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लालचीपन, लेखनी के व्यापारीकरण और अकेलेपन की कहानी ‘त्रियात्रा’
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 17 Nov 2016 12:23 AM IST
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अकेलेपन की कहानी ‘त्रियात्रा’
- फोटो : अमर उजाला
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टैगोर थिएटर में चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित विंटर थिएटर फेस्टिवल के पहले दिन ‘त्रियात्रा’ नाटक का मंचन हुआ। यह नाटक जयपुर की एनजीओ क्यूरियो के 12 कलाकरों ने पेश किया। नाटक का निर्देशन गगन मिश्रा और प्रियदर्शनी ने किया।
‘त्रियात्रा’ एक ऐसा नाटक है जोकि तीन देशों की तीन कहानियों की यात्रा करवाता है। नाटक में निर्देशक ने एक्सपेरिमेंट कर तीनों कहानियों को सेट के जरिए जोड़ने की कोशिश की। जब एक कहानी खत्म होती है तो दूसरी कहानी शुरू करने के लिए अलग से सेट एडजस्ट नहीं किया जाता, बल्कि एक कहानी के मध्य में ही दूसरे सेट को डिजाइन किया गया, इससे दर्शकों को तीन अलग कहानियों का आभास होने की बजाए एक ही कहानी लगती है।
पहली कहानी जहां दर्शकों को अमेरिका लेकर जाती है, वहीं दूसरी कहानी भारत दर्शन करवाती है, जबकि तीसरी कहानी दर्शकों को पहले विश्व युद्ध के समय रूस के लोगों में पैदा हुए हालात को दिखाती है। तीनों कहानियों के संदेश की बात करें तो पहली कहानी लोगों के लालच को दिखाती है, वहीं दूसरी कहानी उन लेखकों पर व्यंग्य कसती है जिनके लिए लेखनी अपने विचारों को व्यक्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक व्यापार का माध्यम है। वहीं तीसरी कहानी बदलते युग के साथ लोगों में बढ़ रहे अकेलेपन को प्रदर्शित करती है।
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संस्था के बारे में बात करते हुए प्रियदर्शनी ने बताया कि यह 2008 से काम कर रही है और इससे छोटे बच्चों के साथ-साथ हर उम्र के लोग जुड़े है जिन्हें थिएटर सिखाया जाता है। इसके अलावा यह एनजीओ दिल्ली, मुंबई, केरल और बंगलुरू समेत कई राज्यों में परफार्म कर चुकी है। नाटक के निर्देशक गगन मिश्रा ने थिएटर के साथ-साथ लाइटिंग की भी स्टडी की है। लाइटिंग पर बात करते हुए उन्होंनें बताया कि इसी साल उन्होंने फरवरी में एक लाइट, साइट एंड साउंड प्ले किया था, इसमें 750 लाइटों का इस्तेमाल किया गया था। इसमें पूरा सेट राजस्थान के भीनमाल स्थित जैन मंदिर की तरह तैयार किया गया था। गगन मिश्रा लाइटिंग सीखने के लिए थाइलैंड भी जा चुके हैं।
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‘त्रियात्रा’ एक ऐसा नाटक है जोकि तीन देशों की तीन कहानियों की यात्रा करवाता है। नाटक में निर्देशक ने एक्सपेरिमेंट कर तीनों कहानियों को सेट के जरिए जोड़ने की कोशिश की। जब एक कहानी खत्म होती है तो दूसरी कहानी शुरू करने के लिए अलग से सेट एडजस्ट नहीं किया जाता, बल्कि एक कहानी के मध्य में ही दूसरे सेट को डिजाइन किया गया, इससे दर्शकों को तीन अलग कहानियों का आभास होने की बजाए एक ही कहानी लगती है।
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पहली कहानी जहां दर्शकों को अमेरिका लेकर जाती है, वहीं दूसरी कहानी भारत दर्शन करवाती है, जबकि तीसरी कहानी दर्शकों को पहले विश्व युद्ध के समय रूस के लोगों में पैदा हुए हालात को दिखाती है। तीनों कहानियों के संदेश की बात करें तो पहली कहानी लोगों के लालच को दिखाती है, वहीं दूसरी कहानी उन लेखकों पर व्यंग्य कसती है जिनके लिए लेखनी अपने विचारों को व्यक्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक व्यापार का माध्यम है। वहीं तीसरी कहानी बदलते युग के साथ लोगों में बढ़ रहे अकेलेपन को प्रदर्शित करती है।
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संस्था के बारे में बात करते हुए प्रियदर्शनी ने बताया कि यह 2008 से काम कर रही है और इससे छोटे बच्चों के साथ-साथ हर उम्र के लोग जुड़े है जिन्हें थिएटर सिखाया जाता है। इसके अलावा यह एनजीओ दिल्ली, मुंबई, केरल और बंगलुरू समेत कई राज्यों में परफार्म कर चुकी है। नाटक के निर्देशक गगन मिश्रा ने थिएटर के साथ-साथ लाइटिंग की भी स्टडी की है। लाइटिंग पर बात करते हुए उन्होंनें बताया कि इसी साल उन्होंने फरवरी में एक लाइट, साइट एंड साउंड प्ले किया था, इसमें 750 लाइटों का इस्तेमाल किया गया था। इसमें पूरा सेट राजस्थान के भीनमाल स्थित जैन मंदिर की तरह तैयार किया गया था। गगन मिश्रा लाइटिंग सीखने के लिए थाइलैंड भी जा चुके हैं।