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स्नैचरों ने लूट लिया ‘सुखचैन’, खौफ इतना बनानी पड़ी एंटी स्नैचिंग टीम

Mon, 10 Oct 2016 12:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 10 Oct 2016 12:52 AM IST
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Snatching in chandigarh is a major problem in now days
स्नैचिंग रोकने में पुलिस फेल - फोटो : File Photo
स्नैचरों ने शहर के लोगों का में सुख-चैन लूट रखा है। शहर में बढ़ रही स्नैचिंग की वारदातों से लोगों में काफी रोष व दहशत फैली हुई है। महिला हो या पुरुष स्नैचर शहर में किसी को नही छोड़ते है। एंटी स्नैचिंग टीम भी बनाई गई, लेकिन उसके बाद भी वारदातें नहीं रुकी है। महिलाओं के गले से सोने की चेन, तो पुरुषों के मोबाइल फोन उनके निशाने पर  रहते हैं।
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स्नैचिंग के बढ़ते मामलों को लेकर कानून के जानकार कहते हैं कि इस अपराध में ज्यादा बड़ी सजा न होने और आसानी से जमानत मिल जाती है। जो पहली बार स्नैचिंग कर जेल जाता है उसको तो एक हफ्ते में ही जमानत मिल जाती है। जिसके बाद उनके हौंसले और बढ़ जाते है। पुलिस भी कहती है कि स्नैचरों को रोक पाना मुश्किल है। हर गली नुक्कड़ पर पुलिस मौजूद नहीं रह सकती।
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वहीं आंकड़ों की बात करे तो इस साल शहर में 114 स्नैचिंग की वारदातें हो चुकी है। इस अक्तूबर के महीने के ही नौ दिनों में नौ स्नैचिंग के केस दर्ज हो चुके है। अभी साल खत्म होने में तीन महीने पड़े है। पिछले साल 2015 में कुल 154 स्नैचिंग की वारदातें सामने आई थी। जिसमें से पुलिस ने 112 केसों को सुलझाया भी था। वहीं साल 2014 में शहर में 146 स्नैचिंग के मामले थानों में आए। पुलिस ने स्नैचरों को पकड़ कर उसमें से 104 मामले निपटाए थे।
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सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर पुलिस इस नतीजे पर पहुंची हैं कि शहर में दो तरह के  सक्रिय स्नैचर गैंग है। एक गैंग जो मोटर साइकिलों पर स्नैचिंग करता है और दूसरा एक्टिवा पर स्नैचिंग के लिए निकलता है। ये गैंग ज्यादातर बुजुर्ग व अकेली महिलाओं को ही निशाना बनाता है। ज्यादातर मामलों में पाया गया कि आरोपी सुबह जल्दी या रात के वक्त स्नैचिंग करते हैं। 
स्नैचरों का आतंक दक्षिणी सेक्टरों में सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। पुलिस का कहना है कि मोहाली के साथ बार्डर लगता है। जब तक पुलिस मैसेज फ्लेश करती है, तब तक अपराधी स्नैचिंग कर मोहाली में प्रवेश कर जाते है। इसमें यूटी पुलिस का मोहाली पुलिस में आपसी सहयोग और तालमेल बढ़ाने की आवश्यकता है।

स्नैचिंग रोकने में पुलिस फेल, इस वर्ष में अब तक 114 वारदात

Snatching in chandigarh is a major problem in now days
चंडीगढ़ पुलिस पीसीआर - फोटो : File Photo
पुलिस पुराने हिस्ट्रीशीटर और कुख्यात स्नैचरों को ही पकड़ के स्नैचिंग के तार जोड़ने में लगी हुई है। पुलिस को शक है कि पुराने मामलों में जो अपराधी रहे हैं वही जेल से बाहर आने के बाद दोबारा से स्नैचिंग करने लगे हैं। पुलिस ने अदालत से जमानत पर छूट कर बाहर आए अपराधियों की भी लिस्ट तैयार कर थानों में दी है। जिससे उन पर नजर रखी जा सके। 

