फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   sixth sansational truth at pgi

PGI में भाई-भतीजावाद, रिसर्च पर छठा खुलासा

Fri, 03 Apr 2015 06:29 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 03 Apr 2015 06:29 PM IST
विज्ञापन
sixth sansational truth at pgi

रिसर्च वर्क में पीजीआई लगातार पिछड़ रहा है। संस्थान से जुड़े लोग इसकी वजह भी पीजीआई में भाई-भतीजावाद को बताते हैं। ट्राइसिटी में करीब एक दर्जन रिसर्च इंस्टीट्यूट हैं। हाल यह है कि पीजीआई ही इनमें सबसे पिछड़ा है। रिसर्च का स्तर दुनिया में इस आधार पर मापा जाता है कि कितने टॉप जरनल्स में संस्थान के डाक्टरों के रिसर्च प्रकाशित हुए हैं। इनमें नेचर जरनल, न्यू इंग्लैंड जनरल आफ मेडिसिन और लान्सेट मुख्य जरनल हैं। ये तीनों ही चिकित्सा क्षेत्र के प्रमुख जरनल माने जाते हैं। हालांकि नेचर जरनल में मुख्य रूप से बेसिक साइंटिस्ट की रिसर्च प्रकाशित होती है, लेकिन इनमें मेडिकल इंस्टीट्यूट की बेहतरीन रिसर्च को छपने का मौका दिया जाता है। हर जरनल की प्रतिष्ठा उसके इंपैक्ट फैक्टर से आंकी जाती है।

विज्ञापन


नेचर जरनल में पीजीआई
इसका इंपैक्ट फैक्टर 42.35 है। इसमें पीजीआई की सिर्फ दो ही रिसर्च प्रकाशित हुईं हैं। इनमें न्यूरो सर्जरी के प्रोफेसर केके मुखर्जी, डिपार्टमेंट आफ एक्सपेरीमेंटल मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी के प्रोफेसर मधु खुल्लर व कार्डियोलाजी के अजय बहल की रिसर्च प्रकाशित हुई हैं। एम्स के तीन शोध इसमें प्रकाशित हुए हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी की बात करें तो उसके 88 आर्टिकल, नाइपर के पांच, आईआईएसईआर मोहाली के 11 शोध प्रकाशित हो चुके हैं।
विज्ञापन


न्यू इंग्लैड जनरल आफ मेडिसिन में पीजीआई
क्लीनकल डाक्टरों के लिए यह जरनल सबसे महत्वपूर्ण है। इसका इंपैक्ट फैक्टर 54 है। इसमें सिर्फ पीजीआई के डिपार्टमेंट आफ कम्यूनिटी मेडिसिन के एचओडी प्रोफेसर राजेश कुमार की रिसर्च पब्लिश हुई है। पिछले साल प्रकाशित रिसर्च में 17 देशों में कार्डियोवस्कुलर रिस्क के खतरे को बताया गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

लेन्सेट में पीजीआई

sixth sansational truth at pgi

मेडिकल क्षेत्र में लेन्सेट का भी काफी नाम है। इसका इंपैक्ट फैक्टर 39.3 है। जब से पीजीआई बना है, तब से इसमें पीजीआई के तीन ही डाक्टरों की रिसर्च प्रकाशित हुई है। इसमें हीप्टोलाजी डिपार्टमेंट के पूर्व एचओडी डा. जेबी दिलावरी, इसी डिपार्टमेंट के डा. अशोक व कम्युनिटी मेडिसिन के एचओडी प्रोफेसर राजेश कुमार की रिसर्च पब्लिश हुई है।
(पबमेड सर्च से मिली जानकारी के मुताबिक)

एम्स के मुकाबले आधे भी पेटेंट नहीं
पीजीआई एक प्रौद्योगिकी संस्थान नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह कत्तई नहीं कि अनुसंधान को दरकिनार किया जा सके। पीजीआई के नाम अब तक आधा दर्जन ही पेटेंट हैं। इसमें माइक्रोबायोलाजी की डा. कुसुम शर्मा, आरथोपेडिक्स के डा. सर्वदीप सिंह के नाम दो पेटेंट, गेस्टोएंट्रोलाजी के डा. चेतना वैष्णवी हैं। डा. रमेश सेन के नाम भी पेटेंट था, लेकिन अब वे पीजीआई में नहीं है। इसके उलट एम्स के नाम करीब 15 पेटेंट हैं। इसके अलावा एक दर्जन से ज्यादा आवेदन भेजे जा चुके हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed