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संकट में भारतीय: देश में मेडिकल शिक्षा महंगी, यूक्रेन में बेहद सस्ती, युवाओं के विदेश जाने के पीछे यही वजह
Wed, 02 Mar 2022 04:23 PM IST
ajay kumar
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 02 Mar 2022 04:23 PM IST
सार
यूक्रेन में फंसे भारतीय विद्यार्थियों में पंजाब के कितने हैं, इस बारे अभी कोई आंकड़ा सरकार के पास नहीं है और नए सिरे से डाटाबेस तैयार करने का फैसला लिया गया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत के करीब 18 हजार विद्यार्थियों के यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध में फंस जाने का एक बड़ा कारण यह भी है कि यहां मेडिकल शिक्षा इतनी अधिक महंगी है कि भारतीय विद्यार्थियों को विदेश का रुख करना पड़ता है। मोटे अनुमान के अनुसार, भारत में जितना पैसा खर्च कर विद्यार्थी एमबीबीएस की डिग्री हासिल करता है, विदेश में पढ़ाई करने में इससे एक तिहाई रकम ही खर्च करनी पड़ती है।
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विदेशी मेडिकल कॉलेज मूलभूत ढांचे के मामले में भी भारत से कहीं आगे हैं। इसके अलावा विदेश में नीट जैसे टेस्ट भी जरूरी नहीं हैं और विद्यार्थियों को सीधे प्रवेश मिल जाता है। भारतीय विद्यार्थियों को समय रहते यूक्रेन से निकाले जाने की चर्चा के बीच यह सवाल भी उठ गया है कि आखिरकार भारतीय विद्यार्थियों को मेडिकल शिक्षा के लिए इतनी बड़ी संख्या में विदेश जाने की आवश्यकता क्यों है।
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मेडिकल की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए युद्ध प्रभावित यूक्रेन, चीन और फिलीपींस के बाद तीसरा सबसे लोकप्रिय गंतव्य है। हर साल हजारों भारतीय छात्र कई कारणों से यूक्रेन को चुनते हैं। यूक्रेन में फंसे भारतीय विद्यार्थियों में पंजाब के कितने हैं, इस बारे अभी कोई आंकड़ा सरकार के पास नहीं है और नए सिरे से डाटाबेस तैयार करने का फैसला लिया गया है।
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पंजाब के मेडिकल कॉलेजों में दिसंबर 2020 को 250 सीटें बढ़ाए जाने के बाद सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 900 सीटें हो गई हैं। मौजूदा समय में तीन मेडिकल कॉलेजों में 650 सीटें हैं। वर्तमान में पटियाला, फरीदकोट और अमृतसर में सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं, जहां से विद्यार्थी एमबीबीएस कर रहे हैं।
2020 में पंजाब सरकार ने अपने मेडिकल कॉलेजों में पूरे देश में सबसे ज्यादा 80 फीसदी फीस तक की बढ़ोतरी कर दी थी। इसका नतीजा यह हुआ कि 2021-22 के सत्र के लिए फार्म भरने वाले 441 विद्यार्थियों ने महंगी फीस के चलते अपनी सीटें छोड़ दीं। यह भी गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 15 फीसदी से ज्यादा सरकार फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकती। इस समय पंजाब में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स की मौजूदा फीस 4.40 लाख से बढ़कर 7.80 लाख रुपये हो चुकी है।
इस बढ़ोतरी के बाद प्राइवेट कॉलेजों में सरकारी कोटे के तहत फीस 18 लाख रुपये, जबकि मैनेजमेंट कोटे के तहत फीस 47 लाख हो चुकी है।दूसरी ओर, यूक्रेन में मेडिकल शिक्षा भारत के मुकाबले कितनी सस्ती है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां एमबीबीएस 3 लाख रुपये में हो जाती है, जबकि भारत में सरकारी कॉलेज ही विद्यार्थी से इस डिग्री के लिए 20 लाख रुपये तक लेते हैं।