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ये हैं पार्षदों के वे स्टडी टूर, जिनसे नहीं हुआ कोई फायदा, टूटा गुरुर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 24 Jul 2016 09:31 AM IST
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सेक्टर 17 के व्यापारियों के साथ मीटिंग करते हुए मेयर अरुण सूद
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ से अभी तक जितने भी पार्षदों के टूर गए हैं, उसमें लाखों रुपये खर्च हुए। लेकिन एक भी टूर का शहरवासियों को फायदा नहीं हुआ। यहां तक कि स्टडी टूर की रिपोर्ट भी बनी। सदन में चर्चा भी हुई लेकिन रिपोर्ट लागू नहीं हुई। साल 2004 से लेकर अब तक पार्षदों ने अपने स्टडी टूर पर 1 करोड़ 42 लाख रुपये का खर्च किया है। हर साल के बजट में स्टडी टूर के लिए 50 लाख रुपये का बजट रखा जाता था। अब निगम के पार्षद लोगों के विरोध के बाद स्टडी टूर पर जाने से पीछे हट गए हैं।
इसका बड़ा कारण है कि उनकी लगातार जनता के सामने किरकिरी हो रही थी। फेसबुक पर स्टडी टूर के बारे में पूछने के बाद लोगों के आए कमेंट से पार्षदों को लगा वह इस बार भी स्टडी टूर पर गए तो लोगों से नजरें नहीं मिला पाएंगे। वहीं इस साल के अंत में नगर निगम चुनाव भी हैं। अगर चुनाव न होते तो पार्षदों को टूर पर जाने से कोई नहीं रोक सकता था। लोगों के कमेंट भी नहीं। क्योंकि पहले भी सरकारी खर्च पर होने वाले इस स्टडी टूर का काफी विरोध हो चुका है।
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इसका बड़ा कारण है कि उनकी लगातार जनता के सामने किरकिरी हो रही थी। फेसबुक पर स्टडी टूर के बारे में पूछने के बाद लोगों के आए कमेंट से पार्षदों को लगा वह इस बार भी स्टडी टूर पर गए तो लोगों से नजरें नहीं मिला पाएंगे। वहीं इस साल के अंत में नगर निगम चुनाव भी हैं। अगर चुनाव न होते तो पार्षदों को टूर पर जाने से कोई नहीं रोक सकता था। लोगों के कमेंट भी नहीं। क्योंकि पहले भी सरकारी खर्च पर होने वाले इस स्टडी टूर का काफी विरोध हो चुका है।
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किस वर्ष कहां गए पार्षद और कितना खर्च करके आए
सेक्टर 17 के व्यापारियों के साथ मीटिंग करते हुए मेयर अरुण सूद
- फोटो : अमर उजाला
साल-------------टूर का स्थल-----------------व्यय (लाखों में)
2004----------चेन्नई, हैदराबाद और बंगलूरू-----125400
2004---------------गोवा--------------------347100
2004----------बंगलूरू और मैसूर--------------301210
2007---------------मुंबई--------------------19530
2007------------सारंगपुर और बैंकॉक--------1510560
2009----------------गुजरात----------------586075
2010----------------केरल------------------1381600
2010---------------गंगटोक-----------------1607791
2010---------कोलकाता और गंगटोक----------1389032
2010----------------केरल-----------------1381600
2010---------------संसद--------------------47000
2011------------बंगलूरू से कोयंबटूर-----------1639700
2011-----------चेन्नई और पुड्डुचेरी------------1104744
2011-------चेन्नई, पुड्डुचेरी, मादुरी, कोयंबटूर------1104744
2013---------------गुजरात--------------------389492
2013-----------जाम नगर, जूनागढ़ और दीप--------361616
2014--------वाटर सप्लाई देखने गए कई शहर------1011240
2014---------------नासिक--------------------365129
2015--------------तमिलनाडु ------------------350000
2015---------------स्पेन----------------------285000
2004----------चेन्नई, हैदराबाद और बंगलूरू-----125400
2004---------------गोवा--------------------347100
2004----------बंगलूरू और मैसूर--------------301210
2007---------------मुंबई--------------------19530
2007------------सारंगपुर और बैंकॉक--------1510560
2009----------------गुजरात----------------586075
2010----------------केरल------------------1381600
2010---------------गंगटोक-----------------1607791
2010---------कोलकाता और गंगटोक----------1389032
2010----------------केरल-----------------1381600
2010---------------संसद--------------------47000
2011------------बंगलूरू से कोयंबटूर-----------1639700
2011-----------चेन्नई और पुड्डुचेरी------------1104744
2011-------चेन्नई, पुड्डुचेरी, मादुरी, कोयंबटूर------1104744
2013---------------गुजरात--------------------389492
2013-----------जाम नगर, जूनागढ़ और दीप--------361616
2014--------वाटर सप्लाई देखने गए कई शहर------1011240
2014---------------नासिक--------------------365129
2015--------------तमिलनाडु ------------------350000
2015---------------स्पेन----------------------285000
2014 के टूर में हो चुकी है पार्षद की मौत
चंडीगढ़ नगर निगम की हाउस मीटिंग में मेयर अरुण सूद
- फोटो : अमर उजाला
साल 2014 के विवादित टूर के 13 पार्षदों से 9-9 हजार रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। क्योंकि पार्षद अपने परिवार को भी घुमाने साथ लेकर गए थे। इनमें वर्तमान मेयर भी शामिल हैं। इस टूर में अकाली पार्षद मलकीयत सिंह की बीमार होने के कारण मौत भी हो गई थी।
पिछले चुनाव से पहले भी लगा था टूर
पांच साल पहले 2010 में भी टूर इन दिनों लगा था। उस समय भी अंत में निगम चुनाव होने थे। सबसे ज्यादा स्टडी टूर पर राशि 2010 और 2011 में बर्बाद हुई है। 2010 में पांच स्टडी टूरों पर निगम के सरकारी खजाने से 58 लाख 7 हजार 23 रुपये की राशि खर्च हुई है। 2010 में पिछला निगम का कार्यकाल समाप्त हुआ था। उस समय मेयर रविंदर सिंह पाली थे। जबकि 2011 में राज बाला मलिक मेयर थीं। उनके कार्यकाल में स्टडी टूरों पर 38 लाख 49 हजार 297 रुपये की राशि खर्च हुई है। उस समय तीन स्टडी टूर लगे हैं।
अधिकारी स्टडी टूर रिपोर्ट लागू नहीं करते
पूर्व मेयर रविंदर सिंह पाली का कहना है कि हर साल अधिकारी स्टडी टूर पर जाते हैं, लेकिन कभी शोर नहीं मचता है। उनका कहना है कि पिछले वर्षों में लगे टूरों की रिपोर्ट अगर लागू नहीं हुई है तो इसके लिए सिर्फ अधिकारी जिम्मेदार हैं। उनका कहना है कि स्टडी टूर की रिपोर्ट लागू न होने पर अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
पिछले चुनाव से पहले भी लगा था टूर
पांच साल पहले 2010 में भी टूर इन दिनों लगा था। उस समय भी अंत में निगम चुनाव होने थे। सबसे ज्यादा स्टडी टूर पर राशि 2010 और 2011 में बर्बाद हुई है। 2010 में पांच स्टडी टूरों पर निगम के सरकारी खजाने से 58 लाख 7 हजार 23 रुपये की राशि खर्च हुई है। 2010 में पिछला निगम का कार्यकाल समाप्त हुआ था। उस समय मेयर रविंदर सिंह पाली थे। जबकि 2011 में राज बाला मलिक मेयर थीं। उनके कार्यकाल में स्टडी टूरों पर 38 लाख 49 हजार 297 रुपये की राशि खर्च हुई है। उस समय तीन स्टडी टूर लगे हैं।
अधिकारी स्टडी टूर रिपोर्ट लागू नहीं करते
पूर्व मेयर रविंदर सिंह पाली का कहना है कि हर साल अधिकारी स्टडी टूर पर जाते हैं, लेकिन कभी शोर नहीं मचता है। उनका कहना है कि पिछले वर्षों में लगे टूरों की रिपोर्ट अगर लागू नहीं हुई है तो इसके लिए सिर्फ अधिकारी जिम्मेदार हैं। उनका कहना है कि स्टडी टूर की रिपोर्ट लागू न होने पर अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।