फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   syl, satlut yamuna link issue, meeting, chief minister khattar, punjab government, haryana

एसवाईएल पर पंजाब सरकार के रुख से भड़का हरियाणा

Sun, 13 Mar 2016 01:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 13 Mar 2016 01:10 PM IST
विज्ञापन
syl, satlut yamuna link issue, meeting, chief minister khattar, punjab government, haryana
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक - फोटो : अमर उजाला
एसवाईएल नहर पर पंजाब सरकार के रुख से हरियाणा भड़क उठा है। शनिवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक हुई। इसमें कांग्रेस की अनुपस्थिति में सभी दलों की इस बात पर सहमति बनी कि पंजाब सरकार को विधानसभा में बिल लाए जाने से रोका जाए।
विज्ञापन


इसके लिए पंजाब के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी से आग्रह किया जाएगा। प्रस्ताव पारित करने के बाद सभी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल सोलंकी को ज्ञापन देने के लिए राजभवन पहुंचा। सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव पर संसदीय मामलों के मंत्री राम बिलास शर्मा, कृषि मंत्री ओपी धनखड़, विपक्ष के नेता अभय चौटाला, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, इनेलो के अध्यक्ष अशोक अरोड़ा, हरियाणा जनहित कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप बिर्श्नोई, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष शरणजीत सिंह सोथा, निर्दलीय विधायक जय प्रकाश और बीएसपी विधायक टेक चंद शर्मा ने हस्ताक्षर किए।
विज्ञापन


राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को दिए ज्ञापन में लिखा गया है कि पंजाब क्षेत्र में एसवाईएल के निर्माण का मुद्दा चार दशकों से अधर में है।  एसवाईएल हरियाणा के किसानों की जीवन रेखा है। हरियाणा के किसान इस नहर के जरिए रावी-ब्यास के पानी से अपना वैध आवंटित हिस्सा लेने के लिए बरसों से इंतजार कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसके न बनने से राज्य में विकसित की गई तीन लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई क्षमता का प्रयोग नहीं हो पा रहा है। इससे प्रदेश को हर वर्ष करोड़ों रुपये की कृषि पैदावार का नुकसान हो रहा है। इसलिए इस नहर का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा होना न केवल हरियाणा बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के हित में है।

--------------------
‘हम खैरात नहीं हिस्सा मांग रहे हैं’
ज्ञापन में लिखा गया है कि हरियाणा खैरात नहीं मांग रहा है और न ही पंजाब के हिस्से का पानी। हरियाणा तो रावी-ब्यास नदियों के पानी का न्यायोचित हिस्सा लेने के लिए एक रास्ता चाहता है और वह रास्ता है एसवाईएल। पंजाब सरकार ने वर्ष 2004 में रावी-ब्यास नदी से संबंधित सभी अंतरराज्यीय समझौतों को रद्द कर दिया था। इस संबंध में प्रेजीडेंशियल रेफरेंस सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। कोर्ट ने इस मुद्दे पर बीती 29 फरवरी और 8 मार्च को सुनवाई की है। इससे विचलित होकर वर्तमान पंजाब सरकार ने एसवाईएल नहर के लिए अधिगृहित की गई भूमि किसानों को वापस देने का  बिल प्रस्तुत करने के बारे में कई वक्तव्य दिए हैं। इसलिए पंजाब सरकार को यह असंवैधानिक कार्य करने से रोका जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed