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गुड न्यूज, 25 हजार वेंडर्स को जल्द मिलेगा लाइसेंस, सर्वे 15 से
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 13 Jun 2016 01:27 AM IST
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चंडीगढ़ में स्ट्रीट बाजार
- फोटो : amar ujala
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स्ट्रीट वेंडर एक्ट के तहत 15 जून से शहर में रेहड़ी- फड़ी और सरकारी जमीन पर दुकानें लगाने वालों का सर्वे शुरू हो रहा है। इस सर्वे के चार माह बाद लाइसेंस जारी किए जाएंगे। इस एक्ट के तहत 25 हजार स्ट्रीट वेंडर्स को लाइसेंस दिए जाएंगे।
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लेकिन यह जरूरी नहीं है कि जिस बाजार में कोई स्ट्रीट वेंडर काम कर रहा है, उसे सर्वे के बाद उसी सेक्टर एवं उसी स्थान पर ही दुकान लगाने की मंजूरी दी जाए। ऐसे फड़ी वाले को दूसरे बाजार में भी शिफ्ट किया जा सकता है। हर सेक्टर की जनसंख्या के दो प्रतिशत के हिसाब से स्ट्रीट वेंडर बैठाए जाएंगे। सर्वे के बाद अलग से वेडिंग जोन भी बनाए जाएंगे। यह जोन टाउन वेडिंग कमेटी तय करेगी। नगर निगम की ओर से वेडिंग कमेटी के सदस्यों को चुन लिया गया है।
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फड़ी वाले पहचान पत्र साथ रखें
नगर निगम कमिश्नर की ओर से पब्लिक नोटिस जारी कर कहा गया है कि जल्द ही सर्वे शुरू हो जाएगा। ऐसे में फड़ी वाले अपने पास एक पहचान पत्र जरूर रखे। पहचान पत्र न होने पर पिछले दिनों में अतिक्रमण हटाओ दस्ते ने किसी का चालान काटा है तो उसकी पर्ची साथ रखना जरूरी है। नगर निगम ने शहर में सर्वे करने का काम हरियाणा नव युवक कला संगम को दिया है। यह कंपनी हिमाचल में भी स्ट्रीट वेंडर्स का सर्वे कर चुकी है। नगर निगम के अनुसार कंपनी के लोग फड़ी वालों के पास जाकर उनकी तस्वीर खींचेंगे। कंपनी चार माह बाद नगर निगम को सारा डाटा सौंपेगी। एक फड़ी वाले का सर्वे करने के बदले में निगम की ओर कंपनी को 318 रुपये की राशि दी जा रही है।
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नए फड़ी वालों ने भी लगाई दुकान
एक माह से नगर निगम ने एक्ट को लागू करने के लिए सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले किसी व्यक्ति का चालान काटने पर पाबंदी लगा दी गई है। लेकिन अतिक्रमण हटाओ दस्ता पार्किंग और सड़क पर फड़ी लगाने की मंजूरी नहीं दे रहा है। लाइसेंस बनवाने की लालच में कई नई फड़ियां लगाई जा रही हैं। कई फड़ी वालों ने अपने रिश्तेदारों को भी अपने गांव से लाइसेंस बनवाने के लालच देकर बुला लिया है। जबकि नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि नई फड़ी वालों का लाइसेंस नहीं बनाया जाएगा।
व्यापारियों को परेशान करना बंद करे दस्ता
व्यापार मंडल के प्रधान चरणजीव सिंह का कहना है कि नगर निगम फड़ी वालों को भी सरकारी जमीन पर काम करने की मंजूरी दे रहा है। जबकि शोरूम और बूथों के व्यापारी लाखों का निवेश कर सरकार को टैक्स देते हैं मगर दुकान के प्रवेश द्वार पर सामान का डिस्प्ले करने पर उनके चालान काटे जा रहे हैं। व्यापारियों को परेशान करना बंद किया जाना चाहिए।