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सुखपाल खैरा और बैंस को विधानसभा में नो एंट्री, गेट पर ही दिया धरना
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 23 Jun 2017 09:22 AM IST
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सुखपाल खैरा और बैंस को विधानसभा में नो एंट्री
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आम आदमी पार्टी के विधायक सुखपाल खैरा और लोक इंसाफ पार्टी के विधायक सिमरजीत बैंस को विधानसभा के सुरक्षाकर्मियों ने परिसर में जाने से रोक दिया। दोनों ने इसका तीखा विरोध जताया और वहीं धरने पर बैठ गए। उधर, इसी घटना के चलते सदन में पूरे दिन हंगामा होता रहा।
बैंस को स्पीकर पर कागज फेंकने के लिए 15 जून को और खैरा को वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डालने के लिए 16 जून को सस्पेंड किया गया था। बुधवार को दोनों ने प्रेस गैलरी में प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया था कि स्पीकर राणा केपी सिंह का दामाद भी अवैध रेत खनन के कारोबार में लिप्त है।
वीरवार को दोनों को बाहरी चेक पोस्ट पर ही रोक दिया गया। वहां बहस के बाद वे अंदर पहुंचे तो विधानसभा के एंट्री गेट पर उन्हें रोक लिया गया। उनकी सुरक्षाकर्मियों से तीखी बहस हुई। खैरा ने कहा कि उन्हें विधानसभा की सचिव शशि मिश्रा लखनपाल के ऐसे आदेश के तहत रोका जा रहा है, जिस पर दस्तखत ही नहीं हैं।
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बाद में उन्होंने वह आदेश वहीं फाड़ दिया और धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि दामाद के बारे में खुलासे के बाद ही स्पीकर ने बदले की भावना के तहत यह कार्रवाई की है। स्पीकर को आशंका थी कि दोनों नेता कुछ और खुलासे कर सकते हैं। इसी लिए उनकी एंट्री पर पाबंदी लगा दी गई, लेकिन वह इसके खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। दोनों नेता करीब सवा बारह बजे तक धरने पर बैठे रहे। फिर दूसरे नेताओं के साथ साथी विधायकों का हालचाल पूछने अस्पताल चले गए।
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बैंस को स्पीकर पर कागज फेंकने के लिए 15 जून को और खैरा को वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डालने के लिए 16 जून को सस्पेंड किया गया था। बुधवार को दोनों ने प्रेस गैलरी में प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया था कि स्पीकर राणा केपी सिंह का दामाद भी अवैध रेत खनन के कारोबार में लिप्त है।
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वीरवार को दोनों को बाहरी चेक पोस्ट पर ही रोक दिया गया। वहां बहस के बाद वे अंदर पहुंचे तो विधानसभा के एंट्री गेट पर उन्हें रोक लिया गया। उनकी सुरक्षाकर्मियों से तीखी बहस हुई। खैरा ने कहा कि उन्हें विधानसभा की सचिव शशि मिश्रा लखनपाल के ऐसे आदेश के तहत रोका जा रहा है, जिस पर दस्तखत ही नहीं हैं।
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बाद में उन्होंने वह आदेश वहीं फाड़ दिया और धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि दामाद के बारे में खुलासे के बाद ही स्पीकर ने बदले की भावना के तहत यह कार्रवाई की है। स्पीकर को आशंका थी कि दोनों नेता कुछ और खुलासे कर सकते हैं। इसी लिए उनकी एंट्री पर पाबंदी लगा दी गई, लेकिन वह इसके खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। दोनों नेता करीब सवा बारह बजे तक धरने पर बैठे रहे। फिर दूसरे नेताओं के साथ साथी विधायकों का हालचाल पूछने अस्पताल चले गए।