फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   stress on border after surgical strike and border near villages people not ready to left houses

सर्जिकल स्ट्राइकः राहत कैंपों में क्यों जाना नहीं चाहते हैं लोग, बताई बड़ी वजह

Mon, 03 Oct 2016 09:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Updated Mon, 03 Oct 2016 09:34 PM IST
विज्ञापन
stress on border after surgical strike and border near villages people not ready to left houses
सर्जिकल स्ट्राइक के चलते हाईअलर्ट के बाद सुरक्षित ठिकानों की ओर जाते लोग - फोटो : अमर उजाला
बॉर्डर से सटे गांवों के लोग सरकार के बनाए राहत शिविरों में जाने को तैयार नहीं हैं। वे कहते हैं कि कैंपों में जाने से अच्छा लड़कर मरें।
विज्ञापन


अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास गुरदासपुर का करीब 10 किमी का रास्ता पाकिस्तान से सटा है। इलाके में 294 गांव हैं। इनमें पांच गांव रावी दरिया से पार हैं। सरकार की तरफ से गुरदासपुर में दो राहत शिविर गोल्डन व सुखजिंदरा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग में बनाए गए हैं।

प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी इन राहत शिविरों में कोई आने के लिए तैयार नहीं है। यहां न तो पीने का पानी है और न ही बिस्तरों का प्रबंध है। टेंट को ही जमीन पर बिछाकर लोगों का इंतजार किया जा रहा है।
विज्ञापन

दीवारों में सीलन और फर्श पर गंदगी

stress on border after surgical strike and border near villages people not ready to left houses
बॉर्डर से सटे गांवों के लोगों के लिए बने राहत कैंप - फोटो : अमर उजाला
गोल्डन इंस्टीट्यूट के बेसमेंट में राहत शिविर एक बड़े हॉल में है। इसकी दीवारों में सीलन है और फर्श गंदगी से अटा पड़ा है। पीने का पानी तक नहीं है और बिजली की तारें बाहर निकली हुई हैं।

अमर उजाला की टीम जब गोल्ड इंस्टीट्यूट पहुंची तो वहां हालात काफी खराब थे। कमरे से सीलन की बदबू आ रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे हॉल को कभी खोला ही न गया है। प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा वहां मौजूद नहीं था।

इंस्टीट्यूट के कर्मचारियों ने हॉल को खोलकर अंदर का नजारा दिखाया। ऐसा ही नजारा सुखजिंदरा इंस्टीट्यूट का भी था। वहां लाइब्रेरी के हाल को शिविर के रूप में खोला गया था। वहां भी न तो बिस्तर थे और न ही पीने का पानी।

बच्चों को बीमार नहीं करना चाहते लोग

stress on border after surgical strike and border near villages people not ready to left houses
सर्जिकल स्ट्राइक के चलते हाईअलर्ट के बाद सुरक्षित ठिकानों की ओर जाते लोग - फोटो : अमर उजाला
सीमावर्ती गांव की सरपंच रणदीप कौर का कहना है कि उन्हें अपने बच्चों को बीमार नहीं करना है। शिविरों की हालत खराब है। मच्छर हैं, गंदगी है। वहां वह कैसे अपने बच्चों या लोगों को भेज सकते हैं। इससे अच्छा तो वह सीमा पर रहकर टक्कर लेना अच्छा समझते हैं।

राहत शिविरों में वह बीमार होने नहीं जाएंगे। प्रीतम सिंह ने बताया कि पुलिस कह रही थी कि चलो शिविर में। पुलिस को सारे गांव ने मिलकर जवाब दे दिया कि हम नहीं जाएंगे राहत शिविरों में जो करना है कर लो। हमें जेल तो नहीं भेज सकते न।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed