{"_id":"2caa0c024375ccd3a5304079ba55d92c","slug":"special-court-room-for-child-victim-in-chandigarh-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब खेलते-खेलते अपने बयान दे सकेंगे बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब खेलते-खेलते अपने बयान दे सकेंगे बच्चे
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 05 Feb 2016 09:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़ में किसी भी तरह के आपराधिक मामले में पीड़ित बच्चे (नाबालिग) के बयान अब खुली कोर्ट में दर्ज नहीं होंगे। उसके बयान चाइल्ड विटनेस कोर्ट रूम (सीडब्ल्यूसीआर) में दर्ज होंगे। ये बयान वीडियो कांफ्रेंसिंग से दर्ज किए जाएंगे।
विज्ञापन
अपने आप में खास तरह के इस कोर्ट रूम का वीरवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एसजे वजीफदार ने उद्घाटन किया। बता दें कि देशभर में सिर्फ चुनिंदा शहरों में ही चाइल्ड विटनेस कोर्ट रूम हैं। दिल्ली के बाद उत्तर भारत में चंडीगढ़ दूसरी जगह है जहां यह कोर्ट रूम बना है।
विज्ञापन
वीरवार को शाम पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस वजीफदार जिला अदालत पहुंचे। यहां उन्होंने चाइल्ड विटनेस कोर्ट रूम का उद्घाटन किया। इस मौके पर उनके साथ जस्टिस राजीव भल्ला, जस्टिस टीपीएस मान, सेशन जज एसके अग्रवाल सहित जिला अदालत के सभी एडीजे और सिविल जज मौजूद रहे।
विज्ञापन
चीफ जस्टिस वजीफदार ने सीडब्ल्यूसीआर का निरीक्षण किया। वहीं जस्टिस टीपीएस मान ने कोर्ट रूम में कैसे किसी केस की सुनवाई होगी, इसका ट्रायल भी लिया। इसका चीफ जस्टिस ने निरीक्षण किया और सेशन जज को कुछ सुझाव भी दिए।
दिल्ली में बना था देश का पहला सीडब्ल्यूसीआर
देश में पहली बार चाइल्ड विटनेस कोर्ट रूम दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली हाईकोर्ट के दो जजों की देखरेख में एक कमेटी गठित की गई थी। इसकी देखरेख में इसे बनाया गया था। 16 सितंबर 2012 को देश में पहले चाइल्ड विटनेस कोर्ट रूम का उद्घाटन किया गया था।
आरोपी से नहीं होगा आमना-सामना
चाइल्ड विटनेस कोर्ट रूम की बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें पीड़ित बच्चे का आरोपी से आमना-सामना नहीं होगा। वह खुलकर बयान दर्ज करा सकेगा। बच्चे के बयान भी आरोपी के सामने नहीं होंगे। हालांकि आरोपी बच्चे को देख सकेगा और उसके बयान भी सुन सकेगा। ये सब स्पेशल कोर्ट रूम में ही होंगे। इसमें तीन कमरे होंगे।
एक में आरोपी को बैठाया जाएगा, जबकि एक में जज और वकील होंगे। वहीं तीसरे कमरे में पीड़ित बच्चा होगा, जो कि टीवी स्क्रीन के जरिये जज के सामने बयान दर्ज कराएगा। पूरी प्रक्रिया को आरोपी देख सकेगा, हालांकि केवल एक बार आरोपी की पहचान बच्चे से करवाई जाएगी।
चाइल्ड फ्रेंडली होगा माहौल
सीडब्ल्यूसीआर में चाइल्ड फ्रेंडली प्ले एरिया बनाया गया है। यहां पीड़ित बच्चा बैठेगा। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि पीड़ित आने के बाद वह घबराए नहीं। साथ ही इसकी दीवारें कलरफुल हैं, ताकि बच्चे को माकूल माहौल मिले और उसे यह घर या स्कूल जैसा लगे।
इसके अलावा यहां बच्चों के खेलने का सामान, खिलौने और एक छोटी से पैंट्री भी होगी। इसमें बच्चे के खाने के लिए सामान रखा जाएगा। वहीं कोर्ट का भी प्रयास होगा कि बच्चे को ऐसा माहौल फील कराया जाए, जिससे उसका डर निकल सके और वह बातों-बातों में बयान दे सके।
अलग से होगी एंट्री
इस कोर्ट रूम में बच्चे की एंट्री अलग से होगी। इस रास्ते किसी और की एंट्री नहीं होगी। साथ ही बयान दर्ज होने के बाद इसी रास्ते से बच्चे को बाहर ले जाया जाएगा। इस दौरान इस बात का खास ख्याल रखा जाएगा कि बच्चे का आमना-सामना आरोपी से न हो। बच्चे के साथ उसके परिजन भी मौजूद होंगे। ताकि वह सहज महसूस कर सकें। वहीं इस कोर्ट रूम में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के बयान दर्ज किए जाएंगे।