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Chandigarh News: नौतोड़ भूमि का सर्वे इंटरनेट न हाेने के चलते रुका

Sun, 21 Jan 2024 03:07 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jan 2024 03:07 AM IST
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Survey of Nautor land halted due to lack of internet
-अवैध निर्माण के 53 मामलों में वन विभाग व पीडब्ल्यूडी की ओर से 107 नोटिस जारी
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-मालिकाना हक को लेकर दाखिल की गई है याचिका, 40 हजार किसान हैं प्रभावित

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पहाड़ी क्षेत्र मोरनी में 40 हजार किसानों के नौतोड़ जमीन के मालिकाना हक के मामले में पंचकूला के डीसी ने हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दायर कर बताया है कि मोबाइल नेटवर्क न होने और इंटरनेट सुविधा न होने के चलते सर्वे इंस्पेक्शन आदि को फिलहाल पूरा करना संभव नहीं है। अवैध निर्माण के 53 मामलों में वन विभाग ने नोटिस जारी किए हैं और पीडब्ल्यूडी की ओर से 107 नोटिस जारी किए गए हैं। हरियाणा किसान कांग्रेस के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष व शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल ने एडवोकेट दीपांशु बंसल के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए न्यायालय को बताया कि 2017 में किसानों को उनका हक दिलाने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट को बताया गया कि लंबे समय से इस भूमि का मालिकाना हक देने की 40 हजार के करीब स्थानीय किसान मांग कर रहे हैं। वन विभाग ने कोर्ट में 2018 में झूठा शपथ पत्र देकर बताया था कि नौतोड़ की समस्या के समाधान के लिए वन विभाग ने रि आईएफएस ऑफिसर एमपी शर्मा को दो वर्ष के लिए फारेस्ट सेटलमेंट अफसर नियुक्त कर दफ्तर समेत आवश्यक सुविधाएं मुहैया करवा दी हैं और उन्होंने काम भी शुरू कर दिया है। कोर्ट को बताया गया कि 59998 एकड़ भूमि अधिग्रहण का फैसला लिया गया था जिसके बाद कुल 50807 एकड़ भूमि का वनक्षेत्र के लिए मुआवजा देकर अधिग्रहण किया गया। इसके बाद भूमि के मालिकाना हक पर विवाद हुआ था। इस विवाद के निपटारे के लिए बीते कुछ समय में प्रयास शुरू हुए। हाईकोर्ट ने इस मामले में तय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कानून के अनुरूप उठाए कदमों का ब्योरा तलब किया था।


डीसी की ओर से रिपोर्ट पेश करते हुए बताया गया कि मोरनी पहाड़ी क्षेत्र में स्थित 14 भोज और 172 बास की मसावियों का डिजिटाइजेशन और जियो रेफरेंसिंग का कार्य किया जा रहा है जिसको लेकर 160 बास का कार्य फील्ड स्टाफ द्वारा सर्वे ऑफ इंडिया के साथ पूरा किया गया है लेकिन धरातल पर यह पाया गया है कि ओवरलैपिंग है। इसके साथ ही स्टेटस रिपोर्ट में मोबाइल नेटवर्क न होने और इंटरनेट सुविधा न होने का भी हवाला दिया गया है। इसके साथ ही बताया है कि इंटरनेट सुविधा न होने के चलते सर्वे इंस्पेक्शन आदि किया जाना असंभव है। हाईकोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट को रिकार्ड पर लेने के बाद मामले की सुनवाई दो मई तक स्थगित कर दी है। साथ ही इस मामले में अब अगली सुनवाई तक मोरनी की नौतोड़ भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक जारी रखी है।
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