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पीयू में सिंडिकेट नौ दिन की मेहमान, 31 दिसंबर को खत्म हो जाएगा कार्यकाल
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में सिंडिकेट 9 दिन की मेहमान है। इसका कार्यकाल 31 दिसंबर को खत्म हो जाएगा। सीनेट का कार्यकाल पहले ही पूरा हो चुका है। यूनिवर्सिटी के इतिहास में यह पहला मौका है जब एक भी सदन कार्यरत नहीं रहेगा। इन सदनों के अधिकारों का प्रयोग वाइस चांसलर करेंगे। सीनेट व सिंडिकेट के चुनाव होंगे या नहीं इस पर अभी संशय बना हुआ है। वहीं दूसरी ओर यह प्रकरण हाईकोर्ट में पहुंचा है। उम्मीद की जा रही है कि इसी माह में इस पर कोई निर्णय आ सकता है।
सिंडिकेट एक साल के लिए बनती है। इसमें 15 सदस्य होते हैं। वाइस चांसलर अध्यक्ष व रजिस्ट्रार इसके सचिव होते हैं। यह सदन पीयू के संचालन के लिए हर निर्णय लेता है। डीन का चुनाव भी इसी के जरिए होता है। विभागों में शिक्षकों के प्रमोशन को मान्यता देनी हो या फिर कोई जांच कमेटी बनानी हो, हर प्रकरण सिंडिकेट से होकर गुजरता है। सिंडिकेट में दो गुट हावी है। एक कांग्रेस तो दूसरा भाजपा गुट। इसमें कांग्रेसी सदस्यों का बहुमत है। ऐसे में फैसले अधिकांश वही होते हैं जो बहुमत तय करता है। कोरोना के कारण इस बार सिंडिकेट की बैठक बहुत कम हुई हैं। दो बैठकें ऑनलाइन बुलाई गईं, लेकिन उन बैठकों का विरोध एक पक्ष ने किया है। वह चाहते हैं कि शारीरिक रूप से उपस्थिति के जरिए ही बैठक की जाए। इस मांग के बाद अभी तक कोई बैठक नहीं हुई है। सिंडिकेट का कार्यकाल 31 दिसंबर तक है। इसमें महज नौ दिन बचे हुए हैं।
तय नहीं हो पा रहा सदन रहेंगे या बोर्ड बनेगा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मुताबिक हर विश्वविद्यालय में बोर्ड ऑफ गवर्नेंस बनाने की बात कही गई है। इसके मुताबिक पीयू में बोर्ड बनना चाहिए, लेकिन अब तक कोई बड़े संकेत नहीं मिले हैं। सीनेट व सिंडिकेट रहेंगी या नहीं, इस पर भी कोई निर्णय नहीं हो पा रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि बोर्ड नहीं बनता है तो फिर सीनेट का रिफॉर्म होगा। ऐसे में सदस्यों की संख्या कम हो सकती है। साथ ही स्नातक वर्ग की सीटें भी कम की जा सकती हैं।
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बैठक के जरिए ही होती है सिंडिकेट की विदाई
हर बार सीनेट ही सिंडिकेट के सदस्यों का चयन करती है लेकिन इस बार सीनेट ही नहीं तो सिंडिकेट का चुनाव नहीं हो पाएगा। सिंडिकेट की आखिरी बैठक 31 दिसंबर को होती है। इसमें महत्वपूर्ण निर्णय भी होते हैं और सदस्यों की विदाई भी एक तरह से होती है। सूत्रों का कहना है कि इस बार बैठक शायद ही हो। सदस्यों की विदाई ऐसे ही हो जाएगी, क्योंकि सीनेट का कार्यकाल खत्म हो गया और बैठक नहीं की गई। ऐसे में सिंडिकेट की भी बैठक नहीं होगी।
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सिंडिकेट एक साल के लिए बनती है। इसमें 15 सदस्य होते हैं। वाइस चांसलर अध्यक्ष व रजिस्ट्रार इसके सचिव होते हैं। यह सदन पीयू के संचालन के लिए हर निर्णय लेता है। डीन का चुनाव भी इसी के जरिए होता है। विभागों में शिक्षकों के प्रमोशन को मान्यता देनी हो या फिर कोई जांच कमेटी बनानी हो, हर प्रकरण सिंडिकेट से होकर गुजरता है। सिंडिकेट में दो गुट हावी है। एक कांग्रेस तो दूसरा भाजपा गुट। इसमें कांग्रेसी सदस्यों का बहुमत है। ऐसे में फैसले अधिकांश वही होते हैं जो बहुमत तय करता है। कोरोना के कारण इस बार सिंडिकेट की बैठक बहुत कम हुई हैं। दो बैठकें ऑनलाइन बुलाई गईं, लेकिन उन बैठकों का विरोध एक पक्ष ने किया है। वह चाहते हैं कि शारीरिक रूप से उपस्थिति के जरिए ही बैठक की जाए। इस मांग के बाद अभी तक कोई बैठक नहीं हुई है। सिंडिकेट का कार्यकाल 31 दिसंबर तक है। इसमें महज नौ दिन बचे हुए हैं।
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तय नहीं हो पा रहा सदन रहेंगे या बोर्ड बनेगा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मुताबिक हर विश्वविद्यालय में बोर्ड ऑफ गवर्नेंस बनाने की बात कही गई है। इसके मुताबिक पीयू में बोर्ड बनना चाहिए, लेकिन अब तक कोई बड़े संकेत नहीं मिले हैं। सीनेट व सिंडिकेट रहेंगी या नहीं, इस पर भी कोई निर्णय नहीं हो पा रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि बोर्ड नहीं बनता है तो फिर सीनेट का रिफॉर्म होगा। ऐसे में सदस्यों की संख्या कम हो सकती है। साथ ही स्नातक वर्ग की सीटें भी कम की जा सकती हैं।
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बैठक के जरिए ही होती है सिंडिकेट की विदाई
हर बार सीनेट ही सिंडिकेट के सदस्यों का चयन करती है लेकिन इस बार सीनेट ही नहीं तो सिंडिकेट का चुनाव नहीं हो पाएगा। सिंडिकेट की आखिरी बैठक 31 दिसंबर को होती है। इसमें महत्वपूर्ण निर्णय भी होते हैं और सदस्यों की विदाई भी एक तरह से होती है। सूत्रों का कहना है कि इस बार बैठक शायद ही हो। सदस्यों की विदाई ऐसे ही हो जाएगी, क्योंकि सीनेट का कार्यकाल खत्म हो गया और बैठक नहीं की गई। ऐसे में सिंडिकेट की भी बैठक नहीं होगी।