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ढोंगी बाबाओं से बचकर रहना रे बाबा! नहीं तो होगा ये हाल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 27 Feb 2017 09:25 AM IST
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टैगोर थिएटर में जब जागो तभी सवेरा नाटक का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
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सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में ‘जब जागो तभी सवेरा’ नाटक का मंचन किया गया। थिएटर आर्ट चंडीगढ़ ग्रुप ने नाटक का मंचन किया, जबकि लेखन और निर्देशन राजीव मेहता ने किया।
नाटक में दिखाया गया कि चंडीगढ़ का बंटी नाम का एक चोर है। उसे संधू डीएसपी पकड़ने के लिए कोशिश करते हैं। उसे पकड़ने के लिए कई जगह छापेमारी की जाती है। वह शहर के थिएटर में मेकअप रूम में छिप जाता है। वहां पर जात न पूछों साधू की नाटक का मंचन चल रहा होता है। इस दौरान वह मेकअप रूम में साधू का वेश धारण कर लेता है।डीएसपी संधू वेशधारी बाबा बने बंटी चोर के सामने आते हैं। वह बाबा के पैरों में गिरकर कहते हैं कि उन्हें बंटी नाम के चोर ने परेशान कर रखा है। वह पकड़ में नहीं आ रहा है। उनकी नौकरी जा सकती है। इस पर बाबा ने कहा कि बंटी चोर यहीं कहीं थिएटर में छिपा हो सकता है।
इस दौरान पुलिस ने नाकेबंदी की फिर भी वह बचकर भाग जाता है। इसकेे बाद बंटी चोर बाबा बनकर लोगों को लूटने का प्रयास करता है। वह कई जगह लूटपाट करता है। फिर भी पकड़ में नहीं आता है। इसी तरह बाबा के झांसे में बंटी का पुराना साथी चोर आ जाता है। वह बाबा से मदद मांगने जाता है तो बंटी उसे अपना रूप दिखाता है। इसके बाद बंटी को पुलिस गिरफ्तार कर लेती है। नाटक में कलाकारों ने दर्शाया कि आज के समय में लोगों को ढोंगी बाबाओं से बचाना चाहिए। नाटक में 18 कलाकारों ने मंचन किया है।
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चंडीगढ़ प्रशासन, चंडीगढ़ कल्चरल अफेयर्स डिपार्टमेंट और टैगोर थिएटर सोसायटी की ओर से जसपाल भट्टी कामेडी संडे में इस नाटक का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से कलाकारों ने दर्शाया कि आज के समय में धनी और गरीब लोग थोड़ी सी परेशानी आने पर बाबाओं के अंधविश्वास में किस तरह पड़ जाते हैं। अंधविश्वास में आने के बाद ढोंगी बाबा लोगों के साथ लूटपाट करते हैं।
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नाटक में दिखाया गया कि चंडीगढ़ का बंटी नाम का एक चोर है। उसे संधू डीएसपी पकड़ने के लिए कोशिश करते हैं। उसे पकड़ने के लिए कई जगह छापेमारी की जाती है। वह शहर के थिएटर में मेकअप रूम में छिप जाता है। वहां पर जात न पूछों साधू की नाटक का मंचन चल रहा होता है। इस दौरान वह मेकअप रूम में साधू का वेश धारण कर लेता है।डीएसपी संधू वेशधारी बाबा बने बंटी चोर के सामने आते हैं। वह बाबा के पैरों में गिरकर कहते हैं कि उन्हें बंटी नाम के चोर ने परेशान कर रखा है। वह पकड़ में नहीं आ रहा है। उनकी नौकरी जा सकती है। इस पर बाबा ने कहा कि बंटी चोर यहीं कहीं थिएटर में छिपा हो सकता है।
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इस दौरान पुलिस ने नाकेबंदी की फिर भी वह बचकर भाग जाता है। इसकेे बाद बंटी चोर बाबा बनकर लोगों को लूटने का प्रयास करता है। वह कई जगह लूटपाट करता है। फिर भी पकड़ में नहीं आता है। इसी तरह बाबा के झांसे में बंटी का पुराना साथी चोर आ जाता है। वह बाबा से मदद मांगने जाता है तो बंटी उसे अपना रूप दिखाता है। इसके बाद बंटी को पुलिस गिरफ्तार कर लेती है। नाटक में कलाकारों ने दर्शाया कि आज के समय में लोगों को ढोंगी बाबाओं से बचाना चाहिए। नाटक में 18 कलाकारों ने मंचन किया है।
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चंडीगढ़ प्रशासन, चंडीगढ़ कल्चरल अफेयर्स डिपार्टमेंट और टैगोर थिएटर सोसायटी की ओर से जसपाल भट्टी कामेडी संडे में इस नाटक का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से कलाकारों ने दर्शाया कि आज के समय में धनी और गरीब लोग थोड़ी सी परेशानी आने पर बाबाओं के अंधविश्वास में किस तरह पड़ जाते हैं। अंधविश्वास में आने के बाद ढोंगी बाबा लोगों के साथ लूटपाट करते हैं।