मातृ दिवस: मेरी मां सुपर मॉम... शहर की सुरक्षा और लोगों के पेट का भी रखती हैं ध्यान
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मेरी...एसएसपी साहिबा मां सुपर मॉम भी हैं। आपको पता है.. शहर की सुरक्षा के साथ-साथ लोगों के पेट का भी ध्यान रखती हैं लेकिन कभी-कभी लगता है ड्यूटी के चक्कर में कुछ ज्यादा ही मुझसे दूरी बना लेती हैं...। यह कहना है एसएसपी नीलांबरी जगदले की साढ़े 5 वर्षीय बेटी नित्या का। मदर्स डे के विशेष मौके पर अमर उजाला संवाददाता ने चंडीगढ़ की एसएसपी और उनकी बेटी नित्या से बातचीत की।
कोरोना वायरस से लड़ने में डॉक्टरों के बाद पुलिस एक अहम रोल निभा रही है। एसएसपी नीलांबरी विजय जगदले यह जिम्मा बखूबी निभा रही है। वह रोजाना जरूरतमंदों तक खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान पहुंचा रही हैं ताकि उनका पेट भरा जा सके। वहीं, उनके पास शहर की सुरक्षा की भी जिम्मेदारी है। 24 घंटे सातों दिन की ड्यूटी देखकर नित्या कहती हैं कि उनकी मॉम की ड्यूटी इतनी ज्यादा है कि उनके लिए कभी पूरा समय ही नहीं दे पाती। ऐसा कब तक चलेगा, कुछ नहीं पता। मैं तो घर पर बिना मॉम के अकेले रहते हुए उदास हो जाती हूं।
रोज-रोज ऑफिस क्यों जाना
नित्या यूकेजी में पढ़ती हैं। सुबह जब अपनी मॉम को ड्यूटी पर जाते नित्या देखती हैं तो कभी-कभी कहती हैं कि जब मेरे स्कूल की छुट्टी है तो आप क्यों ऑफिस जा रहे हो। आज आप छुट्टी कर लो... ऑफिस मत जाओ घर पर ही रहो लेकिन ड्यूटी का फर्ज निभाने के लिए सुपरमॉम को ऑफिस जाना ही पड़ता है।
फोन पर होती रहती है बात
कभी-कभी नित्या घर पर अकेली रह जाती हैं। फिर वह थोड़ी थोड़ी देर पर मां को फोन करती हैं। दिन भर में उनके करीब 15 से 20 फोन आ जाते हैं। रोजाना शाम को याद दिलाती है कि मां आज मेरे लिए कैंडी या फिर कोई चॉकलेट ले आना। कई बार होता है कि अगर उसके लिए कुछ ले नहीं ले पाती तो कहती है कि मम्मा कोई बात नहीं.. आप मेरे लिए कल लेकर जरूर आना।
मम्मा मैं भी पुलिस ऑफिसर बनूंगी
एसएसपी ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से बचाने को लेकर इस दौरान ज्यादातर मुलाजिमों की ड्यूटी लग रही है। उनका हौसला अफजाई करने के लिए मुझे भी फील्ड में जाना पड़ता है। जरूरत से ज्यादा ड्यूटी पर जाने से कभी-कभी नित्या कहती है कि मम्मा आप शहर की सुरक्षा के साथ-साथ लोगों का पेट भी भरती हो। अब मैं भी आप जैसा पुलिस ऑफिसर बनूंगी।