कोरोना : जिन राज्यों में 25 हजार से कम केस, उनमें सबसे ज्यादा मौतें चंडीगढ़ में
चंडीगढ़ में कोरोना के मामलों में लापरवाही महंगी पड़ रही है। कोरोना केसों के आंकड़े 100 से ऊपर चले जाते हैं तो कभी नीचे, लेकिन कोरोना से होने वाली मौतों की गति धीमी नहीं पड़ रही। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन राज्यों में 25 हजार से कम कोरोना के केस हैं, उनमें सबसे ज्यादा मौतें चंडीगढ़ में दर्ज की गई हैं।
29 नवंबर तक चंडीगढ़ में कोरोना के 17342 केस दर्ज किए गए, जबकि 276 लोगों की मौत हुई है। दूसरे नंबर पर मणिपुर है, जहां कोरोना के 24910 मामले और 273 लोगों की मौत दर्ज की गई है। इन दोनों ही शहरों के आंकड़ों में सबसे गंभीर बात यह है कि मणिपुर के मुकाबले चंडीगढ़ में कोरोना के करीब साढ़े सात हजार केस कम हैं, लेकिन मौतें ज्यादा। जबकि अमूमन होता यह है, जहां ज्यादा केस होते हैं, वहां ज्यादा मौत के आसार बनते हैं। ऐसे में चंडीगढ़ की स्थिति ठीक नहीं है।
क्यों नहीं रुक रहीं मौतें
चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कोरोना मृतकों में से 85 फीसदी सीनियर सिटीजन और वह लोग थे जो किसी अन्य बीमारी से पहले से पीड़ित थे। इस डाटा से साफ है कि कोरोना का सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं दोनों को है। ऐसी स्थिति में इन लोगों को ज्यादा एहतियात बरतने की आवश्यकता है लेकिन स्थिति उलट हो गई है।
चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. अमनदीप कंग ने बताया कि कोरोना से पीड़ित होने के बाद खासकर सीनियर सिटीजन अस्पताल में दाखिल नहीं होना चाहते। वह होम आइसोलेशन में रहना चाहते हैं। टीम उनके सामने मिन्नतें करती है, लेकिन वह अस्पताल नहीं आना चाहते। अब हम जबरदस्ती किसी को अस्पताल में दाखिल भी नहीं करवा सकती। जब ज्यादा स्थिति बिगड़ती है तब वह अस्पताल आते हैं, लेकिन इस दौरान बहुत कुछ हाथ से निकल चुका होता है।
ऐसे मरीजों की अचानक बिगड़ती है तबीयत
डॉ. कंग का कहना है कि देखने में आया है कि जिनमें खतरा ज्यादा है, उन कोरोना मरीजों की हालत अचानक से खराब होती है। लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिलता है। विभाग की ओर से होम आइसोलेशन के मरीजों को ऑक्सीमीटर मुहैया करवाए जाते हैं। साथ में हिदायत दी जाती है कि हर चार घंटे आक्सीजन का स्तर नापते रहें और उसका रिकार्ड रखें, लेकिन लोग इसमें भी लापरवाही बरत रहे हैं। ऑक्सीमीटर का स्तर जब 95 से नीचे आए तो उसकी जानकारी टीम को देना होता है, लेकिन 88 तक पहुंचने के बावजूद टीम को सूचित नहीं किया जाता।
चंडीगढ़ के अस्पतालों में खाली हैं 50 फीसदी बेड
लोग अस्पताल में आना नहीं चाहते, जबकि चंडीगढ़ प्रशासन के अस्पतालों में 50 फीसदी बेड खाली पड़े हैं। यह बेड इसीलिए खाली रखे गए हैं, ताकि कोरोना के उन मरीजों को दाखिल कराया जा सके, जो सीनियर सिटीजन के साथ दूसरी बीमारियों से भी पीड़ित रहे हैं। ऐसे में मरीजों के तीमारदारों को समझना चाहिए कि जब उनके घर में ऐसी स्थिति बने तो उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे। उसमें देरी बिल्कुल न करें।
राज्य/यूटी कुल केस मौतें
- चंडीगढ़ 17342 276
- मणिपुर 24910 273
- अरुणाचल प्रदेश 16269 54
- मेघालय 11740 111
- नागालैंड 11159 64
- लद्दाख 8403 116
मेरी चंडीगढ़वासियों से विनम्र अपील है कि उनके घर के किसी बुजुर्ग सदस्य को कोरोना के साथ कोई दूसरी बीमारी है तो उन्हें होम आइसोलेशन में रखने के बजाय अस्पताल में दाखिल करवाएं। अस्पताल में तीन से चार दिन उनकी स्थिति बेहतर रहती है तो उन्हें घर भेज दिया जाएगा।- डा. अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य विभाग चंडीगढ़
जब तक कोरोना के केस नहीं रुकते, तब तक मौतें भी नहीं रुकेंगी। पहली प्राथमिकता कोरोना को रोकना है। सीनियर सिटीजन को भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए। होम आइसोलेशन वाले मरीजों को ऑक्सीजन का स्तर समय-समय पर देखना चाहिए। यदि ऑक्सीजन का स्तर तय मानक से कम आता है तो अस्पताल पहुंचने में देर न करें।-प्रो. राजेश कुमार, पूर्व विभागाध्यक्ष स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई