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आपबीती: मकान हिल रहा था और चारों ओर चीखें थीं

Wed, 29 Apr 2015 05:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार Updated Wed, 29 Apr 2015 05:04 PM IST
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story by a family returned back from nepal after earthquake

काठमांडू में आए जलजले को देखकर अभी भी रूह कांप उठती है। पूरा मकान हिल रहा था। बच्चों और पत्नी को साथ लेकर तुरंत घर से बाहर निकला। एक पांव दरवाजे के अंदर दूसरा बाहर। अचानक पीछे के कमरे धड़ाम से ढह गए। चारों तरफ चीखें और आवाजें सुनाई दे रही थीं।

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चंद मिनट आए इस कंपन ने सब कुछ खाक में मिला दिया। काठमांडू के विजय नगर क्षेत्र से हिसार लौटे कमल व उसके परिवार ने आंखों देखा हाल बयान किया है। वर्तमान में जैन गली में रह रहे विजय ने बताया है कि शुक्र है उस अद्भुत शक्ति का, जिसकी वजह से मेरा परिवार बच गया।
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कमल ने बताया है कि वह करीब 20 साल से अपने परिवार के साथ हिसार रह रहा है। भूकंप आने से एक-दो दिन पहले वह पुस्तैनी जमीन का सौदा करने के सिलसिले में नेपाल गया था। उसके साथ उसकी पत्नी बबीता, बच्चे कंचन और मनीषा भी साथ थे। वे सभी घर में बैठे थे।
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अचानक पूरा घर हिलने लगा। हुआ क्या शायद हम समझ पाते, सभी एक साथ घर से निकलने लगे। दरवाजा भी पार नहीं किया कि मकान का पिछला हिस्सा धड़ाम से गिर गया। बाहर निकले तो चारों तरफ चीखें थीं। कई लोग बाहर निकले हुए थे तो कई लोग इमारतों के नीचे दब गए। अधिकतर वे मकान गिरे, जो पुराने और जर्जर थे।

ढह गया पुश्तैनी मकान

story by a family returned back from nepal after earthquake

कमल का कहना है कि उनका पुश्तैनी मकान जलजले में ढह गया। पूरा घर का सामान नष्ट हो गया। न खाने-पीने की चीज बची, न यूज करने की। जेब में रुपये जरूर थे। कुछ मलबा हटाकर टेंट का बंदोबस्त किया गया। पूरी रात टेंट लगाकर सड़क पर गुजारी। रुपये से कुछ खाने-पीने की चीजें खरीदकर गुजारा किया।

सुबह होते ही निकल पड़े हिसार
परिवार के लोगों का कहना है कि भूकंप में जर्जर इमारतें ढह गईं। लोग नीचे दब गए। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए राहत अभियान चल पड़ा। मगर कोई भी सुरक्षित मकान में भी अंदर जाने के लिए तैयार नहीं था। सब लोग डरे हुए थे कि कहीं फिर से भूकंप न आ जाए। कमल व उसका परिवार भय के मारे सुबह होते ही वहां से भारत के लिए रवाना हो गए।

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