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नोटबंदी पर SC के पूर्व जज का बड़ा बयान, पीएम मोदी पर साधा निशाना

Thu, 17 Nov 2016 01:24 AM IST
सुमित सिंद श्योराण/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुमित सिंद श्योराण/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 17 Nov 2016 01:24 AM IST
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Supreme Court Former  judge Markandeya Katju big statement on Notbandi
मार्कंडेय काटजू - फोटो : File Photo
‘देश में काले धन पर रोक लगाने के नाम पर नोटबंदी करना सरकार का पूरी तरह  बेवकूफी भरा फैसला है। मुझे समझ नहीं आता ऐसा सुझाव किसने  दिया। आज 500 रुपये की कीमत 5 साल पहले 100 रुपये के बराबर है।’ 
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 यह बात कही सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जस्टिस मार्कं डेय काटजू ने। वह बुधवार को पंजाब यूनिवर्सिटी के लॉ ऑडिटोरियम में स्टूडेंट वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित ‘संवाद’ सेमिनार में मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचे। जस्टिस काटजू ने ‘भारत के मौजूदा हालात और लीगल सिस्टम ...थीम पर विचार रखे। हमेशा अपने बेबाक कमेंट्स से चर्चा में रहने वाले काटजू ने करीब डेढ़ घंटे तक पीयू स्टूडेंट्स के सवालों के जवाब दिए।
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उन्होंने नोटबंदी पर कहा कि ‘इस फैसले से सिर्फ आम जनता को ही परेशानी हो रही है, बड़े पैसे वालों ने तो पहले ही विदेशों में सेटिंग कर ली है। छोटे दुकानदार और कामकाजी लोगों के पास काला धन नहीं होता।’ लोगों की परेशानी का जिक्र करते हुए काटजू ने कहा कि  लोग अपने ही पैसे के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। लोग बिस्तर लगाकर रात भर बैंकों के बाहर इंतजार कर रहे हैं।
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जस्टिस काटजू ने कहा कि उन्हें देश के मौजूदा सिस्टम पर बिल्कुल भरोसा नहीं रहा। देश में धर्म और जाति के नाम पर खूब राजनीति हो रही है। यपी और बिहार को उन्होंने जातिवाद से ग्रस्त बताया। देश में तीन तलाक के सवाल पर कहा कि ‘यूनिफार्म सिविल कोड को बंद किया जाना चाहिए। तीन बार तलाक कहने भर से ऐसा नहीं हो सकता। यह एक गलत परंपरा है।’ 

जस्टिस(रि) मार्कंडेय काटजू पंजाब यूनिवर्सिटी में दिया भाषण

Supreme Court Former  judge Markandeya Katju big statement on Notbandi
मार्कंडेय काट्जू
भारत और पाकिस्तान के बंटवारे को काटजू ने ऐतिहासिक घोटाला बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने बिजनेस को बढ़ाने के भारत- पाकिस्तान का बंटवारा करवाया। अंग्रेजो के लिए इन दोनों देशों में हथियारों की बड़ी मार्केट का स्कोप था। उन्होंने  हथियारों की खरीद पर जरूरत से अधिक बजट को गलत बताया।  इस पैसे को लोगों की डेवलपमेंट पर खर्च करने की वकालत की। 

 काटजू ने देश में समलैंगिकता का समर्थन किया और धारा 377 हटाने की मांग की। कहा कि आने वाले 10-15 सालों में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश फिर से एक हो जाएंगे। उन्होंने आर्मी में भी जातिवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं। देश में लीगल एजुकेशन को बढ़ाने की काफी जरूरत है। वकालत के मौजूदा सिलेबस को लेकर उन्होंने कहा कि कोर्स में जो पढ़ाया जाता है वह व्यवहारिक ज्ञान से बिल्कुल अलग होता है। इस संबंध में काटजू ने बार काउंसिल को लिखा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में एक टीवी चैनल को आतंकी घटना का कवरेज दिखा जाने पर एक दिन के लिए बैन करने के फैसले को भी काटजू ने गलत बताया। उन्होंने कहा कि चैनल ने लाइव तस्वीरें दिखाई ही नहीं। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन रहे काटजू ने कहा कि मीडिया भी कई मामलों में भेदभाव करता है। उन्होंने कई मीडिया हाउस पर भी सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि देश में किसानों द्वारा आत्महत्या जैसे मामलों पर मीडिया गहराई से ध्यान नहीं देता। 
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