{"_id":"65fe65dd6ef98dafb10a4209","slug":"stubble-is-becoming-problem-for-the-farmers-as-well-as-government-in-punjab-2024-03-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Loksabha Election 2024: पंजाब के लिए सबसे बड़ी चुनौती पराली का निस्तारण, 10 साल से लगातार विकराल हो रही समस्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Loksabha Election 2024: पंजाब के लिए सबसे बड़ी चुनौती पराली का निस्तारण, 10 साल से लगातार विकराल हो रही समस्या
Sat, 23 Mar 2024 01:00 PM IST
निवेदिता वर्मा
राजिंद्र शर्मा/रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, चंडीगढ़/पटियाला
राजिंद्र शर्मा/रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, चंडीगढ़/पटियाला
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 23 Mar 2024 01:00 PM IST
सार
धान से पैदा होने वाली पराली पंजाब के लिए नासूर बन गई है। इसे जलाने से पैदा हुए धुएं से पंजाब ही नहीं उत्तर भारत के अन्य राज्य भी परेशान हैं। 10 साल से लगातार यह समस्या विकराल होती जा रही है। सरकार के प्रयास व सख्ती से पराली जलाने के मामलों में कुछ कमी तो आई है, लेकिन अभी बहुत काम होना बाकी है। किसानों का तर्क है कि उनके पास साधन कम हैं। इसे डीकंपोज करना लाभकारी नहीं है। उनके पास जलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
विज्ञापन
अमृतसर में जली पराली।
- फोटो : फाइल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब में पराली किसानों के साथ-साथ सरकार के लिए भी मुसीबत बनती जा रही है। धान की कटाई के बाद अक्तूबर व नवंबर माह के दौरान पंजाब में ही सबसे ज्यादा पराली जलाने के मामले सामने आते हैं। हर वर्ष नासा से जारी तस्वीरों में इस सच्चाई की गहराई को समझा जा सकता है। पंजाब को हर वर्ष उत्तर भारत में प्रदूषण की समस्या बढ़ाने की तोहमत झेलनी पड़ती है। वर्ष 2023 में पराली जलाने के मामलों में 30 फीसदी तक कमी जरूर आई, लेकिन पूरी तरह से ये समस्या हल नहीं हुई।
विज्ञापन
दरअसल, पंजाब में धान की पराली आमतौर पशु चारे के लिए इस्तेमाल नहीं होती है। कटाई के बाद किसानों के पास रबी की फसल की बुआई के लिए भी कम समय बचता है। यही कारण है कि वह फसल अवशेष को डीकंपोज करना लाभकारी नहीं मानते और वह खेतों को खाली करने के लिए पराली में आग लगा देते हैं। इस कारण प्रदूषण की समस्या भी बढ़ती है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार पंजाब में धान की कटाई के 45 दिनों के पीरियड के दौरान वर्ष 2023 में 22 नवंबर तक 36118 मामले सामने आए, जबकि वर्ष 2022 में इस अवधि के दौरान ये मामले 49604 सामने आए थे। इस तरह सरकार 30 फीसदी तक इन मामलों को कम करने में कामयाब रही, जबकि उसका लक्ष्य 50 फीसदी कम करने का था, जिसे वह पूरा नहीं कर पाई।
विज्ञापन
खतरनाक श्रेणी में पहुंच जाती है हवा
पराली की कटाई के सीजन के बाद पराली जलाने के मामलों के चलते पंजाब, हरियाणा व दिल्ली की हवा खतरनाक श्रेणी में पहुंच जाती है। केंद्र ने पंजाब के 9 शहरों को भी गैर-प्राप्ति शहरों की सूची में शामिल किया हुआ है। ये उन शहरों को घोषित किया जाता है, जो 5 साल की अवधि में लगातार वायु गुणवत्ता स्तर पीएम-10 के लिए राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक को पूरा नहीं करते हैं। इन शहरों में डेराबस्सी, गोबिंदगढ़, जालंधर, खन्ना, लुधियाना, नया नंगल, पठानकोट, पटियाला और अमृतसर को शामिल किया गया था।
विज्ञापन
आठ हजार अधिकारियों को फील्ड में उतारा, फिर भी नहीं मिला रिजल्ट
सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए तमाम प्रयास किए।आठ हजार अधिकारियों को फील्ड में उतारा गया, ताकि इस समस्या को रोका जा सके। साथ ही किसानों को पराली न जलाने के प्रति अधिकारियों ने जागरूक भी किया। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया। बावजूद इसके किसानों ने किसी की नहीं सुनी। अधिकारियों को पकड़कर उनसे ही पराली में आग लगवाई गई। पराली जलाने के कारण प्रदेश ही नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा व यूपी की हवा खराब हुई। केंद्र सरकार के अनुसार पराली के प्रबंधन के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं।
मशीनों की स्थिति
पंजाब में उपलब्ध फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों की संख्या सबसे अधिक है। यहां कुल संख्या 1,17,672, हरियाणा में 80,071 और यूपी-एनसीआर में 7,986 है। इसके अतिरिक्त कटाई के पिछले मौसम के दौरान उपलब्धता बढ़ाने के लिए पंजाब में अतिरिक्त 23,000 सीआरएम मशीनें, हरियाणा में 7,572 और एनसीआर के लिए उत्तर प्रदेश में 595 अतिरिक्त सीआरएम मशीनें खरीदने की कार्रवाई शुरू की गई थी।
क्या कहते हैं किसान
1. गेहूं की फसल के लिए 10 दिन ही बचते हैं, आखिर किसान क्या करें: बलदेव सिंह
किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा का कहना है कि पंजाब में 75 प्रतिशत छोटे किसान हैं, जिनके पास खेती के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं। ऐसे किसान पराली का खुद प्रबंधन कैसे कर सकते हैं। यही कारण है कि इनके पास पराली को जलाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता है। दूसरा कारण किसान के पास धान की फसल के बाद गेहूं की फसल के लिए 10 दिन ही बचते हैं, जिसके चलते खेत से पराली को हटाने के लिए किसान आखिर क्या करें।
2. पराली प्रबंधन के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाए
संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक के इंडिया कोआर्डिनेटर सुखजिंदर सिंह ने कहा कि पराली के प्रबंधन के लिए किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल मुआवजा दिया जाना चाहिए। किसान खुद ही इसके निपटारे का पूरा काम देखेंगे, लेकिन सरकार मुआवजा देने के लिए राजी नहीं हुई। कोर्ट में भी किसानों ने इसे लेकर अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा कि पराली के निपटारे के लिए सरकार की तरफ से जो भी उपकरण उनको प्रदान करने का वादा किया गया था, वो किसानों के पास पहुंचे ही नहीं। साथ ही किसानों के लिए पराली को डीकंपोज करना लाभकारी नहीं है।
क्या कर रही सरकार...
मशीनों की खरीद पर 50 फीसदी सब्सिडी
कृषि मशीनरी और पराली प्रबंधन से संबंधित मशीनों की खरीद पर राज्य सरकार की तरफ से किसानों को 50 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। हाल ही में सामने आया था कि अधिकतर किसानों के पास ये मशीनें ही नहीं पहुंच पाईं। कई कंपनियों ने मिलीभगत करके, मशीनें तो नहीं बेचीं, लेकिन कागजों पर मशीनों की खरीद दिखाकर सब्सिडी की रकम हड़प ली। यही कारण है कि पंजाब सरकार ने इस मामले में जांच करवाने का फैसला लिया था।
एक्सपर्ट की राय...
सरकार को पॉलिसी बनाने की जरूरत : डॉ. हर्ष नायर
कृषि विशेषज्ञ डॉ. हर्ष नायर ने बताया कि सरकार को पराली के प्रबंधन के लिए पॉलिसी बनानी चाहिए। जब तक सरकार पराली का समाधान निकालकर किसानों को नहीं दिखाई देती है व उनको साथ नहीं देती, तब तक ये समस्या हल नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि ये एक बॉयोमास है। इससे पेपर बनाया जा सकता है। खाद के रूप में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। छोटे-छोटे स्टार्टअप्स को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है। पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने भी मशीनें बनाईं थीं, जिसमें पराली से ऐसा मटीरियल बनाने की तैयारी की गई थी, जिसका पावर प्लांट्स में इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही इसका चारा बनाने का भी प्रस्ताव था। इन सभी परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार को पराली के प्रबंधन के लिए आगे आना होगा।
साल 2023 में हॉटस्पॉट रहे जिले
नाम पराली जलाने के मामले
संगरूर 5618
फिरोजपुर 3398
बठिंडा 2972
मोगा 2795
बरनाला 2316
मानसा 2268
तरनतारन 2026
फरीदकोट 2022
पराली जलाने के किस वर्ष कितने मामले
2021- 71159
2022- 49922
2023- 36663
साल- धान रकबा (लाख हैक्टेयर)- पराली निकली (लाख टन)
2022 31.67 20.08
2023 31.0 19.55
2024 (संभावित) 31.54 19.52
आंकड़े
-31 लाख हेक्टेयर जमीन में होती है हर वर्ष धान की पैदावार
-200 लाख टन से अधिक पराली का उत्पादन होता है हर वर्ष राज्य में
-20 प्रतिशत पराली का ही हो पाता है निस्तारण विभिन्न माध्यमों से
-2023 में पराली जलाने के मामलों में 30 फीसदी तक कमी दर्ज हुई
-36118 मामले सामने आए वर्ष 2023 में 22 नवंबर तक पराली जलाने के
-49604 केस सामने आए थे वर्ष 2022 में इस अवधि के दौरान
-1,17,672 मशीनों का प्रयोग किया गया पंजाब में पिछले वर्ष निस्तारण के लिए
सरकार राज्य में पराली जलाने के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसके परिणाम स्वरूप इस तरह के मामलों में कमी भी आई है। किसानों को 1.40 लाख फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें उपलब्ध कराई गईं। आने वाले वर्षों में पराली जलाने के मामलों में और कमी आएगी। - मलविंदर सिंह कंग, मुख्य प्रवक्ता, पंजाब आप
केंद्र की भाजपा और दिल्ली और पंजाब की 'आप' सरकार पराली जलाने के मामलों में असफल रहीं हैं। कोर्ट साफ कह चुका है कि पराली जलाने के लिए सिर्फ किसानों को जिम्मेदार न ठहराया जाए। दिल्ली में होने वाले प्रदूषण में बड़ा हिस्सा वाहनों से होने वाले वाहनों का है। - प्रताप सिंह बाजवा, नेता विपक्ष, कांग्रेस
पराली प्रबंधन गंभीर मुद्दा है। इस पर सबको मिल कर सामने आना चाहिए। आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब में इस विषय की गंभीरता समझने में फेल साबित हुई है। किसानों को जब तक पराली निस्तारण के बदले मुआवजा नहीं दिया जाता, यह समस्या हल नहीं होगी। - दलजीत सिंह चीमा, मुख्य प्रवक्ता, शिअद
केंद्र से पराली जलाने से रोकने के लिए के लिए पंजाब सरकार को 1700 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। इसका प्रयोग पराली जलाने से रोकने और किसानों के हित की बजाय आम आदमी पार्टी ने सिर्फ सत्ता की लिप्सा में किया। इसकी वजह से हर साल दिल्ली और पंजाब गैस चैंबर बन जाते हैं। - तरुण चुघ, भाजपा राष्ट्रीय महासचिव