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कारगिल विजय दिवस: सरहद तक सड़क, हर चप्पे पर निगहबानी... धूल में मिला देंगे गर घुसपैठ की ठानी

Wed, 26 Jul 2023 01:10 AM IST
ajay kumar परीक्षित सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
परीक्षित सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 26 Jul 2023 01:10 AM IST
सार

कारगिल युद्ध को आज (बुधवार) 24 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर अमर उजाला ने जाट रेजिमेंट से सेवानिवृत्त वीरचक्र विजेता ब्रिगेडियर बलजीत सिंह गिल से खास बातचीत की।

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Special Conversation with Brigadier Baljit Singh Gill on Kargil Vijay Diwas
सेवानिवृत्त वीरचक्र विजेता ब्रिगेडियर बलजीत सिंह गिल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कारगिल युद्ध को आज (बुधवार) 24 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस युद्ध में देश के वीर सैनिकों अदम्य साहस दिखाते हुए दुश्मनों को वापस पाकिस्तान खदेड़ दिया था। भारतीय सेना के साहस और शौर्य की कहानियों के बीच देश की सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था में दो दशक में कितना बदलाव आया है और अब हम इस तरह की चुनौती से निपटने के लिए कितने तैयार हैं। इन सब बातों को लेकर जाट रेजिमेंट से सेवानिवृत्त वीरचक्र विजेता ब्रिगेडियर बलजीत सिंह गिल से खास बातचीत।

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सवाल: कारगिल से भारत ने क्या सीखा, दो दशक बाद आज देश की सरहद कितनी सुरक्षित है?  
जवाब: कारगिल युद्ध के 24 साल बाद आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। भारतीय सेना 1999 के कारगिल से सबक लेते हुए अब पूरी तरह से मुस्तैद है। भारत की सीमा में पाकिस्तानी अब पहले की तरह घुसपैठ नहीं कर सकते। 1999 की तरह अब कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ और युद्ध की आशंका बिल्कुल भी नहीं है। पाकिस्तानी जहां से घुसपैठ करते थे, उन रास्तों को ढूंढा जा चुका है। कारगिल के उन इलाकों में सेना की तैनाती तीन गुना बढ़ चुकी है। सर्दी के मौसम में अब पोस्ट को खाली नहीं छोड़ा जाता। पोस्ट पर सुरक्षा चाक चौबंद है।    
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सवाल: सरहद पर सेना की ओर से क्या खास इंतजाम किए गए हैं? 
जवाब: कारगिल के इलाकों में बुनियादी ढांचे को दुरुस्त किया गया है। इलाके में निगरानी केंद्र बनाए जाने के साथ ही सड़कों का निर्माण किया गया है। वायुसेना की ताकत को मजबूत करने के लिए लाइन ऑफ कंट्रोल पर कई हेलीपैड बनाए जा चुके हैं। सेना ने वहां आयुद्ध केंद्र बना दिए हैं और बड़े पैमाने पर युद्ध सामग्री रखी है, जिसे देख पाकिस्तान कभी घुसपैठ का साहस नहीं कर सकता।  

सवाल: आखिर 1999 में पाकिस्तानी घुसपैठ की वजह क्या थी?  
जवाब: एलओसी के पास जोजिला से सियाचीन तक सामग्री और सैनिकों की तैनाती के लिए यह सेक्टर काफी महत्वपूर्ण है लेकिन घुसपैठ के वक्त कश्मीर घाटी में उग्रवाद अधिक ध्यान खींच रहा था। कारगिल में भारतीय सेना का एक ही स्वतंत्र ब्रिगेड ग्रुप था। इसमें तीन यूनिटों में करीब 4000 से 4500 सैनिक तैनात होते हैं। यहां कई गुना ज्यादा सैनिकों की तैनाती की जरूरत थी लेकिन तब इसे नहीं समझा गया था। अब इन कमियों को पूरी तरह से दुरुस्त कर दिया गया है। ऐसे में कारगिल में अब घुसपैठ संभव नहीं।

सवाल: कारगिल में जीत की रणनीति क्या थी ? 
जवाब: संचालन की विस्तृत योजना और निष्पादन के साथ कमांडिंग अधिकारियों को दुश्मन की तैनाती के बारे में विस्तृत जानकारी और योजना बनाने समेत ऑपरेशन को निष्पादित करने की स्वतंत्रता दी गई। इन कार्यों को अंजाम देने के लिए इसी तरह रणनीति तैयार की गई कि दुश्मन भयभीत और अचंभित हो गए। यह सुनिश्चित किया गया कि दुश्मन का ध्यान हमले की वास्तविक दिशा से हट जाए। यही रणनीति कारगिल में भारत को जीत की ओर ले गई। 

सवाल: आर्टिलरी का कारगिल युद्ध में क्या योगदान रहा? 
जवाब: इस युद्ध में तोपखाने ने एक प्रमुख भूमिका निभाई और लक्ष्यों को भेदने में इसका अधिकतम उपयोग किया गया। प्रत्यक्ष गोलीबारी की भूमिका में भी बोफोर्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। 

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