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Chandigarh News: चंडीगढ़ से नेपाल तक साइकिल चलाकर विद्यार्थियों ने दिया भाईचारा और एकता का संदेश
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चंडीगढ़। भारत के मैदानी इलाकों से होते हुए सीमा पार कर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में तक विद्यार्थियों ने साइकिल चलाकर दोनों देशों के बीच भाईचारे और एकता का संदेश दिया। बेशक यात्रा काफी कठिनाई एवं चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन विद्यार्थियों की दृढ़ इच्छाशक्ति और एक दूसरे के साथ ने सफर को आसान बना दिया। यह जज्बा दिखाया है सेक्टर-27 स्थित भवन विद्यालय के 17 छात्रों और पांच शिक्षकों की टोली ने। 27 मई से आयोजित इंडो-नेपाल साइक्लोथॉन मैत्री 2023 पूरा कर विद्याथीं और शिक्षक 1300 किलोमीटर का सफल तय कर वीरवार को काठमांडू से वापस चंडीगढ़ पहुंचे। इस अवसर पर भारतीय विद्या भवन के अध्यक्ष आरके साबू ने सभी प्रतिभागियों का फूलों की माला से स्वागत किया। प्रधानाचार्य विनीता अरोड़ा ने प्रतिभागियों को सफलतापूर्वक यात्रा पूरी करने पर बधाई दी।
चंडीगढ़ से 27 मई को यात्रा शुरु कर प्रतिभागियों ने प्रतिदिन औसतन 200 किलोमीटर की दूरी को करीब 10 घंटे साइकिल चलाकर पूरा किया। हरिद्वार, काशीपुर, सितारंगज, कपिलवस्तु आदि होकर भारत-नेपाल सीमा पार कर 3 मई को प्रतिभागी काठमांडू पहुंचे, जहां भारतीय दूतावास ने उनका अभिनंदन किया। टीम में सातवीं कक्षा से लेकर सीनियर कक्षाओं के विद्यार्थी शामिल थे। दसवीं कक्षा के अनहद ने बताया कि नेपाल के पहाड़ी इलाकों में साइकिल चलाना चुनौतीपूर्ण था, पर सबके साथ ने यात्रा को आसान बनाया। वह गाना गाते हुए एक धुन में आगे बढ़ते गए।
प्रकृति के सौंदर्य के साथ संस्कृति का अनुभव रहा खास
नेपाल में साइकिल चलाते समय हमें न केवल प्रकृति की सुंदरता देखने को मिली बल्कि रास्तों के साथ वहां की अर्थव्यवस्था वहां के रहन-सहन, पहनावे के बारे में भी जानने को मिला। काठमांडू में स्कूल के दौरे के समय अन्य विद्यार्थियों से हुई बातचीत रोचक थी। वहां हमने नए दोस्त भी बनाए जिनसे अब सोशल मीडिया के जरिए बातचीत होती रहेगी। हमने पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन भी किए। - शोमित, नौवीं कक्षा
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एसएसबी की ओर सुरक्षा प्रदान करना बेहद यादगार लम्हा
हमारी यात्रा का लक्ष्य दो देशों में भाईचारे और प्रेमभावना को बढ़ाना था। जब सितारगंज में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के सेनाकर्मियों ने हमारा स्वागत किया और हमें भारत की सीमा तक सुरक्षा प्रदान की, वह बेहद यादगार लम्हा था। हमें सेनाकर्मियाें ने बैज भी दिए। काठमांडू के स्कूल में सांस्कृतिक आदान प्रदान के दौरान साथी विद्यार्थियों ने संस्कृत में श्लोक भी बोले और अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए। - मानिक, 11वीं कक्षा कॉमर्स संकाय
दोस्ती हुई और भी गहरी
यात्रा से पूर्व हम एक दूसरे को जानते थे, पर अब आपस में दोस्ती बहुत गहरी हो गई है। पहाड़ी इलाकों और खराब रास्तों में साइकिल चलाना काफी चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में प्रतिभागियों और शिक्षकों के प्रोतसाहन ने प्रेरणा दी। 12 की जगह मुश्किल रास्तों पर 15 घंटे तक भी हमने साइकिल चलाई। - अनहद, 10वीं कक्षा
थोड़ी झिझक थी, बेटे का जाने का मन था, रोका नहीं
पहले बेटे को इतने दूर भेजने से थोड़ी झिझक जरूर हुई थीश, पर बेटे का जाने का मन था तो उसे रोका नहीं। अनहद की यह पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा थी, वह भी साइकिल पर। इनके सफलतापूर्वक यात्रा पूरी करने पर खुशी हो रही है। -भूपिंदर कौर, अनहद की मां
विद्यार्थियों को दी थी दो महीने की ट्रेनिंग
