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Punjab: अप्रैल में शादी के लिए मां बुन रही थी सेहरे की लड़ियां, गुरदासपुर के लाल ने बारामूला में दिया बलिदान
Sat, 13 Jan 2024 04:24 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 13 Jan 2024 04:24 PM IST
सार
शहीद सिपाही गुरप्रीत सिंह काहनूवान के गांव भैणी खादर के रहने वाले थे। भारतीय सेना की चिनार कोर ने जवान की शहादत पर दुख जताया है। उनके पैतृक गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया। पूरे गांव ने शहीद को नमन किया।
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मां ने दिया शहीद गुरप्रीत सिंह की अर्थी को कंधा।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
गुरदासपुर का एक जवान ने वतन के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। 24 वर्षीय गुरप्रीत सिंह ब्लॉक काहनूवान में पड़ते गांव भैणी खादर के रहने वाले थे। शनिवार को उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान से उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने बताया कि सिपाही गुरप्रीत सिंह 6 साल पहले 73 फील्ड रेजीमेंट में भर्ती हुआ था और इन वर्षों में ज्यादातर वो आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्रों में ही रहा।
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शहीद सिपाही गुरप्रीत सिंह के पिता नरिंदर सिंह ने बताया कि उनका बेटा पिछले साल अगस्त में वीनागुड़ी वेस्ट बंगाल से 45 दिन छुट्टी आया था। छुट्टी के बाद वह 18 राष्ट्रीय राइफल्स जो जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्र गुलमर्ग सेक्टर में तैनात थी, में शामिल होकर देश सेवा में जुट गया।
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शुक्रवार को वह अपने साथियों सहित गुलमर्ग से काफी दूर बर्फीली पहाड़ियों पर आतंकियों की टोह लेने के लिए गश्त कर रहे थे। इसी बीच गुरप्रीत सिंह का पांव पहाड़ी से फिसल गया तथा गहरी खाई में गिरने उनके बेटे ने अपना बलिदान दे दिया। उन्होंने कहा कि पिछली शाम 6 बजे उन्हें यूनिट से फोन आया कि उनका बेटा देश की सुरक्षा करते हुए बलिदान हो गया है।
घर में अकेला कमाने वाला था गुरप्रीत
कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने बताया कि सिपाही गुरप्रीत सिंह अपने पीछे मां लखविंदर कौर, पिता नरिंदर सिंह व छोटा भाई हरप्रीत सिंह छोड़ गया है। उन्होंने बताया कि गुरप्रीत अकेला कमाने वाला था सारे घर की जिम्मेदारी इसी के कंधों पर थी मगर इसके चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
उन्होंने कहा कि उनकी परिषद इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ है और हम इनके हौसलों को कभी परास्त नहीं होने देंगे।
तिब्बड़ी कैंट से आई सेना की 1 महार यूनिट के जवानों ने शस्त्र उल्टे कर तथा हवा में गोलियां दागते हुए बिगुल की गौरवशाली धुन के साथ शहीद को सलामी दी वहीं 1 महार यूनिट के कर्नल गौरव सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल विकास कुमार सिंह, शहीद की यूनिट के मेजर करुणेश पंत, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की तरफ से कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल, जिला योजना बोर्ड बोर्ड के चेयरमैन व आप के प्रदेश महासचिव एडवोकेट जगरूप सिंह शेखवां, जिला प्रशासन की तरफ से डीसी डा. हिमांशु अग्रवाल, एसएसपी दायमा हरीश कुमार ओम प्रकाश, एसपी नवजोत सिंह संधू, एसडीएम अमनदीप कौर घुम्मण, शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की, जिला रक्षा सेवाएं भलाई विभाग की तरफ से सुपरिंटेंडेंट सुदेश कुमार, फील्ड अफसर कैप्टन सकत्तर सिंह, सूबेदार मेजर सिंह, रूपिंदर सिंह, शहीद के पिता नरिंदर सिंह, मां लखविंदर कौर, भाई हरप्रीत सिंह व पंजाब पुलिस के जवानों ने रीथ चढ़ा शहीद को सैल्यूट किया।
इससे पहले सिपाही गुरप्रीत सिंह की तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह को श्रीनगर से एयरलिफ्ट कर पठानकोट लाया गया जहां से शनिवार सुबह सैन्य वाहन द्वारा तिब्बडी कैंट लाया गया। वहां सेना के जवान काफिले के रूप में तिरंगे में लिपटी गुरप्रीत की पार्थिव देह को गांव लेकर पहुंचे, रास्ते भर लोगों ने पुष्प वर्षा कर क्षेत्र के लाडले के बलिदान को नमन किया।
