सेना को करोड़ों की चपत लगाने का मामला: हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया, एसआईटी जांच का दिया आदेश
अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर ईसीएचएस के तहत सेना को करोड़ों रुपये की चपत लगाई गई। अब मामले की जांच डीजीपी प्रबोध कुमार की अध्यक्षता वाली एसआईटी करेगी। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने 17 जनवरी तक एसआईटी को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश भी दिया है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को एक्स सर्विसमैन कॉंट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) के तहत पूर्व सैनिकों के फर्जी दस्तावेज और वरिष्ठ सेना अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर के जरिए निजी अस्पताल द्वारा सेना को करोड़ों की चपत लगाने के मामले की जांच डीजीपी प्रबोध कुमार की अध्यक्षता वाली एसआईटी को सौंपने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह बेहद संगीन मामला है, जिसमे फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों के आधार पर रक्षा मंत्रालय और सेना को करोड़ों की चपत लगाने के आरोप हैं। इसके आरोपी को किसी भी सूरत में जमानत नहीं दी जा सकती। नरेंद्र कुमार ने अग्रिम जमानत की मांग को लेकर दायर याचिका में हाईकोर्ट को बताया था कि अमनदीप ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के विजय कुमार थापा ने पुलिस को शिकायत दी थी।
शिकायत में थापा ने बताया था कि अस्पताल को सेना की तरफ से कंप्लेंट आई है कि उनके अस्पताल में ईसीएचएस स्कीम के तहत इलाज के लिए रेफर किए गए कुछ मरीजों की अर्जियां फर्जी हैं। अस्पताल ने जब जांच की तो याचिकाकर्ता पर इसके आरोप लगा दिए गए कि वह और उसका एक अन्य साथी अस्पताल की तरफ से सेना से मरीजों के इलाज की स्वीकृतियां ले रेफर करवाता था।
शिकायत पर पुलिस ने पठानकोट में 17 अप्रैल को याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि वह तो अस्पताल का महज एक कर्मी है। उसे इस मामले में बलि का बकरा बनाया जा रहा है। इसमें अस्पताल और सेना के कुछ अधिकारी शामिल हैं। अस्पताल ईसीएचएस स्कीम के तहत रक्षा मंत्रालय से एम्पैनल्ड है।
वह तो मरीजों के दस्तावेज तैयार करवाता था। तस्दीक हो जाने के बाद अस्पताल के खाते में पेमेंट जारी हो जाती थी। अस्पताल के पास ही कुछ वरिष्ठ सैनी अधिकारियों की फर्जी मोहरे हैं, जिसे इस्तेमाल कर वह अपना फायदा उठा रहे हैं। ऐसा पिछले पांच वर्षों से हो रहा है।
अस्पताल के खिलाफ एक शिकायत पर तो इसकी एम्पैनल्मेंट भी रद्द कर दी गई थी। हाईकोर्ट को बताया गया कि सेना ने पिछले साल ऐसे ही कई अस्पतालों के 15 डॉक्टरों और 25 अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी लेकिन पुलिस ने जांच के बाद इन केसों को बंद कर दिया है। इस एफआईआर को भी रसूखदारों के प्रभाव में बंद कर दिया जाएगा।
17 जनवरी तक जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश
हाईकोर्ट ने केस के सभी तथ्यों को सुनने के बाद कहा कि यह बेहद ही गंभीर मामला है, ऐसे में इस मामले की उच्च स्तरीय जांच बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट ने डीजीपी प्रबोध कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित कर जांच का आदेश दिया है। उन्हें अपनी पसंद के अधिकारी, जिसमें एक एसएसपी स्तर का अधिकारी को शामिल करने की छूट दी है। साथ ही पंजाब के डीजीपी को आदेश दिया है कि वह इस एसआईटी को लॉजिस्टिक सपोर्ट सहित कैंप ऑफिस और अन्य सुविधाएं प्रदान करें। एसआईटी को मामले की जांच कर इसकी स्टेटस रिपोर्ट 17 जनवरी को हाईकोर्ट में पेश करने का आदेश दिया।