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जब एक 'आम आदमी' को सत्ता सौंप दी जाती है तो क्या होता है, देखिए
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 07 Mar 2017 12:57 AM IST
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घमंड में ‘इना’ ने खोई कुर्सी और विश्वास
- फोटो : अमर उजाला
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टैगोर थिएटर में सोमवार से तीन दिवसीय रंग भोर-2017 थिएटर फेस्टिवल की शुरुआत हुई। इसका आयोजन चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी और अलंकार थिएटर ग्रुप कर रहे हैं। फे स्टिवल के पहले दिन ‘इना की अवाज’ नाटक का मंचन किया गया। इसका निर्देशन चक्रेश कुमार ने किया।
नाटक इना नाम के किरदार के इर्द गिर्द घूमता है। इसमें दिखाया गया कि एक आम आदमी को जब सत्ता सौंप दी जाती है तो उसका कैसे दिमाग खराब हो जाता है और वह बदल जाता है। नाटक में एक राजा का महल बना होता है। इसमें इना (मजदूर) का काम करता है। वह जमीन से जुड़ा व्यक्ति है और आम पब्लिक में उसकी खासी पकड़ हैं। यह बात जब राजा को पता चलती है तो वह उसे अपने राज्य का वजीर-ए-आजम नियुक्त कर देता है।
इसके बाद इना पर कुर्सी का रंग चढ़ने लग जाता है और स्वार्थी होता है। आम पब्लिक से दूर होता जाता है। यह बात जब राजा को पता चलती है तो वह एक्शन लेता है। इना को वजीर-ए-आजम के पद से निकाल देता है। इसके बाद इना फिर से वापस अपनी दुनिया और आम लोगों के बीच पहुंचाता है तो लोग उसे अपनाने से मना कर देते हैं। इस तरह वह किसी जगह का नहीं रहता है। नाटक में इना का रोल गुरबख्श, बदशाह का रोल दीक्षित नरूला, मलिका का रोल शमशीर, नर्तकी का रोल प्रोमिला थापा, सिपाही का रोल निर्मल और प्रशांत मेहरा ने निभाया।
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नाटक इना नाम के किरदार के इर्द गिर्द घूमता है। इसमें दिखाया गया कि एक आम आदमी को जब सत्ता सौंप दी जाती है तो उसका कैसे दिमाग खराब हो जाता है और वह बदल जाता है। नाटक में एक राजा का महल बना होता है। इसमें इना (मजदूर) का काम करता है। वह जमीन से जुड़ा व्यक्ति है और आम पब्लिक में उसकी खासी पकड़ हैं। यह बात जब राजा को पता चलती है तो वह उसे अपने राज्य का वजीर-ए-आजम नियुक्त कर देता है।
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इसके बाद इना पर कुर्सी का रंग चढ़ने लग जाता है और स्वार्थी होता है। आम पब्लिक से दूर होता जाता है। यह बात जब राजा को पता चलती है तो वह एक्शन लेता है। इना को वजीर-ए-आजम के पद से निकाल देता है। इसके बाद इना फिर से वापस अपनी दुनिया और आम लोगों के बीच पहुंचाता है तो लोग उसे अपनाने से मना कर देते हैं। इस तरह वह किसी जगह का नहीं रहता है। नाटक में इना का रोल गुरबख्श, बदशाह का रोल दीक्षित नरूला, मलिका का रोल शमशीर, नर्तकी का रोल प्रोमिला थापा, सिपाही का रोल निर्मल और प्रशांत मेहरा ने निभाया।
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