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हरियाणा में पराली से कमाई शुरू, चीनी-पेपर मिलों को ईंधन ब्लॉक बनाकर बेच रहे किसान

Sun, 11 Oct 2020 02:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 11 Oct 2020 02:01 AM IST
सार

  • हरियाणा सरकार का जोर, पराली खेतों में न जले, इसलिए ग्राम पंचायतों के लिए जारी किए लाखों के इनाम
  • कृषि विभाग के उप निदेशक ने तैयार की पराली प्रबंधन से आय बढ़ाने संबंधी रिपोर्ट

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straw starts earning in Haryana farmers selling it to sugar-paper mills by making fuel blocks
ईंधन ब्लॉक... - फोटो : amar ujala

विस्तार

धान कटाई के सीजन में हरियाणा सरकार का इस बात पर पूरा जोर है कि किसान पराली खेतों में न जलाएं। इसके लिए राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों के लिए लाखों रुपये के इनाम की घोषणा कर रखी है। किसानों ने भी आगे बढ़कर पराली से कमाई शुरू कर दी है। किसान पराली को ईंधन ब्लॉक का रूप देकर एक निजी एजेंसी के माध्यम से चीनी और पेपर मिलों में सप्लाई कर रहे हैं। वे इस काम को समूह बनाकर अंजाम दे रहे हैं।

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हरियाणा कृषि विभाग के उप निदेशक डा. गिरीश नागपाल ने ‘एन्वायरमेंट फ्रेंडली एंड इकोनॉमिक वे टू डिस्पोज पैडी स्ट्रा’ नाम से एक खास रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपी है। यह रिपोर्ट हरियाणा के 499 गांवों की करीब 2.10 लाख एकड़ जमीन पर होने वाली धान की खेती के बाद बचने वाली पराली पर आधारित है। रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह से किसान पराली को ईंधन बनाकर उसे बेचकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। रिपोर्ट में डा. गिरीश नागपाल का कहना है कि धान की कटाई के बाद एक एकड़ से करीब 2 टन पराली निकलती है। जिसके एक्स-सी टू उपकरणों की मदद से ईंधन नुमा ब्लॉक तैयार होते हैं। ये ईंधन नुमा ब्लॉक बाजार में 1800 रुपये प्रति टन बिकते हैं।
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खुली पराली बिक रही 12 सौ रुपये टन
जबकि यदि किसान खुली पराली बेचना चाहें तो वह 1200 रुपये प्रति टन में बिकती है। पराली की खरीद पेपर मिलें, चीनी मिलें व अन्य प्राइवेट कंपनियां करती हैं। किसान के पास यदि पराली से ईंधन बनाने वाले अपने उपकरण न हों, तो प्राइवेट एजेंसियां उनके खेतों में ही अपने एक्स-सी टू उपकरणों से पराली ईंधन ब्लाक बनाकर उसे वाहनों में भर कर मिलों तक पहुंचा रही हैं। किसान उनकी मदद से भी कमाई कर सकता है। रिपोर्ट में सरकार से आग्रह किया गया है कि यह मॉडल गांवों में लागू किया जाए।
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किसान के खेत से ही उठाया जाएगा पराली ईंधन
कुरुक्षेत्र, कैथल, अंबाला समेत कई इलाकों के किसान पराली जलाने की जगह उसे बेचकर कमाई कर रहे हैं। बलजीत सिंह, विकास बहगल, जसविंद्र सिंह, अच्छर सिंह, गुरप्रीत सिंह व इंद्र सिंह उनमें शामिल हैं। ये लोग प्राइवेट एजेंसी के उपकरणों के माध्यम से अपने खेतों में ही पराली के ईंधन ब्लाक तैयार कर रहे हैं। यही एजेंसी विभिन्न चीनी व पेपर मिलों में ईंधन ब्लॉक की सप्लाई करेगी और अपना कमीशन काटकर किसानों को पराली का भुगतान करेगी।


मदद कर रहा कृषि विभाग
इन किसानों ने बताया कि हरियाणा कृषि विभाग इस काम में उनकी पूरी मदद कर रहा है और वे समूह बनाकर ये काम कर रहे हैं। अन्य गांवों से भी किसानों की कई टोलियां उनके खेतों में इसी काम को देखने आ रही हैं और इससे प्रेरित भी हो रही हैं। कृषि उप निदेशक डा. गिरीश नागपाल के अनुसार इसके अलावा सरकार ने किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटरों की भी व्यवस्था की है। जहां इन सी टू उपकरण मौजूद हैं। जिसकी मदद से किसान चाहें तो अपने खेत की पराली को खेत में ही मिट्टी के साथ मिलाकर नष्ट कर सकते हैं।

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