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SYL पर केजरी के समर्थन में आए 'आप' के पंजाब प्रभारी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 18 Mar 2016 03:49 PM IST
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संजय सिंह आप नेता
- फोटो : फाइल फोटो
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आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रभारी संजय सिंह ने राष्ट्रीय कन्वीनर अरविंद केजरीवाल की ओर से एसवाईएल पर लिए स्टैंड की जोरदार वकालत की है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने न्याय की बात की है। पंजाब के पास न तो पीने को साफ पानी है, न सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी। यहां तक कि भूजल स्तर भी तेजी से नीचे गिर रहा है। जो खुद पानी के संकट का शिकार हो, वह चाह कर भी दूसरों की मदद नहीं कर सकता।
प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए संजय सिंह ने कहा कि एसवाईएल पर केजरीवाल ने अपना स्टैंड साफ कर दिया है। अब कांग्रेस प्रधान सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इस मुद्दे पर स्टैंड साफ करें। उन्होंने सवाल किया कि एसवाईएल का मुद्दा चुनाव से पहले ही क्यों उठता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अगर केंद्र सरकार की नीयत साफ होती तो एक घंटे में पानी का विवाद निपटा देती।
राजस्व विभाग को निर्देश देकर किसानों की जमीन वापस करवा देती। नीयत साफ नहीं है, इसलिए विवाद को उलझाया जा रहा है। संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने खुद देखा है कि बठिंडा, फाजिल्का समेत कई जगह पानी दूषित हो चुका है। गांव के गांव कैंसर की चपेट में हैं। सिंचाई के लिहाज से सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है। ऐसे में केजरीवाल ने एसवाईएल का विरोध किया है तो कोई राजनीति नहीं है।
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उन्होंने कहा कि पार्टी राजनीति के लिए दोनों राज्यों को लड़ाने का काम नहीं कर रही है। एसवाईएल में सीएम प्रकाश सिंह बादल व मनोहर लाल खट्टर, पीएम मोदी और कैप्टन अमरिंदर सिंह नूरा कुश्ती खेल रहे हैं। खुद ही जमीन एक्वायर करने का नोटिफिकेशन जारी करते हैं। फिर खुद ही डी-नोटिफाई कर देते हैं। खुद ही एसवाईएल का नींव पत्थर रखते और खुद ही एक बूंद पानी न जाने देने के दावे करते हैं। यह ड्रामा है, जिसकी शुरूआत कांग्रेस ने की थी, अकाली दल ने उसे आगे बढ़ाया है। इस मौके पर सूबा कन्वीनर सुच्चा सिंह छोटेपुर, हिम्मत शेरगिल और यामिनी गोमर भी थे।
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प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए संजय सिंह ने कहा कि एसवाईएल पर केजरीवाल ने अपना स्टैंड साफ कर दिया है। अब कांग्रेस प्रधान सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इस मुद्दे पर स्टैंड साफ करें। उन्होंने सवाल किया कि एसवाईएल का मुद्दा चुनाव से पहले ही क्यों उठता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अगर केंद्र सरकार की नीयत साफ होती तो एक घंटे में पानी का विवाद निपटा देती।
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राजस्व विभाग को निर्देश देकर किसानों की जमीन वापस करवा देती। नीयत साफ नहीं है, इसलिए विवाद को उलझाया जा रहा है। संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने खुद देखा है कि बठिंडा, फाजिल्का समेत कई जगह पानी दूषित हो चुका है। गांव के गांव कैंसर की चपेट में हैं। सिंचाई के लिहाज से सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है। ऐसे में केजरीवाल ने एसवाईएल का विरोध किया है तो कोई राजनीति नहीं है।
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उन्होंने कहा कि पार्टी राजनीति के लिए दोनों राज्यों को लड़ाने का काम नहीं कर रही है। एसवाईएल में सीएम प्रकाश सिंह बादल व मनोहर लाल खट्टर, पीएम मोदी और कैप्टन अमरिंदर सिंह नूरा कुश्ती खेल रहे हैं। खुद ही जमीन एक्वायर करने का नोटिफिकेशन जारी करते हैं। फिर खुद ही डी-नोटिफाई कर देते हैं। खुद ही एसवाईएल का नींव पत्थर रखते और खुद ही एक बूंद पानी न जाने देने के दावे करते हैं। यह ड्रामा है, जिसकी शुरूआत कांग्रेस ने की थी, अकाली दल ने उसे आगे बढ़ाया है। इस मौके पर सूबा कन्वीनर सुच्चा सिंह छोटेपुर, हिम्मत शेरगिल और यामिनी गोमर भी थे।