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श्री दरबार साहिब में महिलाओं को मिले कीर्तन की अनुमति, विधानसभा में प्रस्ताव पारित

Fri, 08 Nov 2019 01:19 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 08 Nov 2019 01:19 AM IST
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Special session of punjab assembly, Passed many resolutions
आम आदमी पार्टी के विधायक। - फोटो : अमर उजाला

पंजाब सरकार ने गुरुवार को विधानसभा में प्रस्ताव पेश करके श्री अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को सचखंड श्री दरबार साहिब में सिख महिलाओं को कीर्तन की सेवा निभाने की इजाजत देने की अपील की।

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इस प्रस्ताव को सभी पक्षों ने सर्वसम्मति से पास कर दिया। हालांकि, इससे पहले प्रस्ताव पर अकाली दल की ओर से ऐतराज जताते हुए, इसे धार्मिक मामलों में सरकार का दखल करार दिया गया। बाद में अकाली दल के सदस्यों ने भी प्रस्ताव पर सहमति जता दी। 
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अब यह प्रस्ताव औपचारिक तौर पर श्री अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि कमेटी को भेजा जाएगा। ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने सदन में यह प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य वाणी सिद्धांत विरोधी इस प्रथा को खत्म करना है, क्योंकि इससे धार्मिक मामलों में पुरुष-स्त्री के आधार पर भेदभाव पैदा होता है। 
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श्री गुरु नानक देव जी ने समूचे जीवन के दौरान जात-पात/पुरुष-स्त्री के आधार पर भेदभाव का डटकर विरोध किया और अधिकारों के लोकतांत्रिक आधार पर समानता वाले समाज को प्रफुल्लित करने का संदेश दिया।

सिख महिलाओं को कीर्तन की सेवा निभाने की आज्ञा न देने पर दुख जाहिर करते हुए बाजवा ने कहा कि सिख इतिहास में महिलाओं के साथ भेदभाव की कहीं भी कोई मिसाल नहीं मिलती।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए आप विधायक कुलतार सिंह संधवां ने सरकार द्वारा लाए प्रस्ताव पर सवाल उठाने के लिए अकाली नेताओं की आलोचना की। आप विधायक ने कहा कि हम बाबा नानक को तो मानते हैं लेकिन उनकी बात को नहीं मानते। 

शिअद ने पहले विरोध फिर किया समर्थन
अकाली दल के विधायक दल के नेता परमिंदर ढींडसा ने विरोध करते हुए कहा कि एसजीपीसी व श्री अकाल तख्त सिख कौम की अगुवाई करते हैं और यह भावना तो वहां पहुंच जाएगी लेकिन सदन में ऐसा प्रस्ताव लाते हुए सरकार जानबूझ कर गलत तरीका अपना रही है। इस मुद्दे पर यहां बात करना कोई अच्छी बात नहीं है। 

तृप्त बाजवा ने जवाब में कहा कि वे श्री अकाल तख्त साहिब का सत्कार करते हैं और उसे चैलेंज नहीं कर रहे। इस प्रस्ताव के जरिए हम एसजीपीसी को निवेदन कर रहे हैं। एसजीपीसी द्वारा इसे मानना या नहीं मानना, उनकी मर्जी है। कैबिनेट मंत्री चरनजीत चन्नी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मैं अकाली दल विधायक से कहूंगा कि इसे कानूनी प्रक्रिया में न उलझाएं। यह गुरु की बात हो रही है। 

इस पर ढींडसा ने पूछा कि क्या यह सरकार का प्रस्ताव है? चन्नी ने कहा कि श्री अकाल तख्त और एसजीपीसी द्वारा समय की जरूरत के हिसाब से बदलाव किए गए हैं इसलिए यह बात भी रखी गई है। अकाली दल के सदस्यों ने प्रस्ताव में इस्तेमाल की गई भाषा पर ऐतराज जताया लेकिन बाद में इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति जता दी।

सलाहकार बने छह विधायक हुए लाभ के पद के दायरे से बाहर

पंजाब विधानसभा ने विपक्ष के विरोध के बीच गुरुवार को पंजाब राज्य विधान मंडल (अयोग्यता पर रोक) संशोधन बिल-2019 को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री के सलाहकार नियुक्त किए गए छह कांग्रेस विधायकों को लाभ के पद के तहत अयोग्य ठहराए जाने का खतरा भी टल गया।

गुरुवार को सदन में दो अन्य संशोधन विधेयकों- दी पंजाब रेगुलेशन ऑफ फी ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (संशोधन) बिल-2019 और दी पंजाब स्टेट कमीशन फार शेड्यूल कास्ट (संशोधन) बिल-2019 को भी मंजूरी दे दी। 

सदन में सरकार की ओर से तीन बिल पेश किए गए। इनमें दी पंजाब स्टेट लेजिसलेचर (प्रिवेंशन आफ डिसक्वालीफिकेशन) संशोधन बिल-2019 अंतिम बिल था, जिस पर बहस में हिस्सा लेते हुए आम आदमी पार्टी, अकाली दल और लोक इंसाफ पार्टी के सदस्यों ने बिल का कड़ा विरोध किया।

आम आदमी पार्टी ने किया वाकआउट
बिल के खिलाफ आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने सदन से वाकआउट कर दिया। आप विधायक कुलतार सिंह ने बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि एक तरफ तो सरकार के पास कर्मचारियों को डीए और अन्य बकाया भत्ते देने के लिए पैसा नहीं है, वहीं इस बिल के जरिए सरकार अपने विधायकों को रेवड़ियां की तरह मंत्री पद बांट रही है। 

उन्होंने कहा कि यह बिल मुख्यमंत्री के सलाहकार बनाए गए विधायकों को अयोग्यता से बचाने के लिए लाया गया है, जिसका आम आदमी पार्टी विरोध करती है। इसके बाद सभी आप सदस्यों ने खड़े होकर बिल वापस लिए जाने की मांग की, जिसे अस्वीकार होता देख आप सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी और वेल में आ गए। उन्होंने स्पीकर के सामने कुछ देर तक सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और उसके बाद सदन से वाकआउट कर गए।

अकाली दल ने बिल को गैरकानूनी करार दिया
अकाली दल के विधायक परमिदंर सिंह ढींढसा ने बहस के हिस्सा लेते हुए कहा कि यह बिल सरकारी खजाने की खुली लूट है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता से किए वादे पूरे नहीं कर रही, उलटे अपने विधायकों की सुविधाओं में इजाफा करने के उपाय कर रही है। उन्होंने कहा कि कानूनी तौर पर यह संशोधन बिल सही नहीं है।

इससे पहले मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति को नियमित करने के लिए भी इस एक्ट के सब-सेक्शन एफ में संशोधन करने की कोशिश की गई थी, जिसे अदालत द्वारा रद्द किया जा चुका है। उन्होने कहा कि यह संशोधन भी न्यायिक जांच के आगे टिक नही पाएगा।

सरकार पहले वादे पूरे करे, फिर लाए बिल: बैंस
लोक इंसाफ पार्टी के सिमरजीत सिंह बैंस ने कहा कि प्रदेश सरकार पर ढाई लाख करोड़ का कर्ज है। सरकार ने किसानों से कर्ज माफी का वादा किया था, जो अब तक पूरा नहीं हो सका और किसान व खेत मजदूर आए दिन आत्महत्याएं कर रहे हैं।

बेरोजगारी भत्ता, बुढ़ापा पेंशन में बढ़ोतरी, शगुन स्कीम में बढ़ोतरी, मुफ्त स्मार्टफोन के वादे आज तक पूरे नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास पहले ही ओएसडीज की फौज है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले जनता के किए वादे पूरे करे, उसके बाद यह बिल लाया जाए।

पंजाब एससी कमीशन के चेयरपर्सन की उम्र अब 72 साल

पंजाब विधानसभा ने पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग (संशोधन) ऑर्डिनेंस-2019 और पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2019 को पारित कर दिया।

पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग (संशोधन) ऑर्डिनेंस-2019 के पारित होने के साथ ही अब राज्य एससी आयोग में चेयरपर्सन की नियुक्ति के लिए उम्र सीमा (मौजूदा 70 साल से) बढ़कर 72 साल हो गई है। 

सरकार का दावा है कि राज्य में अनुसूचित जाति के लोगों के हितों की रक्षा के लिए कानून को असरदार तरीके से लागू कराने के उद्देश्य से अधिक तजुर्बेकार चेयरपर्सन को लाने में मदद मिलेगी। संशोधन बिल में कहा गया कि 2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 88.60 फीसदी है जो कुल आबादी (277.43 लाख) का 31.94 फीसदी है।

जनसंख्या का यह प्रतिशत देश के किसी भी राज्य के मुकाबले अधिक है। सदन में बिल पेश किए जाने के बाद विपक्षी सदस्यों ने इस पर ऐतराज दर्ज कराए, लेकिन यह बिल ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

इसके अलावा, सदन ने अनऐडड शैक्षिक संस्थानों में फीस वृद्धि संबंधी बिल- पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2019 को भी मंजूरी दे दी। सरकार का दावा है कि इस बिल के पारित होने से राज्य में गैर सहायता प्राप्त शैक्षिक संस्थाओं में फीस को नियमित करने की विधि उपलब्ध हो गई है। 

यह संशोधन गैर सहायता प्राप्त शैक्षिक संस्थाओं में उन बच्चों को राहत देगा, जिनके परिवार के कमाऊ सदस्य की मौत के कारण फीस की अदायगी नहीं हो सकती। ऐसे बच्चे इन शैक्षिक संस्थाओं में अपनी पढ़ाई पूरी होने तक बिना फीस दिए पढ़ाई कर सकेंगे।

इसी तरह गैर सहायता प्राप्त शैक्षिक संस्थाओं में चल रही वर्दियों /किताबों संबंधी खरीद-फरोख्त में मनमर्जी रोकने के लिए भी इस एक्ट में अपेक्षित संशोधन का प्रावधान किया गया है। एक्ट के सेक्शन 5 में किए गए संशोधन के अनुसार, अनएडेड शैक्षिक संस्थान आठ फीसदी से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। यह बढ़त बीते साल की फीस का आठ फीसदी होगी। 

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