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दिल्ली चुनावः एक मंच पर आए बादल परिवार विरोधी, ढींढसा बोले- हमारे संपर्क में हैं कई पूर्व मंत्री

Mon, 20 Jan 2020 11:32 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 20 Jan 2020 11:32 AM IST
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Sukhdev Singh Dhindsa, Parminder Singh Dhindsa may Compete to Akali Dal in Delhi Assembly Election
सुखदेव ढींढसा, परमिंदर ढींढसा - फोटो : फाइल फोटो
शिरोमणि अकाली दल से बगावत का झंडा बुलंद करने वाले सुखदेव सिंह ढींढसा अब दिल्ली विधानसभा चुनाव में बादलों को चुनौती दे सकते हैं। ढींढसा ग्रुप दिल्ली विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार का विरोध कर सकता है।
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पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर ढींढसा ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के बारे में अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है। अकाली दल की तस्वीर भी साफ नहीं है कि भाजपा के साथ मिलकर लड़ेंगे या अकेले। दिल्ली चुनाव के बारे में कोई भी फैसला परमजीत सिंह सरना और मनजीत सिंह जीके लेंगे। दिल्ली के सिख जो भी चाहेंगे, वह करेंगे।
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हम तो इसी बात की लड़ाई लड़ रहे हैं कि फैसले सर्व-सम्मति से हों। अकाली दल 2015 में चार सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनमें दो अपने सिंबल पर और दो भाजपा के चुनाव निशान पर लड़ा था। इस बार वह छह सीटों पर दावा जता रहा है।
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पंथ और पंजाब हितैषी कई पूर्व मंत्री हमारे संपर्क में
र्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा ने दावा किया कि पंथ और पंजाब हितैषी कई पूर्व मंत्री, वर्तमान और पूर्व विधायक सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा के संपर्क में हैं।

बादल परिवार विरोधियों का एक मंच पर आना अकालियों के लिए मुश्किल

गौरतलब है कि शनिवार को दिल्ली के कॉन्सटिट्यूशन क्लब में सफर-ए-अकाली लहर के बैनर तले एक कार्यक्रम हुआ। इसमें शिअद प्रधान सुखबीर बादल के नेतृत्व पर सवाल उठाकर पार्टी छोड़ने वाले सभी दिग्गज शामिल थे।

इनमें ढींढसा पिता-पुत्र, रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा, सेवा सिंह सेखवां, बलवंत सिंह रामूवालिया, रवि इंदर सिंह, मनजीत सिंह जीके शामिल हैं। इनके अलावा परमजीत सरना व हरविंदर सरना भी थे। कार्यक्रम में कई प्रस्ताव पास किए गए।

इनमें श्री अकाल तख्त साहिब और पंजाब व दिल्ली की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों को राजनीतिक दखल से आजाद कराना भी शामिल है। कार्यक्रम के दौरान दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर कोई विचार-विमर्श नहीं हुआ।

लेकिन चुनाव से ऐन पहले सभी बादल परिवार विरोधियों का एक मंच पर आना अकालियों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है।
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