{"_id":"572c934b4f1c1b71275ccefc","slug":"suicide-farmer-suicide-punjab-farmer-suicde-bathinda-farmer-suicide-punjab","type":"story","status":"publish","title_hn":"बर्बाद फसल का मुआवजा नहीं मिला, किसान ने जहर खाकर जान दी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बर्बाद फसल का मुआवजा नहीं मिला, किसान ने जहर खाकर जान दी
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा
Updated Sat, 07 May 2016 05:07 PM IST
विज्ञापन
पंजाब में किसान ने की सुसाइड
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कर्ज के चलते सुसाइड के बीच बठिंडा में एक और किसान ने परेशान होकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। मृतक की पहचान बठिंडा के गांव कोटफता निवासी पाल सिंह के तौर पर हुई है और वह अपने पीछे तीन बच्चे छोड़ गया है। जिन में से दो बच्चों को कम दिखाई देता है।
जानकारी के अनुसार गांव कोटफता का रहने वाला पाल सिंह आयु 40 वर्ष जो कि पहले खेत मजदूर का काम करता था, जिस से वह अपना घर चलाने में असमर्थ था । इस के बाद उसने अपने गांव के ही एक व्यक्ति से पांच एक्ड जमीन ठेके पर ले ली जिस में उसने कपास की फस्ल लगाई थी जो सफेद मक्खी के हमले से बरबाद हो गई थी।
गांव के रहने वाले बलदेव सिंह के अनुसार फस्ल खराब होने के बाद पीडित किसान को मुआवजा राशि नही मिली थी जिस के चलते उस पर दिन प्रति दिन कर्ज बढता जा रहा था । उन्होनें बताया कि इसी कारण के चलते गत कई दिनों से पाल सिंह परेशान चला आ रहा था । जिस के चलते उसने गत रात्रि जहर निगल खुदकुशी कर ली ।
विज्ञापन
गांव निवासी बलदेव सिंह ने बताया कि उसके तीन बच्चें है जिनमें से दो बच्चों को कम दिखाई देता है और उनका उपचार करवाने के लिए भी ऌउथसके पास ज्यादा पैसे नही थे । जिस के चलते वह अपने बच्चों का भी उपचार न करवाने के कारण परेशान रहता था।
भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष शिंगारा सिंह मान ने कहा कि अगस्त 2015 से लेकर अब तक बठिंडा में किसानों द्वारा खुदकुशी कभरने के मामले ज्यादा बढे है। उन्होनें उक्त किसानों की खुदकुशियों के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अगर अकाली सरकार चाहे तो किसानों को खुदकुशियों के रास्ते पर जाने से रोक सकती है लेकिन प्रदेश सरकार किसानों को लेकर गंभीर नही है।
उन्होनें प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि खुदकुशी पीडित किसान परिवारों को उच्चित मुआवजा राशि और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए ।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार गांव कोटफता का रहने वाला पाल सिंह आयु 40 वर्ष जो कि पहले खेत मजदूर का काम करता था, जिस से वह अपना घर चलाने में असमर्थ था । इस के बाद उसने अपने गांव के ही एक व्यक्ति से पांच एक्ड जमीन ठेके पर ले ली जिस में उसने कपास की फस्ल लगाई थी जो सफेद मक्खी के हमले से बरबाद हो गई थी।
विज्ञापन
गांव के रहने वाले बलदेव सिंह के अनुसार फस्ल खराब होने के बाद पीडित किसान को मुआवजा राशि नही मिली थी जिस के चलते उस पर दिन प्रति दिन कर्ज बढता जा रहा था । उन्होनें बताया कि इसी कारण के चलते गत कई दिनों से पाल सिंह परेशान चला आ रहा था । जिस के चलते उसने गत रात्रि जहर निगल खुदकुशी कर ली ।
विज्ञापन
गांव निवासी बलदेव सिंह ने बताया कि उसके तीन बच्चें है जिनमें से दो बच्चों को कम दिखाई देता है और उनका उपचार करवाने के लिए भी ऌउथसके पास ज्यादा पैसे नही थे । जिस के चलते वह अपने बच्चों का भी उपचार न करवाने के कारण परेशान रहता था।
भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष शिंगारा सिंह मान ने कहा कि अगस्त 2015 से लेकर अब तक बठिंडा में किसानों द्वारा खुदकुशी कभरने के मामले ज्यादा बढे है। उन्होनें उक्त किसानों की खुदकुशियों के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अगर अकाली सरकार चाहे तो किसानों को खुदकुशियों के रास्ते पर जाने से रोक सकती है लेकिन प्रदेश सरकार किसानों को लेकर गंभीर नही है।
उन्होनें प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि खुदकुशी पीडित किसान परिवारों को उच्चित मुआवजा राशि और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए ।