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Chandigarh: निगम के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा, डेढ़ साल बीतने पर भी नहीं बनीं वार्ड व सब-कमेटियां

Thu, 06 Jul 2023 08:31 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 06 Jul 2023 08:31 AM IST
सार

पार्षदों की तरफ से आरोप लगाया जा रहा है कि मेयर व अधिकारी शक्तियों को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहते, इसलिए डेढ़ साल से कमेटियों का गठन नहीं किया गया। नियमों के अनुसार, मेयर के बनते ही कमेटियों का गठन किया जाना चाहिए।  साफ-सफाई, बिजली-पानी, सीवर आदि पर बनने वाली सब-कमेटियां शहर के विकास में काफी सहायक होती हैं।

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Sub-committees and ward committees not formed even after one and half years of mayoral election in Chandigarh
चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

चंडीगढ़ नगर निगम के इतिहास में यह पहली बार है जब मेयर चुनाव के डेढ़ साल बीतने के बाद भी न तो सब-कमेटियों का गठन हुआ है और न ही वार्ड कमेटियां बनाई गईं हैं। साफ-सफाई, बिजली-पानी, सीवर आदि पर बनने वाली सब-कमेटियां शहर के विकास में काफी सहायक होती हैं। पार्षदों का आरोप है कि शक्ति का विकेंद्रीकरण न हो, इसलिए मेयर की तरफ से इनका गठन नहीं किया जा रहा।
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सड़क, जलापूर्ति व सीवरेज डिस्पोजल कमेटी, हाउस टैक्स असेसमेंट, इंफोर्समेंट, अपनी मंडी एंड डे मार्केट, फायर एंड इमरजेंसी सर्विस कमेटी, इलेक्ट्रिसिटी, साफ-सफाई, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण, स्लम व रिहैबिलिटेशन, आर्ट कल्चर एंड स्पोर्ट्स पर विभिन्न पार्षदों की सब-कमेटी बनती हैं। इन क्षेत्रों से जुड़ा मुद्दा पहले सब-कमेटी में लाया जाता है और अगर कार्य 15 से 25 लाख के बीच का है तो कमेटी ही कार्य की मंजूरी भी दे सकती है। हर महीने इनकी बैठक होती है।
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पार्षद पिछले काफी समय से इनके गठन की मांग कर रहे हैं क्योंकि उनके ज्यादातर काम सब-कमेटियों से पास हो जाते हैं, लेकिन गठन नहीं होने की वजह से छोटे से छोटे काम के लिए भी पार्षदों को एफएंडसीसी व सदन की बैठक का इंतजार करना पड़ता है। इन सब-कमेटियों के सदस्य पार्षद होते हैं। एक पार्षद कई कमेटियों का भी सदस्य हो सकता है। नगर निगम चुनाव के बाद पूर्व मेयर सरबजीत कौर का पूरा कार्यकाल निकल गया। अनूप गुप्ता का भी छह महीने का कार्यकाल पूरा हो चुका है, अब तक एक भी कमेटी नहीं बनी है।
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आरोप- शक्तियों को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहते मेयर व अधिकारी
पार्षदों की तरफ से आरोप लगाया जा रहा है कि मेयर व अधिकारी शक्तियों को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहते, इसलिए डेढ़ साल से कमेटियों का गठन नहीं किया गया। नियमों के अनुसार, मेयर के बनते ही कमेटियों का गठन किया जाना चाहिए। 

मेयर के कार्यकाल के साथ ही कमेटियों का कार्यकाल भी खत्म होता है। वार्ड कमेटियों में पार्षद अपने नौ नुमाइंदों को रखता है, जो वार्ड में आ रही समस्याओं की जानकारी पार्षद को देते हैं। इसके अलावा डीसी व नगर निगम आयुक्त की तरफ से भी एक-एक व्यक्ति का नाम प्रस्तावित किया जाता है। सभी पार्षदों से नाम मिलने के बाद निगम की तरफ से लोकल गवर्नमेंट सेक्रेटरी को प्रस्ताव भेजा जाता है। सलाहकार से चर्चा के बाद प्रशासक की मंजूरी के बाद घोषणा होती है।

पता नहीं ये कमेटियां कब बनेंगी
वार्ड कमेटी के लिए कई महीनों बाद हमसे पिछले हफ्ते नाम मांगे गए हैं। अब पता नहीं ये कमेटियां कब गठित की जाएंगी, क्योंकि डेढ़ साल तो पहले ही बीत चुका है। -दमनप्रीत सिंह, नेता प्रतिपक्ष, आप

वार्ड कमेटी के कई फायदे होते हैं

हम पिछले काफी समय से सब-कमेटी और वार्ड कमेटी के गठन की मांग कर रहे हैं। ये निगम के इतिहास में पहली बार है कि अब तक कमेटियां नहीं बनी हैं। छोटे कामों के लिए भी एफएंडसीसी व सदन की बैठक का इंतजार करना पड़ता है। -गुरप्रीत सिंह गाबी, पार्षद, कांग्रेस


कई पार्षदों की तरफ से नाम नहीं मिले

सब-कमेटियों के लिए सबकुछ हो चुका है। हम इंतजार कर रहे हैं कि सभी पार्षदों से वार्ड कमेटियों के लिए नाम आ जाएं, उसके बाद दोनों का प्रस्ताव प्रशासन में भेजा जाए लेकिन कई पार्षदों की तरफ से नाम नहीं मिले हैं इसलिए देरी हो रही है। - अनूप गुप्ता, मेयर
 
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