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सॉफ्टवेयर नहीं कराया रिन्यू, स्मार्ट क्लास से ब्लैक बोर्ड पर लौटे बच्चे
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चंडीगढ़। सारंगपुर के दो सरकारी स्कूलों में गांवों के विद्यार्थियों को स्मार्ट शिक्षा देने के उद्देश्य से 2016 में शिक्षा विभाग ने कक्षाओं में स्मार्ट बोर्ड लगाए थे, लेकिन पिछले सात माह से ये बोर्ड चल ही नहीं रहे हैं, क्योंकि विभाग ने इनका सॉफ्टवेयर रिन्यू नहीं करवाया था। विभागीय ढील की वजह से विद्यार्थी स्मार्ट प्रोजेक्टर और इनोवेटिव लर्निंग से वापस ब्लैक बोर्ड पर आ गए हैं।
शिक्षा विभाग ने वर्ष 2016 में शहर के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तरह ही स्मार्ट बनाने की पहल की थी। इस दौरान शहर के विभिन्न इलाकों के नौ सरकारी स्कूलों का चयन किया गया और यहां एलसीडी प्रोजेक्टर, कंप्यूटर और अन्य ऑडियो-विजुअल सुविधाओं के साथ स्मार्ट कक्षाएं शुरू करवाई गईं। इस दौरान जीएमएसएसएस-19, जीएमएसएसएस-35, जीएमएसएसएस-20, जीएमएसएसएस-18, जीएमएसएसएस-सारंगपुर, जीएमएसएसएस-26 टिंबर मार्केट, जीएचएस-सारंगपुर, जीएचएस-54 और जीएमएचएस-धनास के 200 कमरों को स्मार्ट कक्षाओं में तब्दील किया गया। हालांकि तत्कालीन शिक्षा अधिकारियों ने बयान दिया था कि आगामी महीनों में ही शहर के सरकारी स्कूलों के एक हजार कमरों को स्मार्ट कक्षाओं में तब्दील किया जाएगा, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ, जबकि विभाग ने जिन कमरों को स्मार्ट बनाया है, उन्हें भी संचालित नहीं कर पा रहा है। स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड के लिए निजी कंपनी एक्सट्रा मार्क्स को टेंडर दिया गया था, देश के बहुत-से हिस्सों में इसी कंपनी ने स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड लगाए हैं।
बोर्ड में आई खराबी की जांच की जाएगी
अभी मुझे स्मार्ट बोर्ड के नहीं चलने की कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो इसकी जांच की जाएगी और उन्हें सही करवाया जाएगा। - पालिका अरोड़ा, शिक्षा निदेशक, यूटी
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शिक्षा विभाग ने वर्ष 2016 में शहर के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तरह ही स्मार्ट बनाने की पहल की थी। इस दौरान शहर के विभिन्न इलाकों के नौ सरकारी स्कूलों का चयन किया गया और यहां एलसीडी प्रोजेक्टर, कंप्यूटर और अन्य ऑडियो-विजुअल सुविधाओं के साथ स्मार्ट कक्षाएं शुरू करवाई गईं। इस दौरान जीएमएसएसएस-19, जीएमएसएसएस-35, जीएमएसएसएस-20, जीएमएसएसएस-18, जीएमएसएसएस-सारंगपुर, जीएमएसएसएस-26 टिंबर मार्केट, जीएचएस-सारंगपुर, जीएचएस-54 और जीएमएचएस-धनास के 200 कमरों को स्मार्ट कक्षाओं में तब्दील किया गया। हालांकि तत्कालीन शिक्षा अधिकारियों ने बयान दिया था कि आगामी महीनों में ही शहर के सरकारी स्कूलों के एक हजार कमरों को स्मार्ट कक्षाओं में तब्दील किया जाएगा, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ, जबकि विभाग ने जिन कमरों को स्मार्ट बनाया है, उन्हें भी संचालित नहीं कर पा रहा है। स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड के लिए निजी कंपनी एक्सट्रा मार्क्स को टेंडर दिया गया था, देश के बहुत-से हिस्सों में इसी कंपनी ने स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड लगाए हैं।
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बोर्ड में आई खराबी की जांच की जाएगी
अभी मुझे स्मार्ट बोर्ड के नहीं चलने की कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो इसकी जांच की जाएगी और उन्हें सही करवाया जाएगा। - पालिका अरोड़ा, शिक्षा निदेशक, यूटी
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