यात्रा से पूर्व बच्चों की दो महीने की ट्रेनिंग की गई थी, जिसमें उनके स्वास्थ्य और सेहत का आकलन किया गया था। रोज सुबह विद्यार्थी साइकिल चलाने का अभ्यास भी करते थे। - विनिता अरोड़ा, भवन विद्यालय-27 प्रधानाचार्य
बच्चों की उपलब्धि पर गर्व
इससे पूर्व बच्चे पहले भी साइक्लोथॉन पर जा चुके हैं, पर यह पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा थी। यात्रा पूरी करने में विद्यार्थियों और अध्यापकों का योगदान सराहनीय रहा है। स्कूल को उन पर गर्व है। - आरके साबू, भारतीय विद्या भवन अध्यक्ष
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चंडीगढ़ से 27 मई को यात्रा शुरु कर प्रतिभागियों ने प्रतिदिन औसतन 200 किलोमीटर की दूरी को करीब 10 घंटे साइकिल चलाकर पूरा किया। हरिद्वार, काशीपुर, सितारंगज, कपिलवस्तु आदि होकर भारत-नेपाल सीमा पार कर 3 मई को प्रतिभागी काठमांडू पहुंचे, जहां भारतीय दूतावास ने उनका अभिनंदन किया। टीम में सातवीं कक्षा से लेकर सीनियर कक्षाओं के विद्यार्थी शामिल थे। दसवीं कक्षा के अनहद ने बताया कि नेपाल के पहाड़ी इलाकों में साइकिल चलाना चुनौतीपूर्ण था, पर सबके साथ ने यात्रा को आसान बनाया। वह गाना गाते हुए एक धुन में आगे बढ़ते गए।
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प्रकृति के सौंदर्य के साथ संस्कृति का अनुभव रहा खास
नेपाल में साइकिल चलाते समय हमें न केवल प्रकृति की सुंदरता देखने को मिली बल्कि रास्तों के साथ वहां की अर्थव्यवस्था वहां के रहन-सहन, पहनावे के बारे में भी जानने को मिला। काठमांडू में स्कूल के दौरे के समय अन्य विद्यार्थियों से हुई बातचीत रोचक थी। वहां हमने नए दोस्त भी बनाए जिनसे अब सोशल मीडिया के जरिए बातचीत होती रहेगी। हमने पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन भी किए। - शोमित, नौवीं कक्षा
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एसएसबी की ओर सुरक्षा प्रदान करना बेहद यादगार लम्हा
हमारी यात्रा का लक्ष्य दो देशों में भाईचारे और प्रेमभावना को बढ़ाना था। जब सितारगंज में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के सेनाकर्मियों ने हमारा स्वागत किया और हमें भारत की सीमा तक सुरक्षा प्रदान की, वह बेहद यादगार लम्हा था। हमें सेनाकर्मियाें ने बैज भी दिए। काठमांडू के स्कूल में सांस्कृतिक आदान प्रदान के दौरान साथी विद्यार्थियों ने संस्कृत में श्लोक भी बोले और अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए। - मानिक, 11वीं कक्षा कॉमर्स संकाय
दोस्ती हुई और भी गहरी
यात्रा से पूर्व हम एक दूसरे को जानते थे, पर अब आपस में दोस्ती बहुत गहरी हो गई है। पहाड़ी इलाकों और खराब रास्तों में साइकिल चलाना काफी चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में प्रतिभागियों और शिक्षकों के प्रोतसाहन ने प्रेरणा दी। 12 की जगह मुश्किल रास्तों पर 15 घंटे तक भी हमने साइकिल चलाई। - अनहद, 10वीं कक्षा
थोड़ी झिझक थी, बेटे का जाने का मन था, रोका नहीं
पहले बेटे को इतने दूर भेजने से थोड़ी झिझक जरूर हुई थीश, पर बेटे का जाने का मन था तो उसे रोका नहीं। अनहद की यह पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा थी, वह भी साइकिल पर। इनके सफलतापूर्वक यात्रा पूरी करने पर खुशी हो रही है। -भूपिंदर कौर, अनहद की मां
विद्यार्थियों को दी थी दो महीने की ट्रेनिंग
यात्रा से पूर्व बच्चों की दो महीने की ट्रेनिंग की गई थी, जिसमें उनके स्वास्थ्य और सेहत का आकलन किया गया था। रोज सुबह विद्यार्थी साइकिल चलाने का अभ्यास भी करते थे। - विनिता अरोड़ा, भवन विद्यालय-27 प्रधानाचार्य
बच्चों की उपलब्धि पर गर्व
इससे पूर्व बच्चे पहले भी साइक्लोथॉन पर जा चुके हैं, पर यह पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा थी। यात्रा पूरी करने में विद्यार्थियों और अध्यापकों का योगदान सराहनीय रहा है। स्कूल को उन पर गर्व है। - आरके साबू, भारतीय विद्या भवन अध्यक्ष