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Chandigarh News: गर्मी की छुट्टी में घर गए, हिंसा फैलने से फंसे छात्र
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चंडीगढ़। बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से हिंसा भड़की हुई है। चंडीगढ़ व आसपास के कई कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में बांग्लादेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। कई छात्र गर्मियों की छुट्टियों में अपने घर बांग्लादेश गए थे, वे अभी भी वहीं फंसे हुए हैं। चंडीगढ़ के नजदीक एक निजी विश्वविद्यालय के छात्र रितिक चौधरी भी उनमें से एक हैं, जो बांग्लादेश में फंसे हैं। वहीं, कई बांग्लादेशी छात्र चंडीगढ़ में हैं, जो अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
रितिक चौधरी ने फोन पर बताया कि वह दो महीने पहले अपनी गर्मी की छुट्टी के लिए घर गए थे लेकिन तख्तापलट और बढ़ती हिंसा के कारण अभी तक वापस नहीं लौट पाए हैं। उनकी शिक्षा का नुकसान हो रहा है। साप्ताहिक परीक्षाएं भी छूट गईं। यातायात का साधन ठप पड़ा है। आर्थिक समस्या भी झेलनी पड़ रही है। रितिक का कहना है कि विश्वविद्यालय से संपर्क किया है लेकिन पढ़ाई का लगातार नुकसान हो रहा है।
शहर में पढ़ रहे बांग्लादेशी विद्यार्थी के पास नहीं बचे पैसे : एक निजी विश्वविद्यालय में पढ़ रहे छात्र मनमोय खस्तगीर ने बताया कि तख्तापलट होने से दो महीने पहले ही वह आए थे। स्थितियां खराब थीं लेकिन इस तरह से जीवन प्रभावित हो जाएगा, इस बात की कोई भनक नहीं थी। उनके पिता ने दो महीने पहले कुछ पैसे भेजे थे, लेकिन आज ऐसी स्थिति है कि उनके पास पैसे नहीं है। हिंदू होने की वजह से उनके पिता को बांग्लादेश के बैंक में जाने से रोका जा रहा है। वहां हिंदू-मुस्लिम का विरोध इस हद तक बढ़ गया है कि उनके पिता ने अपने हाथ से रक्षा सूत्र तक काट दिया है। उन्होंने कहा कि हर पल की चिंता हो रही है कि न जाने कब तक स्थितियां सामान्य हो पाएंगी।
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रितिक चौधरी ने फोन पर बताया कि वह दो महीने पहले अपनी गर्मी की छुट्टी के लिए घर गए थे लेकिन तख्तापलट और बढ़ती हिंसा के कारण अभी तक वापस नहीं लौट पाए हैं। उनकी शिक्षा का नुकसान हो रहा है। साप्ताहिक परीक्षाएं भी छूट गईं। यातायात का साधन ठप पड़ा है। आर्थिक समस्या भी झेलनी पड़ रही है। रितिक का कहना है कि विश्वविद्यालय से संपर्क किया है लेकिन पढ़ाई का लगातार नुकसान हो रहा है।
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शहर में पढ़ रहे बांग्लादेशी विद्यार्थी के पास नहीं बचे पैसे : एक निजी विश्वविद्यालय में पढ़ रहे छात्र मनमोय खस्तगीर ने बताया कि तख्तापलट होने से दो महीने पहले ही वह आए थे। स्थितियां खराब थीं लेकिन इस तरह से जीवन प्रभावित हो जाएगा, इस बात की कोई भनक नहीं थी। उनके पिता ने दो महीने पहले कुछ पैसे भेजे थे, लेकिन आज ऐसी स्थिति है कि उनके पास पैसे नहीं है। हिंदू होने की वजह से उनके पिता को बांग्लादेश के बैंक में जाने से रोका जा रहा है। वहां हिंदू-मुस्लिम का विरोध इस हद तक बढ़ गया है कि उनके पिता ने अपने हाथ से रक्षा सूत्र तक काट दिया है। उन्होंने कहा कि हर पल की चिंता हो रही है कि न जाने कब तक स्थितियां सामान्य हो पाएंगी।
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