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मुक्केबाज अमित पंघाल से विशेष बातचीत, बोले-मुक्के की स्पीड, पावर और रीच बढ़ाने का लक्ष्य

Sat, 16 Nov 2019 01:38 PM IST
ajay kumar भूपेंद्र आट्टा, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
भूपेंद्र आट्टा, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Sat, 16 Nov 2019 01:38 PM IST
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Special conversation with boxer Amit Panghal
अमित पंघाल (फाइल फोटो) - फोटो : social media

मुक्के की स्पीड, पावर और खिलाड़ी तक रीच (पहुंचना) बढ़ाना मेरा लक्ष्य है। ओलंपिक में जाने के लिए एशियाई क्वालिफायर राउंड में रूस और उज्बेकिस्तान के खिलाड़ियों के साथ टक्कर रहेगी, जिसके लिए मैं वहां के खिलाड़ियों की बाउट देखकर उनकी तकनीक को बारीकी से समझ रहा हूं। यह बात विश्व चैंपियनशिप में भारत को मेडल दिलाकर इतिहास रचने वाले मुक्केबाज अमित पंघाल ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान कही।

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लंदन में हरियाणा गौरव अवॉर्ड से सम्मानित होकर मायना गांव निवासी मुक्केबाज अमित पंघाल गुरुवार रात अपने घर पहुंचे। उन्होंने करीब दो माह बाद गांव में घर वालों के साथ फुर्सत के कुछ पल बिताए। अमित ने शुक्रवार को पूरा दिन घर वालों के साथ व्यतीत किया। इसी बीच उन्होंने अपनी आगामी तैयारियों को लेकर अमर उजाला संवाददाता से भी विशेष बातचीत की। 
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इसमें उन्होंने बताया कि रविवार को वह फरवरी में होने वाली ओलंपिक क्वालिफायर टूर्नामेंट की तैयारी करने के लिए बैंगलोर कैंप में जा रहे है। जहां रहकर क्वालिफायर राउंड होने तक तैयारी करेंगे। अमित ने बताया कि उनका मुख्य लक्ष्य मुक्के की स्पीड बढ़ाना, मुक्के में पावर बढ़ाना और खिलाड़ी तक रीच बढ़ाना है। 

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अमित पंघाल से बातचीत के कुछ अंक 

Special conversation with boxer Amit Panghal
फाइल फोटो - फोटो : social media

सवाल : टोक्यो ओलंपिक से पहले एशियाई क्वालिफायर राउंड है, जोकि फरवरी में होना है, उसके लिए क्या तैयारियां हैं?

जवाब : एशियाई क्वालिफायर राउंड में मेरे सामने रूस और उज्बेकिस्तान के खिलाड़ी होंगे। इनसे लड़ने के लिए मैं रोजाना इनकी बाउट देखता हूं और उनके खेल की बारीकियों को समझता हूं। कोच से सलाह लेता रहता हूं कि कब क्या करना चाहिए। फरवरी में क्वालिफायर होने हैं। रविवार को मैं इन्हीं की तैयारी करने के लिए बैंगलोर कैंप में जा रहा हूं। 

सवाल : रूस, उज्बेकिस्तान के खिलाड़ियों की बाउट्स आप देख रहे हैं, तो आपको उनसे भिड़ने के लिए मुख्य रूप से किस तकनीक पर ज्यादा काम करना होगा?

जवाब : मेरे सभी प्रतिद्वंद्वियों की लंबाई मुझसे ज्यादा है। इसलिए मैं खिलाड़ी तक रीच बढ़ाने पर काम कर रहा हूं। रिच बढ़ाने, पंच स्पीड और पंच पावर बढ़ाने के लिए हेंड स्पीड ड्रिल एक्सरसाइज रोजाना कर रहा हूं। पंच की स्पीड बढ़ाने के लिए पांच सेकेंड बैक टू बैक पंचिंग चार सेकेंड रेस्ट, तीन सेकेंड पंचिंग दो सेकेंड रेस्ट इस तरह की एक्सरसाइज कर रहा हूं। मैंने विश्व चैंपियनशिप में भी उज्बेकिस्तान के खिलाड़ी से ही लूज किया था, इसलिए मेरा लक्ष्य इन देशों के खिलाड़ियों के खेल की बारीकियों को जानकर उन पर काम करना है। बाकी बैंगलोर कैंप में भी कोच की सलाह से ही क्वालिफायर की तैयारियां करूंगा।

सवाल : दिसंबर में बॉक्सिंग लीग शुरू होने वाली है, इससे खिलाड़ियों को क्या लाभ मिलेगा और क्या कुछ नुकसान हो सकता है? क्या यह खिलाड़ियों की ओलंपिक को लेकर जारी तैयारियों को प्रभावित नहीं करेगा?

जवाब : दिसंबर में होने वाली लीग से खिलाड़ियों को निश्चित ही फायदा होगा। इसमें विदेशी खिलाड़ी आएंगे, जिनसे खेलकर काफी कुछ सीखने को मिलेगा। मेरे अनुसार इसमें तैयारियां प्रभावित होने वाली कोई बात नहीं है, यह हर खिलाड़ियों के लिए फायदेमंद ही रहेगा।

सवाल : वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में लंबे समय बाद आप बिना मेडल के लौटे, हार के क्या कारण रहे और क्या सबब मिला?

जवाब : हार जीत खिलाड़ी के जीवन का हिस्सा है, मैच हारने की बात करें तो विश्व चैंपियनशिप का फाइनल भी मैं हार गया था। इसका मतलब यह नहीं कि मैं हार से हारकर बैठ जाऊं, मुझे अपने खेल की तकनीकों में जहां कमी नजर आ रही है वहां सुधार कर रहा हूं। विश्व मिलिट्री गेम की बात करे तो मैं थोड़ा दुख भी है कि विश्व सतर की प्रतियोगिता में मेडल से चुका हूं। वहां हारने का कारण वहां के नियमों में खामियां रही है। हार से भी सीखने को मिलता है, उसे ही ध्यान में रखकर आने वाली प्रतियोगिताओं के लिए तैयारियां कर रहा हूं।

सवाल : आजकल खेल का शेड्यूल क्या है, यानी रिंग में कितना टाइम, जीम में कितना टाइम ट्रैक पर कितना टाइम बिताते हो?

जवाब : दिन में छह घंटे की प्रैक्टिस मेरी जारी है। इसमें तीन घंटे सुबह तीन घंटे शाम को तैयारी कर रहा हूं। जिसमें सुबह के समय तीन घंटे ट्रैक और जिम में और शाम को तीन घंटे रिंग में प्रैक्टिस कर रहा हूं।

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