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स्टार्टअप पॉलिसी तैयार, जल्द ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी करेगा प्रशासन
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चंडीगढ़। ऐसे कई बड़े स्टार्टअप हैं जो चंडीगढ़ से शुरू हुए लेकिन बाद में यह अन्य शहरों में शिफ्ट हो गए। इसका कारण रहा चंडीगढ़ में स्टार्टअप इकोसिस्टम की कमी। अब इस कमी को दूर करने के लिए प्रशासन ने अपनी स्टार्टअप नीति बनाई है जिसे अगले कुछ दिनों में जारी कर दिया जाएगा।
प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार स्टार्टअप नीति को पूरी तरह से लागू करने के लिए एक पैनल बनाया जाएगा। इसमें फंडिंग स्ट्रेटजी, कंपनी रजिस्ट्रेशन, बिजनेस मॉडल डेवलपमेंट, अकाउंटिंग और टैक्सेशन, लीगल और डिजिटल मार्केटिंग जैसे विषयों के विशेषज्ञ शामिल रहेंगे। विद्यार्थियों को इंसेंटिव दिया जाएगा और उद्यमियों के लिए को-वर्किंग स्पेस सेंटर भी खोले जाएंगे। इसमें प्रशासन पंजीकृत स्टार्टअप को दस लाख तक का कॉलेटरल फ्री लोन प्रदान कर सकता है। यह रकम पहले कुछ वर्षों के लिए ब्याज मुक्त होगी। इसके बाद बहुत कम दर पर ब्याज लगेगा। प्रशासन ने पहले तय किया था कि 31 मार्च तक नीति को बनाया जाएगा फिर दूसरी डेडलाइन 15 मई रखी गई। हालांकि इसमें देरी हुई है। उद्योग विभाग की सचिव हरगुनजीत कौर ने कहा है कि अब नीति पूरी तरह से तैयार है और एक दो दिन में इसकी ड्राफ्ट अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। पहले लोगों से सुझाव मांगे जाएंगे। सुझावों पर विचार करने और उन्हें शामिल करने के बाद नीति को लागू कर दिया जाएगा।
पहले केंद्र सरकार की स्टार्टअप नीति को लागू करने का हुआ था फैसला
छह साल पहले केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत की थी। पहले प्रशासन ने फैसला किया था कि वो केंद्र सरकार की नीति को ही चंडीगढ़ में लागू करेंगे। अधिकारियों में अध्ययन किया तो पता चला कि उसमें कई चीजें ऐसी हैं जिनमें चंडीगढ़ को देखते हुए परिवर्तन किए जाने की आवश्यकता है। इसलिए फैसला लिया गया कि प्रशासन अपनी खुद अलग नीति बनाएगा। इसके बाद वर्ष 2021 में काम शुरू हुआ लेकिन बहुत धीमी गति से। जनवरी 2022 में प्रशासन ने गंभीरता दिखाई और उद्योग विभाग को जिम्मेदारी सौंपी।
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प्रशासन ने नहीं बनाई नीति, फिर भी बढ़े स्टार्टअप
शहर में डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआई-आईटी) से पंजीकृत 263 स्टार्टअप चल रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा आईटी, हेल्थ केयर, एजुकेशन, फूड, एप्लीकेशन डेवलपमेंट, व्यावसायिक सहायता सेवाएं, आईटी परामर्श व अन्य क्षेत्र से जुड़े हैं। शहर में बड़े उद्योग भले पलायन कर रहे हैं लेकिन युवा उद्यमी चंडीगढ़ की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
हाल में जारी स्टार्टअप रैंकिंग में चंडीगढ़ बना है एस्पायरिंग लीडर
डीपीआई-आईटी ने बीते दिनों उन राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की सूची जारी की है जो स्टार्टअप शुरू करने के लिए सबसे बेहतर हैं। कम जनसंख्या वाले राज्य व यूटी की कैटेगरी में चंडीगढ़ को एस्पायरिंग लीडर की श्रेणी में डाला गया है। इस कैटेगरी में बेस्ट परफॉर्मर मेघालय, टॉप परफॉर्मर जम्मू और कश्मीर और लीडर अंडमान व निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश और गोवा को माना गया है।
सीआईआई के आंकड़ों के अनुसार
इन्क्यूबेशन सेंटर - 16
सरकारी सहायता प्राप्त स्टार्टअप - 89
वर्जन---
