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बिक्रम मजीठिया पर भारी पड़ा दलित उत्पीड़न का मुद्दा, आयोग ने गठित की SIT
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 27 May 2017 01:25 AM IST
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बिक्रम सिंह मजीठिया
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पंजाब में कैप्टन सरकार के खिलाफ दलितों पर कांग्रेस वर्करों द्वारा अत्याचार का मुद्दा उठाना पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के लिए भारी पड़ गया। राज्य के अनुसूचित जाति आयोग ने प्रदेश में बीते दस साल के दौरान दलितों पर हुए अत्याचार के मामलों की जांच के आदेश जारी किए हैं। खास बात यह है कि राज्य एससी आयोग के चेयरमैन पद पर आसीन राजेश बाघा को बीते दस साल तक सत्ता में रही अकाली-भाजपा सरकार ने ही नियुक्त किया था।
दरअसल बिक्रम सिंह मजीठिया की ओर से दलितों पर अत्याचार का मामला उठाने के बाद उनके हलके के गांवों से कई लोगों ने राज्य एससी आयोग के समक्ष पेश होकर कई पुराने मामले भी रख दिए हैं। लोगों ने आयोग से मांग की कि बीते दस साल के अकाली-भाजपा शासन के दौरान दलितों पर हुए अत्याचारों की जांच कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में दलितों की कोई सुनवाई नहीं हुई और पुलिस ने भी राजनीतिक दबाव में ऐसे मामले दर्ज नहीं किए।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में अमृतसर जिले के दलितों पर काफी अत्याचार हुए, लेकिन पुलिस ने मजीठिया के इशारे पर कोई कार्रवाई नहीं की। इन शिकायतों के आधार पर राज्य एससी आयोग ने अब पंजाब में बीते दस साल के दौरान दलितों पर हुए हमलों की जांच के आदेश जारी किए हैं। इसकी पुष्टि वीरवार को आयोग के चेयरमैन राजेश बाघा ने की।
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उन्होंने बताया कि इन मामलों की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है जिसमें ज्ञानचंद, डॉ. राज सिंह और भारती कैनेडी को शामिल किया गया है। यह टीम 26 मई को अमृतसर का दौरा करेगी और वहां बंगा गांव जाकर मौके का जायजा लेगी। उन्होंने कहा कि इसी तरह बीते दस साल में दलितों पर हुए अत्याचार के मामलों की जांच भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान कई अन्य मामले भी सामने आए हैं।
इनमें एक शिकायत तरनतारन जिले के गांव लाहोरा की है, जहां कहा जा रहा है कि दलितों पर अत्याचार हुए और एक महिला को अगवा किया गया, लेकिन पूर्व मंत्री ने इस मामले में शिकायत दर्ज नहीं होने दी। उल्लेखनीय है कि बिक्रम सिंह मजीठिया ने बंगा गांव में दलित उत्पीड़न का मामला उठाते हुए जांच की मांग की थी।
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दरअसल बिक्रम सिंह मजीठिया की ओर से दलितों पर अत्याचार का मामला उठाने के बाद उनके हलके के गांवों से कई लोगों ने राज्य एससी आयोग के समक्ष पेश होकर कई पुराने मामले भी रख दिए हैं। लोगों ने आयोग से मांग की कि बीते दस साल के अकाली-भाजपा शासन के दौरान दलितों पर हुए अत्याचारों की जांच कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में दलितों की कोई सुनवाई नहीं हुई और पुलिस ने भी राजनीतिक दबाव में ऐसे मामले दर्ज नहीं किए।
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ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में अमृतसर जिले के दलितों पर काफी अत्याचार हुए, लेकिन पुलिस ने मजीठिया के इशारे पर कोई कार्रवाई नहीं की। इन शिकायतों के आधार पर राज्य एससी आयोग ने अब पंजाब में बीते दस साल के दौरान दलितों पर हुए हमलों की जांच के आदेश जारी किए हैं। इसकी पुष्टि वीरवार को आयोग के चेयरमैन राजेश बाघा ने की।
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उन्होंने बताया कि इन मामलों की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है जिसमें ज्ञानचंद, डॉ. राज सिंह और भारती कैनेडी को शामिल किया गया है। यह टीम 26 मई को अमृतसर का दौरा करेगी और वहां बंगा गांव जाकर मौके का जायजा लेगी। उन्होंने कहा कि इसी तरह बीते दस साल में दलितों पर हुए अत्याचार के मामलों की जांच भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान कई अन्य मामले भी सामने आए हैं।
इनमें एक शिकायत तरनतारन जिले के गांव लाहोरा की है, जहां कहा जा रहा है कि दलितों पर अत्याचार हुए और एक महिला को अगवा किया गया, लेकिन पूर्व मंत्री ने इस मामले में शिकायत दर्ज नहीं होने दी। उल्लेखनीय है कि बिक्रम सिंह मजीठिया ने बंगा गांव में दलित उत्पीड़न का मामला उठाते हुए जांच की मांग की थी।