फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Students have to go abroad due to expensive medical education in Haryana

हरियाणा में महंगी मेडिकल शिक्षा: छात्रों को यूक्रेन व चीन का करना पड़ रहा रुख, विदेश में 15 से 25 लाख तो प्रदेश में 40 लाख फीस

Wed, 02 Mar 2022 12:25 PM IST
ajay kumar सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 02 Mar 2022 12:25 PM IST
सार

हरियाणा में पांच सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। इनके अलावा, एक सरकारी सहायता प्राप्त और सात निजी मेडिकल कॉलेज हैं। प्रदेश में कुल 1850 सीटें हैं।

विज्ञापन
Students have to go abroad due to expensive medical education in Haryana
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में महंगी एमबीबीएस फीस का असर है कि पिछले एक साल में प्रदेश के युवाओं ने यूक्रेन और चीन का रुख किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अकेले यूक्रेन में ही 1786 विद्यार्थी फंसे हैं। इनमें से अधिकतर मेडिकल की पढ़ाई करने गए हैं। इसी प्रकार, हर साल चीन भी युवा जाते हैं। इन देशों में 16 से 25 लाख में यह डिग्री पूरी कराई जा रही है, जबकि प्रदेश में इसकी फीस दोगुना 40 लाख रुपये तक देनी पड़ती है। यह फीस तो सरकारी मेडिकल कॉलेजों की है, निजी कॉलेजों में तो एक करोड़ से डेढ़ करोड़ रुपये तक वसूले जाते हैं। 

विज्ञापन


वर्ष 2020 में हरियाणा सरकार ने एमबीबीएस की फीस में कई गुना बढ़ोतरी कर एक साल की फीस करीब 10 लाख रुपये तय की थी। इससे पहले एक अभ्यर्थी को सालाना 53 हजार रुपये फीस देनी होती थी। नई पॉलिसी लागू होने के चलते अब काफी संख्या में टॉपर बच्चे भी यहां पर दाखिला न लेकर दूसरे प्रदेशों या फिर सस्ती पढ़ाई कराने वाले देशों में जा रहे हैं। इससे न केवल प्रदेश का पैसा बाहर जा रहा है, जबकि कम रैंकिंग वाले विद्यार्थी भी इस क्षेत्र में आ रहे हैं। अधिकतर युवाओं के बाहर जाने से नीचे की रैंक वालों को एमबीबीएस में दाखिला मिल रहा है। 
विज्ञापन


हालांकि, प्रदेश सरकार की ओर से एमबीबीएस कोर्स करने वाले विद्यार्थियों के लिए लोन की व्यवस्था कर रखी है। यदि अभ्यर्थी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपनी इंटर्नशिप पूरी करके सरकारी नौकरी के लिए चयनित हो जाता है, तब सरकार उसके लोन की किस्तें भरेगी। इसमें मूल और ब्याज सब शामिल होगा लेकिन यह तब तक होगा जब तक वह सरकारी नौकरी में अपनी सेवा दे रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


‘पॉलिसी पर दोबारा विचार करे सरकार’
यूक्रेन में पढ़ने वाले अमित, रोहित ने बताया कि हरियाणा में अन्य प्रदेशों से भी अधिक फीस है, इसलिए अच्छा रैंक होने के बावजूद उनको दूसरे देश या फिर प्रदेशों में कोर्स के लिए जाना पड़ रहा है। वहीं, दूसरे राज्यों में पढ़ रहे तरुण और अमृत ने कहा कि प्रदेश सरकार को इस पॉलिसी पर दोबारा से विचार करना चाहिए। साथ ही निजी कॉलेजों की फीस पर भी नियंत्रण किया जाए। यहां पर एक करोड़ तक रुपये लिए जा रहे हैं। 

13 मेडिकल कॉलेज, 1850 सीटें
हरियाणा में पांच सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। इनके अलावा, एक सरकारी सहायता प्राप्त और सात निजी मेडिकल कॉलेज हैं। प्रदेश में कुल 1850 सीटें हैं। हालांकि, प्रदेश में हर साल लाखों की संख्या में युवा नीट का पेपर देते हैं। मेडिकल क्षेत्र के विशेषज्ञ बताते हैं बाहर जाने वाले अधिकतर वे विद्यार्थी होते हैं जिनकी रैंक कम होती है या फिर अच्छी रैंक होने के बावजूद अर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती।

हमारी सरकार की प्राथमिकता है कि हर जिले में मेडिकल कॉलेज हो। इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। पहले के मुकाबले एमबीबीएस की सीटें भी बढ़ाई गई हैं। प्रधानमंत्री निजी मेडिकल कॉलेजों से फीस कम करने के लिए अपील कर चुके हैं, ताकि युवाओं को पढ़ाई के लिए बाहर न जाना पड़े।  - मनोहर लाल, मुख्यमंत्री, हरियाणा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed