Loksabha Election: बठिंडा व पटियाला में बचे पार्टियों के गढ़... होशियारपुर-फिरोजपुर में इस बार टूटी परंपरा
हरियाणा से अलग होने के बाद होशियारपुर में जितने भी लोकसभा चुनाव हुए, उनमें भाजपा व कांग्रेस का दबदबा रहा है, लेकिन इस चुनाव में पहली बार आम आदमी पार्टी इस सीट पर जीत दर्ज करने सफल रही है।
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लोकसभा चुनाव में इस बार पंजाब की कई सीटों पर चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। कांग्रेस सात सीटों पर जीत दर्ज करके सबसे बड़ी पार्टी बनने में सफल जरूर रही है, लेकिन बाकी सीटों पर इस बार बदलाव देखने को मिला है।
होशियारपुर व फिरोजपुर सीट पर भी पिछले काफी सालों से चली आ रही परंपरा इस बार टूट गई। हरियाणा से अलग होने के बाद होशियारपुर में जितने भी लोकसभा चुनाव हुए, उनमें भाजपा व कांग्रेस का दबदबा रहा है, लेकिन इस चुनाव में पहली बार आम आदमी पार्टी इस सीट पर जीत दर्ज करने सफल रही है। आप के डॉ. राजकुमार चब्बेवाल ने 44,111 मतों के अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी यामिनी गोमर को मात दी है।
इसी तरह अगर फिरोजपुर सीट की बात की जाए तो यहां शिअद का ढाई दशक तक कब्जा रहा है, लेकिन इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने शिअद के गढ़ में सेंध लगा दी। कांग्रेस के शेर सिंह घुबाया ने 3,242 मतों के अंतर से आप के जगदीप सिंह काका बराड़ को मात दी है, जबकि शिअद के नरदेव सिंह बॉबी मान को 2,53,645 मत के साथ चौथे स्थान पर रहे। वहीं, बठिंडा व पटियाला में शिअद और कांग्रेस अपना-अपना गढ़ बचाने में कामयाब रहे।
होशियारपुर में पहली बार तीसरे विकल्प पर जनता की मोहर
होशियारपुर लोकसभा सीट का इतिहास रहा है कि कभी यहां भारतीय जनता पार्टी तो कभी कांग्रेस चुनाव जीतती रही है। ये पहला मौका है, जब होशियारपुर की जनता ने आप के प्रत्याशी को चुनकर संसद में भेजा है। पिछले दो चुनावों से लगातार यहां भाजपा का सांसद बनता रहा। वर्ष 2014 में विजय सांपला सांसद चुने गए थे, जबकि वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में यहां से सोमप्रकाश ने जीत दर्ज की थी, जो केंद्रीय मंत्री भी रहे।
इस बार भाजपा ने सोमप्रकाश की पत्नी अनिता सोमप्रकाश को चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन वह 1,99,994 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रही है। भाजपा के लिए होशियारपुर सीट इसलिए अहम मानी जाती है, क्योंकि ये हिंदू बहुल क्षेत्र है। ये पहला मौका है कि जब पार्टी ने पंजाब की सभी 13 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा। इससे पहले शिअद के साथ गठबंधन में भाजपा सिर्फ तीन सीटों पर ही चुनाव लड़ती रही है, उसमें गुरदासपुर, अमृतसर के अलावा होशियारपुर सीट भी शामिल है। यहां 1998 से लेकर 2009 तक चुनाव में एक बार कांग्रेस व एक बार भाजपा जीत दर्ज करती रही।
1998 में भाजपा के कमल चौधरी, 1999 में कांग्रेस के चरणजीत सिंह, 2004 में भाजपा के अविनाश राय खन्ना और 2009 में कांग्रेस से संतोष चौधरी यहां से सांसद बनी। इससे पहले बीच में बसपा के कांशी राम यहां से जीत दर्ज करने में सफल रहे, लेकिन उससे पहले भी 1984, 1989 व 1991 में कांग्रेस के कमल चौधरी यहां से सांसद चुनकर लोकसभा पहुंचे। आजादी के बार भी इस सीट पर कांग्रेस का सांसद बनता रहा है, लेकिन 1967 लोकसभा चुनाव में भारतीय जन संघ के जय सिंह ने इस सीट पर अपना परचम लहराया था।
फिरोजपुर में पिछली बार सुखबीर बादल बने थे सांसद
फिरोजपुर लोकसभा सीट के नतीजे इस बार अधिक चौंकाने वाले रहे, क्योंकि शिअद के गढ़ में इस बार कांग्रेस जीत दर्ज करने में सफल रही। पिछले 25 साल से लगातार यहां अकाली दल का सांसद रहा है। यहां तक वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में भी सुखबीर बादल ने 1,98,850 मतों के अंतर से बड़ी जीत दर्ज की थी। इससे पहले वर्ष 2009 व 2014 के चुनाव में शिअद से ही चुनाव लड़ते हुए शेर सिंह घुबाया यहां से सांसद चुने गए थे। इसी तरह 1998, 1999 व 2004 के चुनाव में जोरा सिंह मान ने लगातार यहां जीत दर्ज करते रहे।
इस तरह लगातार शिअद ने फिरोजपुर सीट अपना कब्जा बरकरार रखा। हालांकि 1980 से लेकर 1996 तक अकाली दल इस सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाया, लेकिन 1967 से लेकर 1977 तक के चुनावों में भी शिअद ने ही यहां से जीत दर्ज की। 1967 में सोहन सिंह व 1977 में मोहिंदर सिंह यहां से सांसद चुने गए थे। बठिंडा के बाद फिरोजपुर एक सीट है, जो शिअद का गढ़ मानी जाती है। बठिंडा में तो पार्टी इस बार भी अपना जीत जारी रख पाई है, लेकिन फिरोजपुर में पार्टी को अपनी सीट गंवानी पड़ी।
फिरोजपुर सीट पर सभी दलों का वोट शेयर
शेर सिंह घुबाया (कांग्रेस) 23.7
जगदीप सिंह काका बराड़ (आप) 23.41
गुरमीत सिंह सोढी (भाजपा) 22.67
नरदेव सिंह बॉबी मान (शिअद) 22.54
होशियारपुर सीट
डॉ. राजकुमार चब्बेवाल (आप) 32.04
यामिनी गोमर (कांग्रेस) 27.39
अनिता सोमप्रकाश (भाजपा) 21.09
सोहन सिंह ठंडल (शिअद) 9.68