बेटे की अर्थी को कंधा देकर मां ने दी अंतिम विदाई
माहौल उस समय अत्यंत गमगीन हो गया जब मां लखविंदर कौर ने अपने शहीद बेटे की अर्थी को कंधा देकर उसे अंतिम विदाई दी। मां ने नम आंखों से बताया कि तीन दिन पहले उनके बेटे ने वीडियो कॉल कर कहा था कि वह फरवरी में छुट्टी आएगा।
शहीद की मां ने कहा कि पिछले साल उसके बेटे की सगाई हुई थी और अप्रैल में बेटे की शादी तय की थी। घर पर मैं शगुनों के गीत गाते हुए सेहरे की लड़ियां बुन रही थी लेकिन बेटे ने वीरगति को दुल्हन के रूप में गले लगा लिया, वतन पर कुर्बान होने से बेटे की शादी की सारी खुशियां गम में बदल गई हैं अब मैं किसके सहारे जिंदगी काटूंगी।
शहीद परिवार के साथ खड़ी है पंजाब सरकार: मंत्री धालीवाल
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने शहीद परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में पंजाब सरकार शहीद परिवार के साथ खड़ी है।
उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का पता चला है कि इस गांव के हर घर एक फौजी है तथा पहले भी सिपाही सुरिंदर सिंह के रूप में इस गांव ने एक सैनिक देश पर कुर्बान किया है वहीं इस गांव ने एक स्वतंत्रता सेनानी भी देश को दिया है इसलिए वह वायदा करते हैं कि इस गांव के विकास के लिए कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी तथा गांव में शहीद सिपाही गुरप्रीत सिंह की याद में एक स्टेडियम भी बनाया जायेगा इसके अलावा सेना की कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री खुद इस परिवार को आर्थिक सहायता भेंट करने आएंगे।
मंत्री धालीवाल ने शहीदों के अधिकारों व सम्मान की लड़ाई लड़ने वाली पंजाब की एकमात्र गैर राजनीतिक संस्था शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वह इन शहीद परिवारों की समस्याओं के बारे में उन्हें लिखकर दें वह अपनी तरफ से इस परिषद को 3 लाख रुपये की ग्रांट देंगे।
इससे पहले सिपाही गुरप्रीत सिंह की तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह को श्रीनगर से एयरलिफ्ट कर पठानकोट लाया गया जहां से शनिवार सुबह सैन्य वाहन द्वारा तिब्बडी कैंट लाया गया। वहां सेना के जवान काफिले के रूप में तिरंगे में लिपटी गुरप्रीत की पार्थिव देह को गांव लेकर पहुंचे, रास्ते भर लोगों ने पुष्प वर्षा कर क्षेत्र के लाडले के बलिदान को नमन किया।
बेटे की अर्थी को कंधा देकर मां ने दी अंतिम विदाई
माहौल उस समय अत्यंत गमगीन हो गया जब मां लखविंदर कौर ने अपने शहीद बेटे की अर्थी को कंधा देकर उसे अंतिम विदाई दी। मां ने नम आंखों से बताया कि तीन दिन पहले उनके बेटे ने वीडियो कॉल कर कहा था कि वह फरवरी में छुट्टी आएगा।
शहीद की मां ने कहा कि पिछले साल उसके बेटे की सगाई हुई थी और अप्रैल में बेटे की शादी तय की थी। घर पर मैं शगुनों के गीत गाते हुए सेहरे की लड़ियां बुन रही थी लेकिन बेटे ने वीरगति को दुल्हन के रूप में गले लगा लिया, वतन पर कुर्बान होने से बेटे की शादी की सारी खुशियां गम में बदल गई हैं अब मैं किसके सहारे जिंदगी काटूंगी।
शहीद परिवार के साथ खड़ी है पंजाब सरकार: मंत्री धालीवाल
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने शहीद परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में पंजाब सरकार शहीद परिवार के साथ खड़ी है।
उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का पता चला है कि इस गांव के हर घर एक फौजी है तथा पहले भी सिपाही सुरिंदर सिंह के रूप में इस गांव ने एक सैनिक देश पर कुर्बान किया है वहीं इस गांव ने एक स्वतंत्रता सेनानी भी देश को दिया है इसलिए वह वायदा करते हैं कि इस गांव के विकास के लिए कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी तथा गांव में शहीद सिपाही गुरप्रीत सिंह की याद में एक स्टेडियम भी बनाया जायेगा इसके अलावा सेना की कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री खुद इस परिवार को आर्थिक सहायता भेंट करने आएंगे।
मंत्री धालीवाल ने शहीदों के अधिकारों व सम्मान की लड़ाई लड़ने वाली पंजाब की एकमात्र गैर राजनीतिक संस्था शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वह इन शहीद परिवारों की समस्याओं के बारे में उन्हें लिखकर दें वह अपनी तरफ से इस परिषद को 3 लाख रुपये की ग्रांट देंगे।