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'जी आया साहब' ने कुछ यूं बयां किया बाल मजदूरों का दर्द
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 11 Apr 2016 11:55 AM IST
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पंजाब कला भवन में नाटक का मंचन
- फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब कला भवन में अलंकार थिएटर ग्रुप ने जी आया साहब नाटक का मंचन करके बाल मजदूरों का दर्द बयां किया। शहादत हसन मंटो लिखित नाटक का निर्देशन चक्रेश कुमार ने किया। नाटक में कलाकारों ने दर्शाया कि बाल मजदूरी देश की सबसे बड़ी समस्या है। एक इंस्पेक्टर के यहां 10 वर्ष का कासिम नाम का बच्चा काम करता है। कासिम से बहुत काम लिया जाता है। उसे घर वाले पढ़ने नहीं देते हैं।
एक दिन काम करने वक्त उसके हाथ में चाकू से चोट लग जाती है। इसके चलते उसे तीन दिन की छुट्टी मिल जाती है। छुट्टी के दौरान वह बहुत राहत महसूस करता है। इसके बाद वह नियमित अंतरल पर हाथ में चाकू मार लेता। इसके चलते उसे आराम मिल जाता। लेकिन जब वह हाथ ठीक होने पर वापस लौटतातो उससे इतना काम लेते कि वह तंग हो जाता है। एक दिन वह अपने हाथ को ब्लेड से काट लेता है। घाव इतना गहरा हो जाता है कि डाक्टर उसका हाथ काट देते हैं।
नाटक में 16 कलाकारों ने अभिनय किया है। नाटक में दर्शाया गया है कि आज भी देश में सबसे बड़ी समस्या बाल मजदूरी है। इससे बच्चे मुक्त नहीं हैं। कलाकारों ने नाटक के माध्यम से दर्शाया कि बाल मजदूरी को दूर करने के लिए योजनाएं भी कारगर साबित नहीं हो सकती हैं। गरीबी के कारण बाल मजदूरी का खात्मा अभी तक नहीं किया जा सका है। नाटक मे मंचन भूपराज, ज्योति, पवन, मीनू, दीपक सहित अन्य कलाकारों ने किया।
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एक दिन काम करने वक्त उसके हाथ में चाकू से चोट लग जाती है। इसके चलते उसे तीन दिन की छुट्टी मिल जाती है। छुट्टी के दौरान वह बहुत राहत महसूस करता है। इसके बाद वह नियमित अंतरल पर हाथ में चाकू मार लेता। इसके चलते उसे आराम मिल जाता। लेकिन जब वह हाथ ठीक होने पर वापस लौटतातो उससे इतना काम लेते कि वह तंग हो जाता है। एक दिन वह अपने हाथ को ब्लेड से काट लेता है। घाव इतना गहरा हो जाता है कि डाक्टर उसका हाथ काट देते हैं।
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नाटक में 16 कलाकारों ने अभिनय किया है। नाटक में दर्शाया गया है कि आज भी देश में सबसे बड़ी समस्या बाल मजदूरी है। इससे बच्चे मुक्त नहीं हैं। कलाकारों ने नाटक के माध्यम से दर्शाया कि बाल मजदूरी को दूर करने के लिए योजनाएं भी कारगर साबित नहीं हो सकती हैं। गरीबी के कारण बाल मजदूरी का खात्मा अभी तक नहीं किया जा सका है। नाटक मे मंचन भूपराज, ज्योति, पवन, मीनू, दीपक सहित अन्य कलाकारों ने किया।
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