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Punjab: बीएसएफ अधिकार क्षेत्र बढ़ोतरी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक-पंजाब पुलिस की शक्ति नहीं छीनी गई
Fri, 01 Dec 2023 01:26 PM IST
निवेदिता वर्मा
पीटीआई, चंडीगढ़
पीटीआई, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 01 Dec 2023 01:26 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और पंजाब सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील शादान फरासत को एक साथ बैठने और पीठ द्वारा तय किए जाने वाले मुद्दों पर संयुक्त रूप से निर्णय लेने के लिए कहा।
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बीएसएफ
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
विस्तार
पंजाब में बीएसएफ का दायरा 50 किलोमीटर तक बढ़ाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र के इस फैसले से पंजाब पुलिस की शक्ति नहीं छीनी गई है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने पंजाब सरकार के 2021 के मुकदमे की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और पंजाब सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील शादान फरासत को एक साथ बैठने और पीठ द्वारा तय किए जाने वाले मुद्दों पर संयुक्त रूप से निर्णय लेने के लिए कहा।
यह भी पढ़ें: पंजाब में गन्ने का रेट बढ़ा: 11 रुपये की बढ़ोतरी को सीएम मान ने बताया शुभ संकेत... किसान बोले-हमें मंजूर नहीं
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पीठ ने कहा कि पक्षकार मुद्दों का आदान-प्रदान करेंगे ताकि उन्हें सूचीबद्ध होने की अगली तारीख से पहले निपटाया जा सके। उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि पंजाब के महाधिवक्ता भी पक्षकारों की बैठक में हिस्सा ले सकते हैं।
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पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और पंजाब सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील शादान फरासत को एक साथ बैठने और पीठ द्वारा तय किए जाने वाले मुद्दों पर संयुक्त रूप से निर्णय लेने के लिए कहा।
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पीठ ने कहा कि पक्षकार मुद्दों का आदान-प्रदान करेंगे ताकि उन्हें सूचीबद्ध होने की अगली तारीख से पहले निपटाया जा सके। उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि पंजाब के महाधिवक्ता भी पक्षकारों की बैठक में हिस्सा ले सकते हैं।
सीजेआई ने कहा-जांच की शक्ति नहीं छीनी है
रिकॉर्ड देखने के बाद सीजेआई ने प्रथम दृष्टया पाया कि बीएसएफ और राज्य पुलिस द्वारा प्रयोग की जाने वाली समवर्ती शक्तियां थीं। सीजेआई ने मौखिक रूप से कहा कि जांच की शक्ति पंजाब पुलिस से नहीं छीनी गई है। संक्षिप्त सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सभी सीमावर्ती राज्यों में बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि गुजरात जैसे राज्यों में बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 80 किमी तक था और अब यह सभी सीमावर्ती राज्यों में एक समान 50 किमी है।
कानून अधिकारी ने कहा कि कुछ पासपोर्ट अपराधों पर बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र है और स्थानीय पुलिस के पास भी शक्ति होगी। फरासत ने कहा कि पंजाब एक छोटा राज्य है और केंद्र का फैसला पुलिस और अन्य एजेंसियों की शक्ति छीन लेता है।
वहीं सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि विवादित अधिसूचना में सभी संज्ञेय अपराध शामिल नहीं हैं। संज्ञेय अपराध वे गंभीर मामले हैं जिनमें कोई पुलिस अधिकारी बिना किसी वारंट के संदिग्ध को गिरफ्तार कर सकता है।
रिकॉर्ड देखने के बाद सीजेआई ने प्रथम दृष्टया पाया कि बीएसएफ और राज्य पुलिस द्वारा प्रयोग की जाने वाली समवर्ती शक्तियां थीं। सीजेआई ने मौखिक रूप से कहा कि जांच की शक्ति पंजाब पुलिस से नहीं छीनी गई है। संक्षिप्त सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सभी सीमावर्ती राज्यों में बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि गुजरात जैसे राज्यों में बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 80 किमी तक था और अब यह सभी सीमावर्ती राज्यों में एक समान 50 किमी है।
कानून अधिकारी ने कहा कि कुछ पासपोर्ट अपराधों पर बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र है और स्थानीय पुलिस के पास भी शक्ति होगी। फरासत ने कहा कि पंजाब एक छोटा राज्य है और केंद्र का फैसला पुलिस और अन्य एजेंसियों की शक्ति छीन लेता है।
वहीं सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि विवादित अधिसूचना में सभी संज्ञेय अपराध शामिल नहीं हैं। संज्ञेय अपराध वे गंभीर मामले हैं जिनमें कोई पुलिस अधिकारी बिना किसी वारंट के संदिग्ध को गिरफ्तार कर सकता है।
जनवरी 2021 में सुप्रीम कोर्ट गई थी पंजाब सरकार
जनवरी 2021 में पंजाब सरकार ने केंद्र के उस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें असम, पश्चिम बंगाल और पंजाब में अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर के बड़े दायरे में तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी के लिए बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया गया था।
राज्य सरकार ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र का विस्तार राज्य के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जुलाई, 2014 में संशोधन करते हुए एक अधिसूचना जारी की, जिसमें सीमा क्षेत्रों में काम करते समय बीएसएफ कर्मियों और अधिकारियों के लिए प्रावधान सक्षम किया गया।
पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में, बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 15 किमी से बढ़ाकर 50 किमी कर दिया गया था। वहीं गुजरात में, जो पाकिस्तान के साथ अपनी सीमा साझा करता है, सीमा 80 किमी से घटाकर 50 किमी कर दी गई थी, जबकि राजस्थान में इसे अपरिवर्तित रखा गया था।
जनवरी 2021 में पंजाब सरकार ने केंद्र के उस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें असम, पश्चिम बंगाल और पंजाब में अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर के बड़े दायरे में तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी के लिए बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया गया था।
राज्य सरकार ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र का विस्तार राज्य के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जुलाई, 2014 में संशोधन करते हुए एक अधिसूचना जारी की, जिसमें सीमा क्षेत्रों में काम करते समय बीएसएफ कर्मियों और अधिकारियों के लिए प्रावधान सक्षम किया गया।
पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में, बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 15 किमी से बढ़ाकर 50 किमी कर दिया गया था। वहीं गुजरात में, जो पाकिस्तान के साथ अपनी सीमा साझा करता है, सीमा 80 किमी से घटाकर 50 किमी कर दी गई थी, जबकि राजस्थान में इसे अपरिवर्तित रखा गया था।
बंगाल और पंजाब ने किया था विरोध
इस मुद्दे पर विवाद खड़ा हो गया था क्योंकि विपक्ष शासित पंजाब और पश्चिम बंगाल ने इस कदम की निंदा की थी और संबंधित राज्य विधानसभाओं ने केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया था। अपने मुकदमे में पंजाब सरकार ने कहा है कि 11 अक्तूबर की अधिसूचना के तहत राज्य से परामर्श किए बिना या कोई परामर्श प्रक्रिया किए बिना एकतरफा घोषणा संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है।
इस मुद्दे पर विवाद खड़ा हो गया था क्योंकि विपक्ष शासित पंजाब और पश्चिम बंगाल ने इस कदम की निंदा की थी और संबंधित राज्य विधानसभाओं ने केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया था। अपने मुकदमे में पंजाब सरकार ने कहा है कि 11 अक्तूबर की अधिसूचना के तहत राज्य से परामर्श किए बिना या कोई परामर्श प्रक्रिया किए बिना एकतरफा घोषणा संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है।