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Hindi News ›   Chandigarh ›   Surya Grahan 25 Oct 2022 Time Today: Chandigarh Mein Aaj Surya Grahan Ka Samay News in Hindi

Surya Grahan 2022: सूर्यग्रहण शुरू, कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर पर स्नान के लिए जुटे लाखों श्रद्धालु

Tue, 25 Oct 2022 04:37 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 25 Oct 2022 04:37 PM IST
सार

ग्रहण की अवधि चार घंटा तीन मिनट तक है। सूर्य ग्रहण भारतवर्ष के अलावा यूरोप, मध्य-पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, पश्चिम एशिया एवं उत्तरी हिंद महासागर में भी दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक 25 अक्तूबर को सूर्योदय से पूर्व रात्रि में दो बजकर 30 मिनट से आरंभ हो गया था।

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Surya Grahan 25 Oct 2022 Time Today: Chandigarh Mein Aaj Surya Grahan Ka Samay News in Hindi
कुरुक्षेत्र में स्नान करते श्रद्धालु। - फोटो : संवाद

विस्तार

भारत में सूर्यग्रहण शुरू हो गया है। सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है इसलिए 24 तारीख की रात में ही यह सूतक प्रारंभ हो गया। सूतक काल में भगवान की मूर्ति का दर्शन करना, स्पर्श करना वर्जित माना गया है। 

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सूर्य ग्रहण पूर्वी भारत के कुछ प्रदेशों को छोड़कर संपूर्ण देश में खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा। यह ग्रहण भारत में सर्वत्र रहेगा। सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि भारत में ग्रहण का मोक्ष (समाप्ति) होने से पहले ही सूर्यास्त हो जाएगा। सूर्यास्त शाम पांच बजकर 37 मिनट पर है। वहीं कुरुक्षेत्र में सूर्य ग्रहण शुरू होते ही लाखों श्रद्धालु ब्रह्मसरोवर में स्नान के लिए उतरे। सोमवार शाम से ही श्रद्धालुओं का कुरुक्षेत्र आना शुरू हो गया था।
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ग्रहण की अवधि चार घंटा तीन मिनट तक है। सूर्य ग्रहण भारतवर्ष के अलावा यूरोप, मध्य-पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, पश्चिम एशिया एवं उत्तरी हिंद महासागर में भी दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक 25 अक्तूबर को सूर्योदय से पूर्व रात्रि में दो बजकर 30 मिनट से आरंभ हो गया। वहीं भैया दूज का पर्व 26 अक्तूबर को है। सूर्य ग्रहण के बाद पहले दिन पड़ने वाला यह भैयादूज का संयोग 50 वर्षों के बाद आ रहा है। ऐसे संयोग के कारण भाई-बहन में प्रेम बढ़ेगा। 
 

ग्रहण काल में क्या करें और क्या न करें
ग्रहण के सूतक और ग्रहण काल में स्नान, दान, जप, पाठ, तीर्थ स्थान में स्नान और हवन करना कल्याणकारी होता है। जब ग्रहण आरंभ हो तो स्नान, जप और मध्यकाल में हवन, देव पूजा और समाप्त होने पर स्नान करना चाहिए। पका हुआ अन्न और कटी हुई सब्जी ग्रहण काल में दूषित हो जाता है, इसलिए इन्हें नहीं खाना चाहिए। ग्रहण काल में गर्भवती स्त्रियों को सोना, खाना-पीना निषेध है।



पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि भैयादूज कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया के दिन यमुना ने अपने भाई यमराज को घर में अपराह्न काल में भोजन कराया था इसलिए यह तिथि भ्रातृ द्वितीया या यम द्वितीया के रूप में मनाई जाती है। इस दिन अपराह्न में भाई दूज मनाने की परंपरा है। इस वर्ष 26 और 27 अक्तूबर को दो दिन द्वितीया विद्यमान है। 26 अक्तूबर को अपराह्न काल एक बजे से दोपहर बाद तीन बजकर 24 मिनट तक रहेगा इसलिए 26 अक्तूबर को ही भैयादूज का त्योहार मनाया जाएगा। 

ये है मुहूर्त
श्री देवालय पूजक परिषद के प्रधान और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि 26 अक्तूबर को 12 बजकर 45 मिनट पर द्वितीया समाप्त होती है इसलिए यह पर्व 26 अक्तूबर को ही मनाया जाएगा। पंजाब में सूर्योदय काल से ही इस पर्व को मनाने की परंपरा है इसलिए 10 बजकर 21 मिनट से लेकर 12 बजकर एक मिनट तक शुभ की चौघड़िया है इसलिए इसमें भी बहन अपने भाई को टीका कर भोजन करवा सकती है। 


 

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