स्टार्टअप नीति को तैयार कर लिया गया है। अगले कुछ दिनों में इसे लोगों के सामने रखा जाएगा ताकि वे सुझाव दे सकें। नीति का मकसद है कि शहर में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा दिया जा सके। - हरगुनजीत कौर, सचिव, उद्योग विभाग
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प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार स्टार्टअप नीति को पूरी तरह से लागू करने के लिए एक पैनल बनाया जाएगा। इसमें फंडिंग स्ट्रेटजी, कंपनी रजिस्ट्रेशन, बिजनेस मॉडल डेवलपमेंट, अकाउंटिंग और टैक्सेशन, लीगल और डिजिटल मार्केटिंग जैसे विषयों के विशेषज्ञ शामिल रहेंगे। विद्यार्थियों को इंसेंटिव दिया जाएगा और उद्यमियों के लिए को-वर्किंग स्पेस सेंटर भी खोले जाएंगे। इसमें प्रशासन पंजीकृत स्टार्टअप को दस लाख तक का कॉलेटरल फ्री लोन प्रदान कर सकता है। यह रकम पहले कुछ वर्षों के लिए ब्याज मुक्त होगी। इसके बाद बहुत कम दर पर ब्याज लगेगा। प्रशासन ने पहले तय किया था कि 31 मार्च तक नीति को बनाया जाएगा फिर दूसरी डेडलाइन 15 मई रखी गई। हालांकि इसमें देरी हुई है। उद्योग विभाग की सचिव हरगुनजीत कौर ने कहा है कि अब नीति पूरी तरह से तैयार है और एक दो दिन में इसकी ड्राफ्ट अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। पहले लोगों से सुझाव मांगे जाएंगे। सुझावों पर विचार करने और उन्हें शामिल करने के बाद नीति को लागू कर दिया जाएगा।
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पहले केंद्र सरकार की स्टार्टअप नीति को लागू करने का हुआ था फैसला
छह साल पहले केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत की थी। पहले प्रशासन ने फैसला किया था कि वो केंद्र सरकार की नीति को ही चंडीगढ़ में लागू करेंगे। अधिकारियों में अध्ययन किया तो पता चला कि उसमें कई चीजें ऐसी हैं जिनमें चंडीगढ़ को देखते हुए परिवर्तन किए जाने की आवश्यकता है। इसलिए फैसला लिया गया कि प्रशासन अपनी खुद अलग नीति बनाएगा। इसके बाद वर्ष 2021 में काम शुरू हुआ लेकिन बहुत धीमी गति से। जनवरी 2022 में प्रशासन ने गंभीरता दिखाई और उद्योग विभाग को जिम्मेदारी सौंपी।
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प्रशासन ने नहीं बनाई नीति, फिर भी बढ़े स्टार्टअप
शहर में डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआई-आईटी) से पंजीकृत 263 स्टार्टअप चल रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा आईटी, हेल्थ केयर, एजुकेशन, फूड, एप्लीकेशन डेवलपमेंट, व्यावसायिक सहायता सेवाएं, आईटी परामर्श व अन्य क्षेत्र से जुड़े हैं। शहर में बड़े उद्योग भले पलायन कर रहे हैं लेकिन युवा उद्यमी चंडीगढ़ की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
हाल में जारी स्टार्टअप रैंकिंग में चंडीगढ़ बना है एस्पायरिंग लीडर
डीपीआई-आईटी ने बीते दिनों उन राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की सूची जारी की है जो स्टार्टअप शुरू करने के लिए सबसे बेहतर हैं। कम जनसंख्या वाले राज्य व यूटी की कैटेगरी में चंडीगढ़ को एस्पायरिंग लीडर की श्रेणी में डाला गया है। इस कैटेगरी में बेस्ट परफॉर्मर मेघालय, टॉप परफॉर्मर जम्मू और कश्मीर और लीडर अंडमान व निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश और गोवा को माना गया है।
सीआईआई के आंकड़ों के अनुसार
इन्क्यूबेशन सेंटर - 16
सरकारी सहायता प्राप्त स्टार्टअप - 89
वर्जन---
स्टार्टअप नीति को तैयार कर लिया गया है। अगले कुछ दिनों में इसे लोगों के सामने रखा जाएगा ताकि वे सुझाव दे सकें। नीति का मकसद है कि शहर में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा दिया जा सके। - हरगुनजीत कौर, सचिव, उद्योग विभाग