रवाई कर यह मामला रफा दफा कीजिए। उन्होंने बताया कि उक्त पत्र में हिंदी भाषा में लिखा था और वह डेरा सिरसा मुखी का था। उसको देखते ही हम तीनों जत्थेदार महसूस करने लगे कि उनके पास से उक्त मामला बड़ी तेजी के साथ हल करवाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय पर जल्दबाजी करने के बजाय सिख कौम से राय मांगी जाए। 

लेकिन सुखबीर बादल ने उनको हुक्म करते हुए कहा कि इस मामले पर जरा भी देरी न की जाए और तुम जल्दी से फैसला सुना दो, जिस पर तीनों जत्थेदारों ने कहा कि इस पत्र को पहले श्री अकाल तख्त साहिब पर पहुंचाएं उसके बाद ही विचार किया जा सकता है। जत्थेदार ने खुलासा किया कि जब वे चंडीगढ़ से वापस आए थे तो सुखबीर बादल ने फोन कर जत्थेदारों पर दबाव बनाया था कि वे जल्द से जल्द इस पर अपना फैसला सुनाएं। उन्होंने कहा कि जत्थेदारों ने दबाव में तो उक्त पत्र को मंजूर कर लिया था, लेकिन कोई फैसला नहीं सुनाया पर उसके अगले समाचार पत्रों में डेरा सिरसा को माफी देने संबंधी खबरें आई थीं जो कि सरकार ने खुद ही हथकंडा अपनाया था।

 जत्थेदार ने खुलासा किया कि पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान 1 फरवरी को डेरा सिरसा ने उक्त चुनाव में शिअद की सहायता करने का एलान किया। इसके बाद दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा का उनको फोन आया कि चुनाव का समय है और हमें डेरा सिरसा से समर्थन लेना पड़ रहा है और कहा कि अगर तुम अकाली दल का साथ नहीं दोगे तो जत्थेदारी से उतार दिए जाओगे।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed