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कोरोना काल: छह हजार परिवारों ने पेश की मिशाल, घर में उगाई सब्जियां, सेहत संग कमाई भी की

Mon, 01 Jun 2020 03:44 PM IST
ajay kumar मनोज राजपूत, रेवाड़ी (हरियाणा)
मनोज राजपूत, रेवाड़ी (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Mon, 01 Jun 2020 03:44 PM IST
सार

  • घर के आंगन से लेकर छतों पर पर बनाए किचन गार्डन, कोरोना काल में बने वरदान
  • रेवाड़ी में छह हजार परिवारों की ओर से घर पर ही उगाई जा रही है आर्गेनिक सब्जियां
  • जिले के गांवों में 50 प्रतिशत तो शहरों में 30 प्रतिशत घरों में किचन गार्डन

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Six thousand families of Rewari are doing Kitchen Gardening
किचन गार्डेन की देखभाल करता किसान।

विस्तार

कोरोना संकट के दौरान हरियाणा के रेवाड़ी जिले के करीब छह हजार परिवारों द्वारा लगाया गया पोषण वाटिका (किचन गार्डन) किसी वरदान से कम नहीं रहा है। आंगन से लेकर घरों की छतों पर उगाई गई सब्जियों की उपयोगिता कोरोनाकाल में ज्यादा बढ़ गई है। एक ओर जहां इस आपात स्थिति में सब्जी खरीदने में संक्रमण फैलने का भय बना हुआ है, वहीं दूसरी और जिला के छह हजार परिवारों ने अपने किचन गार्डन से प्रतिदिन केमिकल रहित आर्गेनिक सब्जी की पैदावार लेकर अपने परिवार की सेहत का ख्याल रखा है और संक्रमण के खतरे से बचे रहे। 

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वर्ष भर सब्जी के खर्च से बचाएगी पोषण वाटिका
25 गुणा 20 मीटर भूमि पर पोषण वाटिका लगाकर 10 सदस्यों के परिवार को वर्षभर सब्जी खर्च बचाया जा सकता है। इसमें मौसम के हिसाब से सब्जी लगाकर केमिकल रहित सब्जी ले सकते हैं। वहीं दो से तीन सदस्यों का परिवार इसी भूमि पर 30 से 40 हजार रुपये की आय भी प्राप्त कर सकता है। बड़े परिवार पर वर्ष भर में सब्जी के 30 से 50 हजार खर्च को भी बचाया जा सकता है।
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सुधरेगी आपकी सेहत
किचन गार्डन में औषधीय पौधे लगाकर परिवार की सेहत का भी ख्याल रखा जा सकता है। इसमें एलोवीरा, तुलसी, कढ़ी पत्ता, गिलोय, सहजन आदि औषधीय पौधे लगाकर वर्ष भर दवा के खर्च से भी छुटकारा लिया जा सकता है।

वर्ष में तीन बार ले सकेंगे सब्जी की पैदावार

अपने किचन गार्डन में एक वर्ष में मौसम के हिसाब से तीन बार पैदावार ले सकते हैं। इसमें बसंत कालीन सब्जी की पौध फरवरी-मार्च माह में लगा सकते हैं। जिसमें भिंडी, करेला, घीया, टिंडा, तोरई, ग्वार फली, लोबिया, टमाटर, बैंगन व मिर्ची शामिल है। इसके अलावा बरसात काल में उपरोक्त सब्जियों के अलावा चौलाई व बीन तथा सेम आदि की बिजाई करें। वहीं शीतकाल में गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर, फूलगोभी, पत्ता गोभी, आलू, टमाटर, पालक, धनिया, बैंगन, शिमला मिर्च आदि की पौध या बीज बो सकते हैं।

छत से लेकर बरामदे तक ले सकते हैं पैदावार
किचन गार्डन उन लोगों के लिए भी वरदान है जिनके पास जमीन नहीं है। ऐसे लोग अपने घर की छत से लेकर बरामदे या खाली जमीन पर किचन गार्डन लगा सकते हैं। इसके लिए पुराने या नए गमले, प्लास्टिक के टूटे टीन व ड्रम का भी प्रयोग कर सकते हैं। यह घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ सेहत के लिए भी लाभकारी साबित होगा। इसके लिए अधिक बड़े घर, जमीन, प्लॉट आदि की भी जरूरत नहीं है। जितना है उतने में ही आसानी से तैयार कर सकते हैं।

समय के सदुपयोग के साथ धन की बचत
किचन गार्डन लगाकर समय, धन व पानी की बचत कर सकेंगे। इसके अलावा प्राकृतिक रूप से केमिकल रहित सब्जियों से सेहत भी बनी रहेगी। खाली समय का सदुपयोग कर अपने द्वारा तैयार की गई सब्जी का स्वाद भी ले सकेंगे। घर के बेकार समझे जाने वाले पानी से भी आपका किचन गार्डन तरोताजा बना रहेगा।

केवीके के वैज्ञानिक दे रहे बढ़ावा
कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) रामपुरा के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि केवीके द्वारा पिछले दिनों पोषण वाटिका को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया गया था। जिला के करीब 6 हजार परिवारों ने किचन गार्डन लगाया है। इसके लिए वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी जानकारी देने से लेकर बीज एवं पौध उपलब्ध कराई जाती हैं। पोषण वाटिका से वर्षभर आर्गेनिक सब्जी लेकर परिवार की सेहत का ख्याल रखा जा सकता है।

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