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प्रशासक पाटिल की आत्मकथा का सनसनीखेज सच

Mon, 30 Jun 2014 04:49 PM IST
मयंक मिश्र/अमर उजाला, चंडीगढ़
मयंक मिश्र/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 30 Jun 2014 04:49 PM IST
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Suspensive Truth of Shivraj Patil Autobiography

यूटी के प्रशासक और पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटिल की आत्मकथा ‘ओडिसी ऑफ माई लाइफ’ बाजार में आ चुकी है। पाटिल ने अपनी इस जीवनी में यूटी के प्रशासक या पंजाब के राज्यपाल के तौर पर अपने अनुभव का उल्लेख नहीं किया है।

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इस किताब में कुल 22 चैप्टर हैं। पहला पाटिल के गांव से जुड़ा है और अंतिम है गृह मंत्री के रूप में कार्यकाल। राजनीतिक मिर्च मसाला खोजने वालों को यह किताब निराश करती है। किताब में न तो किसी नेता या व्यक्ति पर कोई तीखी टिप्पणी है और न ही कोई विवादित बात लिखी है।
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अगर आप पाटिल के अपने अनुभवों से कुछ सीखना चाहते हैं तो रूपा पब्लिकेशंस की इस किताब के 400 पेज आपको पढ़ने होंगे। किताब में पाटिल ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी से जुड़े अपने अनुभव लिखे हैं। लोकसभा स्पीकर के रूप में उनका कार्यकाल कैसा रहा, इसका भी उल्लेख है।

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चंडीगढ़ का उल्लेख बस प्रसंगवस

Suspensive Truth of Shivraj Patil Autobiography

किताब में चंडीगढ़ का उल्लेख दो जगह पर है, वह भी बस प्रसंगवस। पहली बार पेज नंबर 20 पर जिक्र आता है कि पत्नी के निधन के बाद उनका बेटा और बहू अपने बच्चों के साथ दिल्ली शिफ्ट हो गए थे और जब वह पंजाब का राज्यपाल बनकर चंडीगढ़ आए तो वह यहां उनके साथ आ गए।

हालांकि अब वह अपने बच्चों की शिक्षा के कारण नोएडा में रहते हैं। किताब के पेज नंबर 81 पर शहरीकरण की दिक्कतों का उल्लेख करते हुए प्लांड सिटी के रूप में चंडीगढ़ और दिल्ली का उल्लेख किया गया है। चंडीगढ़ से जुड़ी दो तस्वीरों को भी किताब में शामिल किया गया है।

नहीं मिला मां का प्यार

शिवराज पाटिल जब पांच दिन के थे तब उनकी मां ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। पाटिल ने इस किताब में लिखा है कि उन्हें जन्म देने के बाद उनकी मां चल बसी थी और इसके बाद उनके नाना जी ने उनके गांव की एक महिला कुलसुंबी से संपर्क किया था।

जिस दिन पाटिल का जन्म हुआ था उसके एक दिन बाद कु लसुंबी ने भी बेटे को जन्म दिया था और उनका बेटा पांच दिन बाद मर गया था। वह अपने बेटे के लिए रो रही थीं। ऐसे में कुलसुंबी ने एक साल तक पाटिल का पालन-पोषण किया था। एक साल के बाद उनका पालन पोषण उनकी दादी ने किया था।

जब इंदिरा जी से कहा ‘सॉरी मैम’

Suspensive Truth of Shivraj Patil Autobiography

पाटिल ने किताब में लिखा है कि जन सभाओं में वह अंग्रेजी में भाषण देते थे। उनका भाषण हालाकि छोटा होता था। एक बार उन्होंने भाषण में अंग्रेजी के एक मुश्कि ल शब्द का इस्तेमाल किया।

जैसे ही वह भाषण खत्म करके सीट पर बैठे तब इंदिरा गांधी जी ने उनसे कहा कि वह मुश्किल शब्द की जगह आसान शब्द का इस्तेमाल कर सकते थे। इस पर पाटिल ने इंदिरा जी से ‘सॉरी मैम’ कह दिया और कहा कि आगे से वह इस बात का ध्यान रखेंगे।

मुख्यमंत्री बनने से कर दिया था मना

पाटिल ने लिखा है कि एआर आंतुले ने महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री के पद से त्याग पत्र दे दिया था। इसके बाद जब उनसे पूछा गया था कि क्या वह महाराष्ट्र जाने को इच्छुक हैं तो उन्होंने कह दिया था कि वह राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में रुचि रखते हैं।

बहू और पोती की है राजनीति में रुचि

किताब में पाटिल ने अपनी दो पोतियों के बारे में भी लिखा है। पाटिल ने लिखा है कि उनकी पोती रूद्राली कालेज छात्रा है और वह लॉ पढ़ना चाहती है। उसकी रुचि राजनीति में है। दूसरी पोती रुशिका ने अभी अपने भविष्य के बारे में तय नहीं किया है। बहू डॉ. अर्चना की रुचि भी राजनीति में है।

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