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Punjab: सूबे के चार महान खिलाड़ियों की जीवनी पढ़ेंगे छात्र, शारीरिक शिक्षा के सिलेबस में होगी शामिल

Sun, 16 Apr 2023 03:31 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 16 Apr 2023 03:31 PM IST
सार

शारीरिक विषय की नौवीं कक्षा की किताब में हॉकी ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर, महान एथलीट मिल्खा सिंह, एशियन चैंपियन मुक्केबाज कौर सिंह और शारीरिक शिक्षा की दसवीं कक्षा की किताब में भारत के पहले अर्जुन अवॉर्ड प्राप्त ओलम्पियन एथलीट गुरबचन सिंह रंधावा की जीवनी शामिल की गई है।

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Students of Punjab will be taught biographies of four great players from state
हरजोत सिंह बैंस - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को इस सत्र से सूबे से संबंधित चार महान खिलाड़ियों की जीवनी पढ़ाई जाएगी। इनमें तीन बार के हॉकी ओलंपिक चैंपियन बलबीर सिंह सीनियर, 'फ्लाइंग सिख' के नाम से मशहूर दिग्गज एथलीट मिल्खा सिंह, एशियाई चैंपियन मुक्केबाज कौर सिंह और भारत के पहले अर्जुन अवार्डी और ओलंपियन एथलीट गुरबचन सिंह रंधावा का नाम शामिल है।

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पंजाब के स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि खेल के क्षेत्र में छात्रों को प्रेरित और प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें पंजाब के चार महान खिलाड़ियों की जीवन गाथाएं पढ़ाई जाएंगी। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से शारीरिक शिक्षा विषय की नौवीं कक्षा के लिए पाठ्यपुस्तक में बलबीर सिंह सीनियर, मिल्खा सिंह, मुक्केबाज कौर सिंह को शामिल किया गया है। वहीं, शारीरिक शिक्षा की दसवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में भारत के पहले अर्जुन अवॉर्ड प्राप्त ओलंपियन एथलीट गुरबचन सिंह रंधावा की जीवनी पढ़ाई जाएगी।
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बलबीर सिंह सीनियर: तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बलबीर सिंह सीनियर ने लंदन (1948), हेलसिंकी (1952) और मेलबर्न (1956) ओलंपिक में भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पूरे खेल कैरियर के दौरान बलबीर सिंह ने 61 अंतरराष्ट्रीय कैप से 246 गोल किए।
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मिल्खा सिंह: पंजाब के महान एथलीट, ‘फ्लाइंग सिख’ मिल्खा सिंह ने 1958 के कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड मेडल जीता, जो आजाद भारत का पहला गोल्ड मेडल था। लाहौर में 1960 में मिल्खा सिंह ने 200 मीटर स्पर्धा में पाकिस्तान के अब्दुल खालिक के खिलाफ एक सेकंड के दसवें हिस्से से आगे रहते हुए स्वर्ण पर कब्जा जमाया। तब जनरल अयूब खान ने मिल्खा सिंह को 'फ्लाइंग सिख' की उपाधि दी थी।

कौर सिंह: महान खिलाड़ी कौर सिंह इकलौते भारतीय बॉक्सर हैं, जिन्होंने विश्व प्रसिद्ध मुक्केबाज मोहम्मद अली के साथ फाइट की थी। कौर सिंह ने अपने देश के लिए कई मेडल जीते थे। उनके शानदार प्रदर्शन के चलते उन्हें 1982 में अर्जुन पुरस्कार एवं 1983 में पद्मश्री भी दिया गया। भारत के हेवीवेट मुक्केबाज कौर सिंह ने 1984 में लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दो मैच जीते और तीन हार गए। इसके बाद उन्होंने खेल जीवन से संन्यास ले लिया था। 1979 में सिंह ने सीनियर राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीते और 1983 तक लगातार चार साल तक स्वर्ण पदक धारक बने रहे। इस दौरान 1980 में सिंह ने मुंबई में एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। 1982 में सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित हैवीवेट श्रेणी के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता।

गुरबचन सिंह रंधावा: अमृतसर में पैदा हुए ओलंपियन एथलीट गुरबचन सिंह रंधावा ने 1962 के एशियाई खेलों की डेकाथलॉन स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा उन्होंने 1960 और 1964 के ओलंपिक में भी 110 बाधा दौड़, ऊंची कूद और डेकाथलॉन में हिस्सा। 1964 के टोक्यो ओलंपिक में वह 110 मीटर बाधा दौड़ में 14.07 सेकंड समय के साथ पांचवें स्थान पर रहे थे। उन्हें 1961 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया और यह पुरस्कार पाने वाले वह देश के पहले एथलीट बने। 2005 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।

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