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Chandigarh: ठंडे बस्ते में चंडीगढ़ प्रशासन की स्टार्टअप नीति, 31 मार्च तक होनी थी तैयार, ड्राफ्ट भी जारी नहीं

Sat, 27 Aug 2022 01:16 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 27 Aug 2022 01:16 PM IST
सार

स्टार्ट अप नीति लागू होने से प्रशासन पंजीकृत स्टार्टअप को दस लाख तक का कॉलेटरल फ्री लोन प्रदान करने, विद्यार्थियों को इंसेंटिव देने, उद्यमियों के लिए को-वर्किंग स्पेस मुहैया कराने, फंडिंग स्ट्रेटजी, कंपनी रजिस्ट्रेशन, बिजनेस मॉडल डेवलपमेंट, अकाउंटिंग और टैक्सेशन, लीगल और डिजिटल मार्केटिंग जैसे विषयों में भी प्रशासन की तरफ से मदद मिलती।

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Startup Policy is not made yet by Chandigarh Administration
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विस्तार

देश में ऐसे कई बड़े स्टार्टअप हैं, जो चंडीगढ़ से शुरू हुए लेकिन बाद में अन्य शहरों में शिफ्ट हो गए। कारण है कि चंडीगढ़ में स्टार्टअप ईको सिस्टम की कमी। इस कमी को दूर करने के लिए प्रशासन ने स्टार्टअप नीति पर काम शुरू किया, लेकिन कई महीने बाद भी उसका ड्राफ्ट जारी नहीं हो पाया है।

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प्रशासन ने पहले तय किया था कि 31 मार्च तक नीति तैयार हो जाएगी, फिर दूसरी डेडलाइन 15 मई रखी गई लेकिन अब अगस्त का महीना भी बीतने को है। शहर की अपनी स्टार्टअप नीति पर वर्ष 2021 में काम शुरू हुआ था। जनवरी 2022 में प्रशासन ने गंभीरता दिखाई और उद्योग विभाग को जिम्मेदारी सौंपी। सचिव हरगुनजीत कौर ने उद्योगपतियों, उद्यमियों, व्यापारियों के साथ कई बैठकें कीं और नीति का ड्राफ्ट तैयार किया। 
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उन्होंने जुलाई में ही ड्राफ्ट नीति को जारी करने की बात कही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगर नीति को शहर में लागू किया जाता तो युवा उद्यमियों को काफी लाभ पहुंचता। नीति में प्रशासन पंजीकृत स्टार्टअप को दस लाख तक का कॉलेटरल फ्री लोन प्रदान करने, विद्यार्थियों को इंसेंटिव देने, उद्यमियों के लिए को-वर्किंग स्पेस मुहैया कराने, फंडिंग स्ट्रेटजी, कंपनी रजिस्ट्रेशन, बिजनेस मॉडल डेवलपमेंट, अकाउंटिंग और टैक्सेशन, लीगल और डिजिटल मार्केटिंग जैसे विषयों में भी प्रशासन की तरफ से मदद मिलती। इस देरी की वजह से लगातार युवा टैलेंट बाहर जा रहा है और वह अन्य राज्यों में जाकर अपना काम शुरू कर रहे हैं।

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नीति नहीं, फिर भी अपने दम पर बढ़े स्टार्टअप

शहर में डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआई-आईटी) से पंजीकृत 268 स्टार्टअप चल रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा आईटी, हेल्थ केयर, एजुकेशन, फूड, एप्लीकेशन डेवलपमेंट, व्यावसायिक सहायता सेवाएं, आईटी परामर्श व अन्य क्षेत्र से जुड़े हैं। शहर में बड़े उद्योग भले पलायन कर रहे हैं लेकिन युवा उद्यमी चंडीगढ़ की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

स्टार्टअप रैंकिंग में पिछड़े, लीडर से एस्पायरिंग लीडर की कैटेगरी में पहुंचे

केंद्र सरकार ने 4 जुलाई को स्टार्टअप इंडिया की रैंकिंग जारी की। कम जनसंख्या वाले राज्य व यूटी की कैटेगरी में चंडीगढ़ पहले लीडर की कैटेगरी में था, लेकिन नई रैंकिंग में चंडीगढ़ एक पायदान नीचे आ गया। इस रैंकिंग में शहर को एस्पायरिंग लीडर की श्रेणी में डाला गया। रैंकिंग में गुजरात, मेघालय और कर्नाटक जैसे राज्य सबसे आगे हैं। 21 जुलाई को केंद्र सरकार ने इंडिया इनोवेशन इंडेक्स जारी किया। इसमें ओवरऑल चंडीगढ़ ने टॉप किया, लेकिन बिजनेस एनवायरमेंट के इंडेक्स में इज ऑफ डूइंग बिजनेस और कॉमन फैसिलिटी सेंटर का स्कोर शून्य रहा। वहीं, व्यापार सुधार कार्य योजना (बीआरएपी) 2020 के कार्यान्वयन के आधार पर केंद्र सरकार ने 30 जून को एक सूची जारी की थी। इसके अनुसार उभरते हुए बिजनेस इकोसिस्टम की श्रेणी में चंडीगढ़ बिहार से भी पीछे है।
 

स्टार्टअप नीति पर हमने काफी विस्तार से चर्चा की है। नीति का ड्राफ्ट लगभग तैयार हो गया है। एक प्रेजेंटेशन किया जाना बाकी है। उद्योग विभाग की तरफ से जब भी समय मांगा जाएगा, वो तैयार हैं और उसके बाद लोगों से सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे।  - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक

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