 फॉसवेक के प्रधान बलजिंदर बिट्टू का कहना है कि स्नैचिंग की वारदातें रोकनी है तो सेक्टरों में बीट सिस्टम दुरुस्त करना पडे़ेगा। पुलिस बीट स्टाफ में बढ़ोतरी करे और सेक्टरों के अंदर के इलाकों में गश्त बढाए। साथ ही बिट्टू ने कहा कि पुलिस सीसीटीवी कैमरे लगवाने पर जोर दे रही है। जिससे अपराध के बाद आरोपियों को पहचान कर पकड़ा जा सका। लेकिन अपराध हों ही न सके, इसके लिए कोई रणनीति नहीं बनाई गई है।

सेक्टर-15 के रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरिंदर शर्मा का कहना है कि चंडीगढ़ पुलिस सिर्फ  चालान पुलिस बनकर रह गई है। वह सड़कों पर मौजूद तो रहती है, लेकिन काम सिर्फ चालान काटने का ही करती है। महिलाओं को अब गहने पहनकर बाहर निकलने में डर लगने लगा है। पता नहीं कब? कौन? चेन स्नैच कर भाग जाए। अब क्या महिलाएं गहने पहनना और सजना संवरना छोड़ दे?
वहीं सेक्टर-40ए आरडब्ल्ूए के महासचिव विनय सिंह का कहना है कि साउथ सेक्टरों में सबसे ज्यादा वारदातें स्नेचिंग की होती है। लेकिन इसके बावजूद इलाकेे  में कोई स्पेशल गश्त या कोई अन्य पुख्ता व्यवस्था नहीं दिखाई देती। रात को तो अकेला निकलना खासकर महिलाओं के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। पुलिस भी स्नैचरों के आगे बेबस नजर आ रही है।

ये है कानून के जानकारों का कहना

Snatching in chandigarh is a major problem in now days
कानून के जानकार मानते हैं कि आसानी से मिलने वाली जमानत और कम सजा भी स्नैचिंग के पीछे बड़ा कारण है। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के एडवोकेट हरीश भारद्वाज के अनुसार अमूमन तौर पर चेन स्नैचिंग के मामलों में पुलिस आईपीसी की धारा 356 और 379 में केस दर्ज करती है। इन धाराओं में आरोपी को जल्द ही जमानत मिल जाती है। आरोपी को दोषी पाए जाने पर अधिकतम 3 साल की ही सजा होती है।

अगर आरोपी ने अपराध के लिए किसी तरह के तेजधार हथियार का इस्तेमाल किया है तो इसमें धारा 392 जोड़ी जाती है। यदि आरोपी पर पहले से ही चेन स्नैचिंग के कई केस दर्ज हैं तो पुलिस इसमें 413 भी जोड़ सकती है। यानि उसे इस तरह के अपराध का आदी बताकर इसका सेशन ट्रायल चला सकती है। ऐसे में दोषी पाए जाने पर अपराधी को अधिकतम 10 साल या उम्रकैद की सजा हो सकती है।
 वहीं एसएसपी सुखचैन सिंह गिल का कहना है कि स्नैचिंग एक आसान क्राइम है।

पुलिस पूरी कोशिश करती है कि वारदात न हो। लेकिन हर जगह पुलिस कर्मचारी मौजूद नहीं रह सकते। पुलिस ने स्नैचरों को पकड़ने के लिए इंस्पेक्टर क्राइम ब्रांच के नेतृत्व में अलग-अलग टीमें बनाई है। पुलिस ने इस साल कई स्नैचरों को दबोच कर स्नैचिंग व चोरी के मामले सुलझाए भी है।

ये प्रमुख मामले सुलझाए पुलिस ने
- 4 अगस्त को दक्षिणी सेक्टरों में सक्रिय एक स्नैचर गैंग के 6 सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जिससे 6 स्नैचिंग की वारदातें पुलिस ने सुलझाई थी।
- क्राइम ब्रांच ने 7 अगस्त को दो स्नैचर संजीव और शीशपाल को गिरफ्तार किया था। जिनसे तीन स्नैचिंग के और कई चोरी मामलें सुलझे थे।
- 9 सितंबर को पुलिस ने रिक्की और रविंदर को पकड़ा था। उनसे छह स्नैच किए हुए मोबाइल बरामद किए थे।
- 2 अक्तूबर को क्राइम ब्रांच ने तीन स्नैचरों संजीव, दीपक और गौरव को स्नैचिंग के आरोप में काबू किया था।
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