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मुश्किल में फंसे सुखपाल खैरा, राणा का आरोप- चुनाव में दिया झूठा हलफनामा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 14 Jul 2017 10:04 AM IST
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सुखपाल खैरा
- फोटो : file photo
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कांग्रेस नेता रंजीत सिंह राणा ने आम आदमी पार्टी के विधायक सुखपाल सिंह खैरा पर चुनाव के दौरान झूठा हलफनामा देेने का आरोप लगाया है। राणा ने कहा कि खैरा ने क्वालिफिकेशन को लेकर गलत जानकारी दी। उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। वह इस संबंध में एसएसपी और पंजाब चुनाव आयोग को भी शिकायत दे चुके हैं।
प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में राणा ने कहा कि 2007 के चुनाव में खैरा ने हलफनामा दिया कि उन्होंने बीए-2 पास की है। 2012 के चुनाव में कहा कि वह ग्रेजुएट हैं। फिर 2017 के चुनाव में कहा कि अभी अंडर ग्रेजुएट हैं। यह गलत बयानी गैर कानूनी है और जनता के साथ धोखा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि खैरा की सदस्यता रद्द की जाए और उन पर कार्रवाई की जाए। राणा इस विधानसभा चुनाव में भुलत्थ हलके से खैरा के खिलाफ लड़े थे।
उन्होंने बताया कि खैरा की क्वालिफिकेशन की जानकारी लेने के लिए उन्होंने डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ में आरटीआई अर्जी दी थी, लेकिन खैरा ने कॉलेज को लिख कर दिया कि यह उनकी निजी जानकारी है, इसे सांझा नहीं किया जाए, जिसके बाद कॉलेज ने जानकारी नहीं दी। उन्होंने प्रिंसिपल को अपील की है, इसके बाद सूचना आयोग की शरण लेंगे।
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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खैरा परिवार ने 1972 में अतिरिक्त जमीन जाली लोगों को कागजों पर बेच दीं। 1986 में फिर मुंह जबानी अपने नाम तबादला करवा लिया। इस 22 एकड़ जमीन की कीमत 6.6 करोड़ है।
नेता प्रतिपक्ष बनने से रोकने की चाल
सुखपाल खैरा ने कहा कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनने से रोकने को यह कांग्रेस की चाल है। रणजीत राणा को उनके खिलाफ चुनाव में सिर्फ 5900 वोट मिले थे। अगस्त-16 तक वह अकाली थे। जागीर कौर और राणा गुरजीत के फ्रंटमैन हैं, उनकी शह पर बोगस आरोप लगा रहे हैं। मेरी राणा गुरजीत को चुनौती है कि वह सीधा मुकाबला करें।
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प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में राणा ने कहा कि 2007 के चुनाव में खैरा ने हलफनामा दिया कि उन्होंने बीए-2 पास की है। 2012 के चुनाव में कहा कि वह ग्रेजुएट हैं। फिर 2017 के चुनाव में कहा कि अभी अंडर ग्रेजुएट हैं। यह गलत बयानी गैर कानूनी है और जनता के साथ धोखा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि खैरा की सदस्यता रद्द की जाए और उन पर कार्रवाई की जाए। राणा इस विधानसभा चुनाव में भुलत्थ हलके से खैरा के खिलाफ लड़े थे।
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उन्होंने बताया कि खैरा की क्वालिफिकेशन की जानकारी लेने के लिए उन्होंने डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ में आरटीआई अर्जी दी थी, लेकिन खैरा ने कॉलेज को लिख कर दिया कि यह उनकी निजी जानकारी है, इसे सांझा नहीं किया जाए, जिसके बाद कॉलेज ने जानकारी नहीं दी। उन्होंने प्रिंसिपल को अपील की है, इसके बाद सूचना आयोग की शरण लेंगे।
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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खैरा परिवार ने 1972 में अतिरिक्त जमीन जाली लोगों को कागजों पर बेच दीं। 1986 में फिर मुंह जबानी अपने नाम तबादला करवा लिया। इस 22 एकड़ जमीन की कीमत 6.6 करोड़ है।
नेता प्रतिपक्ष बनने से रोकने की चाल
सुखपाल खैरा ने कहा कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनने से रोकने को यह कांग्रेस की चाल है। रणजीत राणा को उनके खिलाफ चुनाव में सिर्फ 5900 वोट मिले थे। अगस्त-16 तक वह अकाली थे। जागीर कौर और राणा गुरजीत के फ्रंटमैन हैं, उनकी शह पर बोगस आरोप लगा रहे हैं। मेरी राणा गुरजीत को चुनौती है कि वह सीधा मुकाबला करें।