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रिपोर्टः करियर की चिंता में कमजोर हो रही युवाओं की याददाश्त, 10 में से 6 मनोरोग के शिकार
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 20 Sep 2018 01:23 PM IST
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करियर की चिंता और अनिश्चितता का भय युवाओं की याददाश्त को कमजोर कर रहा है। इस चिंता में अधिकांश युवा मनोरोगों के शिकार हो रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों के पास आने वाले हर 10 में से 6 युवा इन्हीं वजहों से एक खास तरह के मनोरोग की जद में आ रहे हैं। यह खुलासा हरियाणा के मनोविशेषज्ञों की एक रिपोर्ट में हुआ है।
इस रिपोर्ट को हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान में आयोजित दो दिवसीय नेशनल वर्कशॉप में पेश किया गया था। इस वर्कशॉप को इंडियन अकादमी ऑफ हेल्थ साइकोलॉजी और डिपार्टमेंट ऑफ लाइफ लांग लर्निंग के सौजन्य से आयोजित किया गया था।
इस नेशनल वर्कशॉप में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़, राजस्थान समेत अन्य राज्यों के 150 से अधिक मनोवैज्ञानिकों ने इस विषय पर मंथन किया।हरियाणा की ओर से प्रतिनिधित्व करने वाले मनोवैज्ञानिक डॉ. कुलदीप सिंह ने सेमीनार में कहा कि कॅरियर की चिंता में युवा सामान्यीकृत चिंता रोग (जीएडी) जनरलाइज्ड एंगजाइटी डिसऑर्डर, और (ओसीडी) ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर का शिकार हो रहे हैं।
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इस रिपोर्ट पर विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञों ने भी मुहर लगाई। विशेषज्ञों का कहना था कि अन्य राज्यों के युवा भी इन्हीं मनोरोगों की जद में आ रहे हैं। इससे उनकी याददाश्त कम होने के साथ ही कई अन्य शारीरिक विकारों का खतरा पैदा हो रहा है।
‘ओसीडी की बीमारी में युवा एवं छात्रों को अज्ञात भय सताने लगता है। यह डिसआर्डर एक चिंता और वहम की बीमारी है। इससे ग्रस्त युवा किसी एक बात को बार-बार सोचता रहता है या फिर किसी एक काम को बार-बार करता रहता है, जब तक कि उसके मन को चैन नहीं मिल जाता।’
- डॉ. कुलदीप सिंह, मनोवैज्ञानिक
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इस रिपोर्ट को हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान में आयोजित दो दिवसीय नेशनल वर्कशॉप में पेश किया गया था। इस वर्कशॉप को इंडियन अकादमी ऑफ हेल्थ साइकोलॉजी और डिपार्टमेंट ऑफ लाइफ लांग लर्निंग के सौजन्य से आयोजित किया गया था।
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इस नेशनल वर्कशॉप में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़, राजस्थान समेत अन्य राज्यों के 150 से अधिक मनोवैज्ञानिकों ने इस विषय पर मंथन किया।हरियाणा की ओर से प्रतिनिधित्व करने वाले मनोवैज्ञानिक डॉ. कुलदीप सिंह ने सेमीनार में कहा कि कॅरियर की चिंता में युवा सामान्यीकृत चिंता रोग (जीएडी) जनरलाइज्ड एंगजाइटी डिसऑर्डर, और (ओसीडी) ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर का शिकार हो रहे हैं।
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इस रिपोर्ट पर विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञों ने भी मुहर लगाई। विशेषज्ञों का कहना था कि अन्य राज्यों के युवा भी इन्हीं मनोरोगों की जद में आ रहे हैं। इससे उनकी याददाश्त कम होने के साथ ही कई अन्य शारीरिक विकारों का खतरा पैदा हो रहा है।
‘ओसीडी की बीमारी में युवा एवं छात्रों को अज्ञात भय सताने लगता है। यह डिसआर्डर एक चिंता और वहम की बीमारी है। इससे ग्रस्त युवा किसी एक बात को बार-बार सोचता रहता है या फिर किसी एक काम को बार-बार करता रहता है, जब तक कि उसके मन को चैन नहीं मिल जाता।’
- डॉ. कुलदीप सिंह, मनोवैज्ञानिक